मैं फ़ातिमा अलै का बेटा हूँ )

( मैं फ़ातिमा अलै का बेटा हूँ )

मुआविया ने इमाम हसन बिन अली बिन अबी तालिब अलै को शाम आने की दावत दी।

जब इमाम अलै दरबार मुआविया में आने लगे तो मुआविया ने कहा कोई भी अली के बेटे के लिए पर्दा नही हटाएगा हसन झुक कर मेरे दरबार में आएंगे

इमाम आये तो हवा का एक झोंका आया और पर्दा ख़ुद उपर उठ गया, दरबार में बैठे लोग हैरान हो गये,

मुआविया ने इमाम को तोहफ़े में बहुत से ज़ेवरात दिये बहुत सारा सोना दिया और सोचा इमाम जल्दी से उठाएंगे और जब सोना उठाएंगे फ़िर मैं तोहीन करूंगा, और में कहूंगा हसन ग़रीब था इतने ज़ेवरात देखकर ख़ुश हो गया

जब ज़ेवरात इमाम को पेश किये गये तो साथ में मुआविया ने ग़ुरुर से कहा : हसन मुझे देखिए में हिंदा का बेटा हूँ

तमाम दरबार में बैठे लोग इमाम पर हंसने लगे…

दरबार में एक मौला का मुहिब्ब बैठा था जब इमाम जाने लगे तो उस ने इमाम अलै के जूते सीधे कर के रखे,

इमाम ने जूते पहने और जाते हुए उस आदमी से कहा :
वो ज़ेवरात अब तुम्हारे हैं…

मैं हसन तुम्हे अपने जूते सीधे करने पर ख़ुश होकर देता हूँ

मुआविया उठ खडा हुआ और कहा :
इतने ज़ेवरात इसको दे दिए जिसने सिर्फ़ जूते सीधे किए… ?

इमाम अलै मुस्कुराए और कहा :
मुआविया मुझे देखो मैं फ़ातिमा अलै का बेटा हूँ

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