Madine e moti

Mawla Ali Alahissalam ki shan e sakhawat in Surah Al Maidah

إِنَّمَا وَلِيُّكُمُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ وَالَّذِينَ آمَنُوا الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَوَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُمْ رَاكِعُونَ Al-MaidahImam Abdul Razzaq, Abd Bin Hamid, Ibn Jarir, Abu al-Shaykh Aur Ibn Marduwyah Ne Hazrat Ibn Abbas RadiAllahu Anhu Se Riwayat Naql Ki Hai Ke Ye Aayat Sayyedna Ali Alayhissalam Ke Haq Mein Nazil Huyi, Imam Tabrani Ne Awsat Mein Aur Ibn Marduwyah Ne Hazrat Ammar Bin Yasir RadiAllahu Anhu Se Riwayat Naql Ki Hai Ke Sayyedna Ali Alayhissalam Ke Pas Sail Aakar Khada Hogaya Jabke Aap Nafli Namaz Padh Rahe Thae, Sayyedna Ali Ne Anguthi (Ring) Utari Aur Sail Ko De Di Woh Sail Rasoolullah Sallallahu Alaihi Wasallam Ki Khidmat Mein Hazir Hua Aur Sab Waqiah Bayan Kiya Toh Rasoolullah Sallallahu Alaihi Wasallam Par Ye Aayat Nazil Huyi, Rasoolullah Sallallahu Alaihi Wasallam Ne Ye Aayat Apne Sahaba Par Padhi Fir Kaha Jiska Mein Dost Hun Ali Uska Dost Hai Aye Allah Uska Dost Ban Jo Ali Ka Dost Bane Aur Jo Ali Se Dushmani Rakhe Usey Apna Dushman Rakh.Imam Khatib Ne Muttafiq Mein Hazrat Ibn Abbas RadiAllahu Anhu Se Riwayat Naql Ki Hai Ke Sayyedna Ali Alayhissalam Ne Apni Anguthi Sadqa Ki Jabki Aap Ruku Ki Halat Mein Thae, Rasoolullah Sallallahu Alaihi Wasallam Ne Sail Se Pucha Tujhe Ye Anguthi Kisne Di Hai? Usne Arz Ki Is Ruku Karne Wale Yani (Sayyedna Ali) Ne Toh Allah Ta’ala Ne Ye Aayat Nazil Farmayi.(Tafseer Durre Mansur, Jild-2, Safa-804)

गुस्ताख़ ए नबी कौन है?

अहले सुन्नत वल जमात का एक फिरका़ है, जिसने अहले सुन्नत के ही दो-तीन दूसरे फिरको़ं पर गुस्ताख़ होने का फत्वा डाल रखा है और दलीलें भी बडी़ अजीब हैं, फलाँ शख़्स, मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह सुनकर, अँगूठे के नाखून नहीं चूमता, इसलिए गुस्ताख़ ए रसूल है। फलाँ शख़्स, या अल्लाह बस कहता है, रसूलुल्लाह के साथ या लगाने से मना करता है इसलिए वो गुस्ताख़ ए रसूल है। अब ये सारी बातें, इश्क़ ए मुहम्मद सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम में की गई हैं या फिर अपनी गुस्ताखि़याँ छिपाने की गई हैं, ये रब ही बेहतर जानने वाला है। हमारे प्यारे आका़ सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम ने गालियाँ सुनकर भी दुआएँ दीं, आपने पत्थर खाकर भी, बद्दुआ नहीं दीं बल्कि मुहब्बत ही लौटाई है यानी रसूलुल्लाह ने अपने गुनाहगार को, तकलीफ़ पहुँचाने वाले को भी माफ़ किया है। आज अगर कोई, हमारे आका़ मुहम्मद मुस्तफा़ सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम के खिलाफ़, गलतबयानी करता है तो हमें तकलीफ़ पहुँचती है, जो पहुँचनी भी चाहिए। अब मुद्दे की बात ये है की हमारे प्यारे रसूलुल्लाह को सबसे ज्यादा तकलीफ़ कब पहुँचती है और उनके असल गुस्ताख़ कौन हैं। हिम्मत हो तो दिल थामकर, सुनना। अम्मा फातिमा सलामुल्लाह अलैहा को रुलाने वाला, आपको तकलीफ़ पहुँचाने वाला, आपको गलत कहने वाला, गुस्ताख़ ए रसूल है। मौला अली अलैहिस्सलाम को मिम्बरों से गाली बकवाने वाला, आप पर झूठे इल्जा़म लगाने वाला, आपका हक़ खाने वाला और आपकी विलायत को दबाने वाला, गुस्ताख़ ए रसूल है। इमाम हसन अलैहिस्सलाम को शहीद करवाने वाला, आपके कत्ल की साजिश रचने वाला, आपसे किया मुहायदा और सुलह तोड़ने वाला, गुस्ताख़ ए रसूल है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को शहीद करवाने वाला, उन्हें भूखा-प्यासा रखवाने वाला, उनके मासूम से अली असग़र को प्यास के बदले तीर देने और दिलवाने वाला, गुस्ताख़ ए रसूल है। अहलेबैत अलैहिस्सलाम पर जुल्म ढाने वाला, सैयदानियों की चादरें खींचने वाला, उनपर कोडे़ बरसाने और बरसवाने वाला, इमाम ए वक्त को बेडि़यों में जकड़ने वाला, गुस्ताख़ ए रसूल है। और गुस्ताख़ ए रसूल वो भी है, जो इनमें से सबका या किसी का दिफा़ करता हो या दुश्मनाने अहलेबैत के पीछे चलता हो। ये बात पूरी जिम्मेदारी के साथ बयान कर रहा हूँ, अब गुस्ताखी़ और इश्क़ का झूठा तमाशा बंद कर दो, या रसूलुल्लाह ना बोलने वाले को हजा़र फत्वे देते हो, गुस्ताख़ ए ज़हरा के खिलाफ़ बोल नहीं पा रहे और जो बोल रहे हैं, हफ्तों बाद मजबूरी में बोल रहे हैं। अहलेबैत अलैहिस्सलाम को सताना, उनपर तोहमतें लगाना, उनकी शान कम करके बयान करना ही गुस्ताखी़ ए रसूल है। सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम 😥