
وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَسْتَ مُرْسَلًا ۚ قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ *وَمَنْ عِندَهُ عِلْمُ الْكِتَابِ*
(अर-रअद – 43)
और (ऐ रसूल) काफिर लोग कहते हैं कि तुम पैग़म्बर नही हो तो तुम (उनसे) कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान मेरी रिसालत की गवाही के वास्ते ख़ुदा और वह शख़्श जिसके पास किताब का इल्म है काफी है
*इस आयत के ज़ैल में हदीस ए अहलेबैत*
फुजैल बिन यासर से नक़ल है *ईमाम मोहम्मद अल बाक़र ؑ* ने कलाम ए इलाही
*وَمَنْ عِنْدَہ‘عِلْمُ الْکِتَابِ‘‘*
के बारे में फ़रमाया:- ये आयात *अली ؑ* की शान में नाज़िल हुई है , वो *पैग़म्बरﷺ* के बाद इस उम्मत के आलिम थे
فضیل بن یسار سے نقل ہے امام باقر ؑ نے کلامِ الہٰی ’’وَمَنْ عِنْدَہ‘عِلْمُ الْکِتَابِ‘‘ کے بارے میں فرمایا: یہ آیت علی ؑ کی شان میں نازل ہوئی ہے‘ وہ پیغمبر ﷺ کے بعد اس امت کے عالِم تھے۔
تفسیر العیاشی ۲/۲۲۱

