तुम्हें बेटी नहीं सिर्फ बेटा चाहिए?

तुम्हें_बेटी_नहीं_सिर्फ_बेटा_चाहिए?

वो लोग बडी़ छोटी और घटिया सोच के मालिक हैं जो ये समझते हैं की लड़का ही आलिम और दीन की मेहनत करने वाला हो सकता है। लड़की का दायरा, लड़कों से अलग ज़रूर है और दोनों की मेहनत के तरीके और तरीका ए तब्लीग़ में फ़र्क़ है लेकिन हक़ दीन पर चलने वाली और हक़ आम करने वाली औरत/बेटी/लड़की भी किसी से कम नहीं।

सिर्फ़ लड़कों की ख़्वाहिश रखने वाले जाहिलों को चाहिए की एक बार सीरत ए फातिमा सलामुल्लाह अलैहा और सीरत ए जै़नब सलामुल्लाह अलैहा की तरफ देख लें। अम्मा बीबी आमना सलामुल्लाह अलैहा और अम्मा बीबी फातिमा बिन्त ए असद के किरदार और दीन की फिक्र पर भी गौ़र कर लें।

अगर करबला में हज़रत हुसैन अलैहिस्सलाम दीन हैं और आपने हक़ आम किया है तो दीन को पालकर जवाँ करने वाली फातिमा सलामुल्लाह अलैहा हैं और बाद ए शहादत दीन का पैगा़म आम करने वाली, जै़नब सलामुल्लाह अलैहा हैं।

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