THE ACKNOWLEDGER OF VIRTUES
When the pagan Meccan’s hostility against the Muslims became unbearably brutal, the Prophet commanded a group of them to migrate to Abyssinia, even though Abyssinia was a Christian country and its ruler, the Negus, was a Christian. Since the repute of the King Negus reached the Prophet as a just and kind ruler, he selected the Christian country for the first and second migration. It was declared as an “Abode of Peace” for the Muslims.¹
Mut’im b. Adī was an idolater. Concerning him, the Prophet Muhammad said: “Were Mut’im b. Adi alive and interceded with me for these sinful people, I would definitely forgive them for his sake.”² And concerning, Mukhayriq, a Jewish Rabbi, he said: “Mukhayriq is the best of the Jews.”3
I Set forth by Ibn Hisham in al-Sīra al-Nabawiyya, 2:176-177. alTabarī in Tarikh al-Umam wa al-Mulūk, 1:547.
2 Set forth by al-Bukhārī in al-Ṣaḥīḥ, 3:1143 S2970. Abd al-Razzaq in al-Muşannaf, 5:209 S9400. ●
3 Set forth by Ibn Hisham in al-Sīra al-Nabawiyya, 3:51. Ibn ‘Asakir in Tārīkh Madīna Dimashq, 10:229. Ibn Sa’d in al-Ṭabaqāt al-Kubrā, 1:501.
Month: January 2023
Barkat us Sadaat part 17

सय्यद और वज़ीर
अली बिन ईसा हर साल किसी अलवी सैयद जादे को 5000 हज़ार दिरहम बतोरे हदया देते थे, एक साल हुआ कि उन्होंने उस सैयद ज़ादे को नशे में धुत ज़मीन पर पड़े देखा, नशे में देख कर इरादा किया कि आईंदा उसको कुछ नहीं दूंगा, क्योंकि यह तो इन पैसों को शराब व कबाब में खर्च करता है।
चुनान्चे अगले साल जब वह सैयद जादा वज़ीर अली बिन ईसा के पास अपना हदिया लेने आया तो वजीर ने इस सैयद ज़ादे को सख्ती से मना किया कि आईंदा मेरे पास मत आना क्योंकि तुम इन पैसों को हराम कामों में खर्च करते हो, यह सुन कर वह सैयद जादातशरीफ ले गया। रात को वज़ीर अली बिन ईसा ने ख़्वाब देखा और ख़्वाब में उनको नबियों के ताजदार की ज़ियारत नसीब हुई, मगर हाए अफसोस जब वज़ीर ने सरकार की बारगाह में सलाम अर्ज़ किया तो आकाए दो आलम ने वज़ीर से अपना रुखे अनवर फैर लिया, वज़ीर सख़्त बेचैन व परेशान हुआ, कि सरकार मुझ से अपना रुख अनवर फैर रहे हैं। चुनान्चे दूसरी जानिब से फिर सरकार आकर अर्ज़ गुज़ार हुआ या रसूलुल्लाह ज़ेबा क्यों फैर रहे हैंकी बारगाह में आप मुझ से अपना रुखे
, मुझसे क्या ख़ता हुई है?
नबियों के ताजदार ने इर्शाद फरमाया कि:
+ ‘तुम इस सैयद जादे को इसके किसी जाती कमाल की वजह से नज़राना देते थे या मेरी नसब की वजह से?”
अल्लाहु अकबर! मतलब क्या मतलब साफ जाहिर है कि अगर तुम इसको सैयद समझ कर खिदमत करते थे तो अब भी वह सैयद ही है, गुनाहों की वजह से इसका नसब मुझसे मुंकृता नहीं हुआ, वह मेरे आल ही में दाखिल है, जब वह मेरी औलाद है तो तुम ने उसका नज़राना क्यों बंद किया?
आशिके आले रसूल आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान खूब फरमाते हैं।
“सैयद अगर बद्र मज़हब भी हो जाए तब भी उसकी ताज़ीम नहीं जाती जब तक उसकी बद मज़हबी हद कुफ़्र तक न पहुंचे।” (फतावा रजाविया, बरकाते आले रसूल)
Hazrat Mawla Ali Alaihissalam in views of different Scholars.


