8 zilhajj Aagaaz e Safar e Karbala

Puri duniya Hajj KARNE aayi Makka,
Makka se Hajj BACHANE chale Hussain (Alaihissalam)

#8_Zilhajj ko Sayyeduna Ibrahim Alaihissalam ko Pehla Khwab aaya tha Sayyeduna Ismail Alaihissalam ki Zibh ka. aur 8 Zilhajj ko he Sayyeduna Imam Hussain Alaihissalam, Sayyeda Zaynab Salamullahi Alaiha aur Khanwada-e-Ahle Bayt aur Ahle Bayt ke Ashaab Apne Nanajaan (SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam) ka Deen bachaane ke keliye Karbala ki taraf rawana hue, ye asal me usi qurbani ki takmil ki taraf safar tha jiska hukm 5 hazar saal pehle Sayyeduna Ibrahim Alaihissalam ko hua tha

Allahumma Salle Ala Sayyedina wa Maulana Muhammadi Nin Nabiyyil Ummiyyi wa Azwajihi Ummahatul Mu’minim wa Zurriyatihi wa Ahle Baytihi kama Sallaita Ala Sayyedina Ibrahim Innaka Hamidum Majeed

मकड़ी_की_आरज़ू

*#मकड़ी_की_आरज़ू*

जब रसूलुल्लाह صلی اللہ تعالٰی علیہ واٰلہٖ وسلّم ग़ारे सौर में दाखिल हुए तो जिब्राईल علیہ السلام ने अर्ज़ किया:
“खुदाया मुझे इजाज़त दे ताकि मैं जाकर अपने परों से ग़ार को बल्कि उस पहाड़ी को ही छुपा दूं-”
खिताब हुआ:
“ऐ जिब्राईल हक़ीक़ी सत्तार मैं ही हूं- मेरे कमाले क़ुदरत का तक़ाज़ा है कि इस काम को मैं अपनी कमज़ोर तरीन मख़्लूक़ के ज़रिए अंजाम दिलवाऊं-”
कमज़ोर मकड़ी को मुक़र्रर किया और उसे हिफाज़त के लिए भेजा- जब मकड़ी को हुक्मे खुदावंदी पहुंचा उसने उसी वक़्त सज्दा ए शुक्र अदा किया- अल्ल्लाह तआला का हुक्म हुआ कि:
“जाकर पर्दा तान दे और मक्खी पर क़नाअत कर लेकिन हिम्मत बलंद रखना- हम एक रोज़ क़ाफे क़ुर्ब के सीमुर्ग (एक ख्याली परिंदा जिसका वतन कोहे क़ाफ बताया जाता है) को तेरे जाल में लाएंगे-”

इस उम्मीद पर सात सौ बरस उस ग़ार के मुंह पर बैठी इंतज़ार करती रही- चुनांचा रात को आराम था ना दिन को चैन- यहां तक कि उस रात आक़ा ए रहमत صلی اللہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم उस ग़ार के दहाने पर पहुंचे- मकड़ी ने हुज़ूर صلی اللہ تعالٰی علیہ واٰلہٖ وسلّم की तरफ इशारा करके कहा:
“मुझ कमज़ोर को आप صلی اللہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم के दीदार का वादा दिया गया है- तशरीफ़ लाइए ताकि आप صلی اللہ تعالٰی علیہ واٰلہٖ وسلّم की ज़ियारत से अपनी आंखें ठंडी करूं-”

हुज़ूर नबी ए अकरम صلی اللہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم जब ग़ार के अंदर तशरीफ़ ले गए मकड़ी ने जाला तनना शुरू कर दिया और इज्ज़ आमेज़ लुआब फैलाना शुरू कर दिया-
हुज़ूर صلی اللہ تعالٰی علیہ واٰلہٖ وسلّم ने हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ رضی اللہ عنہ से कहा:
“अबूबक्र ! एक मुद्दत से मैं इस फिक्र में था कि मेरी उम्मत उस बारीक पुलसिरात से कैसे गुज़रेगी,अब आलमे ग़ैब की खबर देने वाले ने मुझे यूं इत्तिला दी है कि जिस तरह इस पर्दादार को एक बारीक तार पर महफूज़ रखते हैं,तेरे दोस्तों को इसी तरह उस सिरात से महफूज़ रखेंगे-”
( معارجُ النّبوّت،جِلد،۳،صفحہ ۹،۱۰ )

*कुन तो कहा गया था बड़ी मुद्दतों के बाद*
*ये इश्क़ उस कमाल से पहले की चीज़ है*

*सरकार हों तो ग़ार के मुंह पर तना हुआ*
*मकड़ी का एक जाला भी लोहे की चीज़ है*
سبحان اللّٰه
فِداک رُوحی و قلبی
یارسول اللّٰه صلی اللّٰه علیہ وآلہ وسلم