
कर्बला के 39वें शहीद हज़रते मुस्लिम बिन औसजा अल-असदी
आप का पूरा नाम व नसब ये है कि मुस्लिम इब्ने औसजा इब्ने सअलबः इब्ने दिदवीन इब्ने असद इब्ने हज़ीमिया अवू हजल असदी सअदी आप बड़े शरीफुन्नफ्स शरीफुल कौम थे इबादत और जुहद मे दर्जी-ऐ-कमाल पर फाऐज़ थे। आप को सहाबी-ए-रसूल होने का भी शरफ हासिल था। इस्लामी फुतूहात मे आप ने बड़े बड़े कारे नुमायाँ किए हैं। 24 हिजरी में फतहे आज़रबाईजान में हज़ीफा यमान के हमराह जो कारे नुमायाँ उन्होंने किया है वह तारीख़ में यादगार है।
इमाम हुसैन अ० को दावते कूफा देने वालों में आप का इस्मे गिरामी भी है। आप ने मुस्लिम इब्ने अकील की मग़बूलियत और बाद में उनके तहफ्फुज़ में कमाले खुर्मो एहतेयात का सबूत दिया। इब्ने ज़ियाद के कूफे आने के बाद जनाबे मुस्लिम इब्ने औसजा ने ही क़बाइले तमीम व हमदान कुन्दा दरबईः को साथ लेकर दारूल अमारा पर हमला किया था।
मुस्लिम इब्ने अकील और हानी इब्ने अरवाह की शहादत और शरीक इब्ने अऊर (जो पहले से अलील था) की वफात के बाद मुस्लिम इब्ने औसजा थोड़े अरसे रूपोश रहे फिर बाल-बच्चों समेत कूफ़े से पोशीदगी के साथ रवाना होकर करबला पहुँचे ।
नौ मोहरम की शाम को जब इमाम हुसैन अलै० ने खुतबे में फरमाया था कि ये लोग सिर्फ मेरा खून बहाना चाहते हैं ऐ मेरे असहाब-ओ-अइज्जा तुम अगर जाना चाहो तो यहाँ से चले जाओ। मैं तौके बैअत तुम्हारी गरदनों से हटा लेता हूँ। इस के जवाब में अईज्जा की तरफ से हजरते अब्बास और असहाब की जानिब से मुस्लिम इब्ने औसजा ने ही कहा था कि ये हो ही नहीं सकता हम अगर सारी उम्र मारे और जिलाये जायें तब भी आप ही के साथ रहे। आप की ख़िदमत में शहादत सआदते उज़मा है।
शबे आशूर जब ख़न्दक के गिर्द आँग जलाने पर शिघ्र ने ताना ज़नी की तो उस का मुँह तोड़ जवाब मुस्लिम इब्ने औसजा ने ही दिया था।
सुबहे आशूर जब लश्करे इब्ने सअद ने हमला-ए-गराँ किया था तो उस वक्त मुस्लिम इब्ने औसजा ने ऐसी तलवार चलाई और वो मारके किये कि किसी ने कभी ऐसा देखा न सुना था।
आप बड़ी बेजिगरी से लड़ रहे थे कि मुस्लिम इब्ने अब्दुल्लाह ज़ुबयानी और अब्दुल्लाह इब्ने ख़शकारः ने आप पर एक साथ हमला कर दिया मैदान गर्द से पुर था जब गर्द बैठी तो मुस्लिम इब्ने औसजा ख़ाको खून में लोटते देखे गये। इमाम हुसैन अलै० ने बढ़कर मुस्लिम की दिलजोई की और उन्हें दुआएँ दीं। आप की शहादत पर लोगों ने खुशी का इज़हार किया तो सबस इब्ने रबई ने जो अगर चे दुश्मन था बोला अफ़सोस तुम ऐसी शख़्सियत की शहादत पर खुशी का इज़हार कर रहे हो जिन के इस्लाम पर ऐहसानात हैं उन्होनें ने जंगे आज़रबाएजान में छः मुशरिकों को एक साथ कत्ल कर के दुश्मनों की कमर तोड़ दी थी।
आप की शहादत के बाद आप के फर्ज़न्द मैदान में आये और आप ने ज़बरदस्त नबर्द आज़माई की और आप तीस दुश्मनों को कत्ल कर के खुद भी शहीद हो गये।
📝 72 तारे अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम

