
हमेशा उस इंसान के करीब रहो
जो तुम्हे खुश रखे लेकिन उस
इंसान के और भी करीब रहो जो
तुम्हारे बगैर खुश ना रह पाए
( हज़रत अली )
” रिज्क के पीछे अपना इमान कभी खराब मत करो” क्योंकि नसीब का रीज़क इन्सान को ऐसे तलाश करता है जैसे मरने वाले को मौत” हज़रत अली..as
गरीब वो है जिसका कोई दोस्त न हो। -हज़रत अली..As
इल्म की वजह से दोस्तों में इज़ाफ़ा (बढ़ोतरी) होता है दौलत की वजह से दुशमनों में इज़ाफ़ा होता है । हज़रत अली.as.
दौलत को क़दमों की ख़ाक
बनाकर रखो क्यूकि जब
ख़ाक सर पर लगती है तो
वो कब्र कहलाती है।
(हज़रत अली)as..
जहा तक हो सके लालच से
बचो लालच में जिल्लत ही
जिल्लत है – हज़रत अली as
खुबसुरत इंसान से मोहब्बत
नहीं होती बल्कि जिस इंसान
से मोहब्बत होती है वो खुबसुरत
लगने लगता है (हज़रत अली)as….
इंसान मायूस और परेशान इसलिए होता है, क्योंकि वो अपने रब को राज़ी करने के बजाये लोगों को राज़ी करने में लगा रहता है। हज़रत अली
as
दोस्तों के ग़म में शामिल हुवा करो हर हाल में लेकिन खुशियों में तब तक न जाना जब तक वो खुद ना बुलाये…. हज़रत अली
as
इख़्तियार ,ताक़त और दौलत ऐसी चीजें हैं जिनके मिलने से लोग बदलते नहीं नक़ाब” होते हैं। हज़रत अली.as
“इंसान की ज़ुबान उसकी अक्ल का पता देती है और आदमी अपनी ज़ुबान के नीचे छुपा होता है !!” हज़रत अली..As
ज़िल्लत उठाने से बेहतर है तकलीफ उठाओ .हज़रत अली.as
कभी भी अपनी जिस्मानी ताकत और दौलत पर भरोसा न करना क्युँकि बीमारी और ग़रीबी आने में देर नही लगती…!! हज़रत अली

