Manqabat on Shahdat e Imam Ali AlaihisSalam (hindi)

शहादतें इमाम अली अल्हिस्सलाम 😭😭😭

हाय रमज़ान कैसे गुज़ारे
आज ज़ख़्मी हैं मौला हमारे
सर के ख़ू से है दाढ़ी भी रंगीं
खून को बंद कर करके हारे…

है शहादत इमामे अली की
पेशगोई थी मेरे नबी की
बद तरीं मेरी उम्मत का शैतां
आके मस्जिद मैं लेगा तेरी जां
सब्र करना वो जब तुझको मारे
आज ज़ख़्मी हैं मौला हमारे

बेक़रारी की शब थी अली पर
हाथ रख्खा तो ज़ेनब का था सर
ग़म की बदली भी ये छा गई है
अब शहादत क़रीब आ गई है
आंख मैं आँसुओ के थे धारे ।
आज ज़ख्मी हैं मौला हमारे।

अपनी बेटी को वसीयत सुनाई
कर्बला तक अली ने दिखाई
सब्र से काम लेना पड़ेगा
इम्तिहां तुझको देना पड़ेगा
चाहै कोड़े भी ज़ालिम वो मारे।
आज ज़ख़्मी……

जाके मस्जिद अजां से भी पेहले
अपने क़ातिल से जाकर ये बोले
उठ अज़ा हो रही हैं वुज़ू कर
जब मैं सजदे रक्खूँगा ये सर
पूरे अरमान करले तू सारे
आज ज़ख़्मी हैं…..

अब मुसल्ले पे मौला अली हैं
और पीछे शियाने अली हैं
इब्ने मुलजिम ने ज़रबत लगाई
अपने इमां की कीमत लगाई
सर से फूटे लहू के फवारे
देखो ज़ख़्मी हैं मॉल हमारे….

रब्बे काबा की मुझको क़सम है
कामयाबी पे मेरा क़दम है
है ये आग़ाज़ क़ुर्बानियों का
कर्बला तक कि वीरानियों का
दीन हसनैन के अब सहारे
आज ज़ख़्मी हैं मौला हमारे।

रोक मुराद तू अश्कों को अपने
अब तो दिल भी लगा है तड़पने
देख दरबार है ये नजफ़ का
ये मक़ामे करम है शरफ़ का
तू खड़ा है अलीع के दुवारे
अब मुक़ाबिल हैं मौला तुम्हारे…..

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