
कौमे आद मेँ एक बादशाह रहता था जिसका नाम सद्दाद था बयान किया जाता है कि तमाम रुये जमीन पर उसकी हुकूमत थी हजारो के हिसाब से मुल्क थे मुल्क सल्तनत चलाने के लिए हर मुल्क मे अपने नायब बादशाह और वजीर मुकर्रर किये थे !
हजरत हूद अलैहिस्सलाम ने सद्दाद को अल्लाह पर ईमान लाने कि दावत थी आप अलैहिस्सलाम ने फरमाया कि तुम को अल्लाह ने एक अजीम सल्तनत दी है हर किस्म के खजाने और नेमतोँ से माला माल किया है अल्लाह का शुकर बजा लाओ और उस पर ईमान लाओ उसके बदले अल्लाह ताला तुम को बिना हिसाब किताब जन्नत मे दाखिल
फरमायेगा!
सद्दाद जवाब मेँ कहने लगा कि बहिस्त के बारे मे जो तुम ने सुना है मै वैसी ही मैँ इस दुनियाँ मे हि बना लूँगा चुनांच सद्दाद ने तमाम बादशाहो को हुक्म जारी कर दिया कि बहिस्त तामीर कि जाये आला किस्म के कारीगर बुलाये गये जन्नत कि डिजाईन से आगाह किया गया संग मरमर कि बुनियाद रखकर जन्नत तामीर कि जाने लगी दुध शहद और शराब कि नहरे जारी करदी गयी सोने चाँदी के दरख्त लगाये गये खूब सूरत लडके और लडकियोँ से जन्नत सजा दी गयी जन्नत कि तर्ज पर नकली जन्नत बनकर तैयार कर दी गयी !
मगर उस बदबख्त बादशाह को देखने का मौका न मिल पाता एक दिन मुकम्मल इरादा कर लिया और दो सौ घुड सवारो के साथ रवाना हुआ जब जन्नत के बाहर दरवाजे पर पहुँचा तो देखा कि एक आदमी दरवाजे पर खडा है सद्दाद ने पूछा तुम कौन हो जवाब मिला मैँ मलकूल मौत हूँ सवाल किया किस लिए आये हो जवाब मिला तेरी रुह कब्ज करने ये सुनकर सद्दाद के होश उड गये और कहने लगा जन्नत देखने तक कि मोहलत दी जाये मलकूल मौत ने कहा मोहलत किसी सूरत मेँ नही मिल सकती !
सद्दाद घोडे से उतरने लगा एक पाव जन्नत के दरवाजे पर है दूसरा रकाब मेँ है कि मलकुल मौत ने रुह कब्ज कर ली और जहन्नम रशीद हुआ एक फरिश्ते ने चीख मारी और सद्दाद के सभी साथी ढेर हो गये और जहन्नम रशीद हो गये . दोस्तोँ अल्लाह ताला हर चीज पर कादिर है और उसकी गिरफ्त बडी सख्त है .

