Aswad Bin Ameer Rivayat Karte Hai Al Rabih Bin Manzar Se Wo Apne Walid Se Ki Imam Hussain Farmate Hai Ki : “Jo Aankh Hamare Gham Se Royi Ya Ak Aansu Hamare Liye Giraya Allah Use Bahisht (Jannat) Se Nawazega”
📚 Reference 📚 Fazaile Sahaba, Imam Ahmad Bin Hambal, Jild 2, Safa 675, Hadees No-1154..
2. Bartan Khoon Se Bhar Gye
Hazrat Bushra Azviyah (RaziAllahu Tala Anha) Farmati Hai:- Jab Hazrat Imam Hussain (RaziAllahu Ta’ala Anhu) Shaheed Kiye Gye To Aasman Se Khoon Barsa, Subha Ko Hamare Matke, Ghare Aur Sare Bartan Khoon Se Bahre Hue The”
📚Book Reference📚 Sawaek ul Muharrika, Safa 644
3. Din Me Sitare Nikal Aaye Rivayat Hai Jab Syedna Imam Hussain(RaziAllahu Ta’ala Anhu) Ko Shaheed Kiya Gya To Itna Zabardast Suraj Garehan Hua Ki Din Me Sitare Nikal Aaye
क़त्ले हुसैन व अहले बैत महज़ एक जुर्मे क़त्ले इंसानी है या जुर्मे अज़ियते नबी ﷺ है????
क़ुरआन में सूरह अहज़ाब में अल्लाह मुसलमानों से कह रहा है कि बग़ैर इजाज़त नबी के घर में दाख़िल होना नबी को अज़ियत देता है. खाना खाने के बाद देर तक नबी के घर में बैठे रहना कि हुज़ूर इंतिज़ार करें तुम्हारे जाने का, यह मेरे नबी को अज़ियत देता है. अज़वाजे मुतहरात से अगर कुछ मांगना हो तो पर्दे के पीछे से मांगा करो, तुम्हारा पर्दे के बग़ैर कोई चीज़ मांगना भी मेरे नबी के लिये अज़ियत है. तुम्हारे लिये हलाल नहीं है कि तुम मेरे नबी को अज़ियत दो. तुम्हारी इतनी सी बात भी मेरे नबी को अज़ियत देती है और यह अल्लाह को गवारा नहीं.
नबी को अज़ियत देना अल्लाह को अज़ियत देना है. जैसे नबी से मुहब्बत अल्लाह से मुहब्बत, नबी की अताअत अल्लाह की अताअत, नबी की नाफ़रमानी अल्लाह की नाफ़रमानी, नबी का अदब अल्लाह का अदब, वैसे ही नबी को अज़ियत अल्लाह को अज़ियत.
नबी को अज़ियत देने वाले पर हुक्म क्या है? दुनिया व आख़िरत में अल्लाह की लानत है, उसको अल्लाह ने मलऊन कर दिया और उसके लिये अज़ाबे मुहीन (ज़िल्लत वाला अज़ाब) है.
क़ुरआन में कहीं ज़िक्र आता ‘अज़ाबे अज़ीम’, कहीं ज़िक्र आता है ‘अज़ाबे अलीम’ और कहीं ज़िक्र आता है ‘अज़ाबे मुहीन’. जिसका जैसा जुर्म उसके लिये वैसा अज़ाब. क़ुरआन के तालिबे इल्म बख़ूबी वाक़िफ़ हैं कि इन तीनों अज़ाब में सबसे शदीद तर और सख़्त अज़ाब, ‘अज़ाबे मुहीन’ है, जो अल्लाह सिर्फ़ सरकश काफ़िरों पर नाज़िल करने के लिये इस्तेमाल करता है. इसका मतलब नबी को अज़ियत देने वालों को अल्लाह वह अज़ाब देगा जो सरकश काफ़िरों को देता है.
अब आईये हुसैन व अहले बैत के तअल्लुक़ से नबी की मुहब्बत देखें, नबी की मवद्दत देखें, हुज़ूर के क़ल्बे अतहर में उनका मुक़ाम व मर्तबा क्या है. हुज़ूर की रूह में क्या है, उनके एहसासात में क्या है, उनके जज़बात में क्या है, उनकी कैफ़ियात में क्या है. हुसैन अगर रोते तो हुज़ूर तड़प जाते, हुसैन को गोद में उठाने के लिये हुज़ूर अपना ख़ुतबा छोड़ देते, हुसैन अगर हुज़ूर की पुश्त मुबारक पर सवार हो जाते तो हुज़ूर काफ़ी देर तक सजदे से न उठते. हुज़ूर ने उम्मत को बताना चाहा कि मेरी मुहब्बत जो हुसैन से है वह अल्लाह के हुज़ूर कैफ़ियते सजदे से भी ज़्यादा है मुझे. अल्लाह के हुज़ूर सजदा रेज़ी में भी मैं नहीं चाहता कि हुसैन को इतनी तकलीफ़ हो जाए कि वह मुझसे मुहब्बत में मेरी पीठ पर सवार हो जाए और मैं उसे नीचे उतार दूँ. इमाम हुसैन की मुहब्बत को यह दर्जा दिया है हुज़ूर ने, उनको इतनी सी अज़ियत गवारा नहीं. और कर्बला में हुसैन व उनके घरवालों को दुश्मनों ने घेरकर बेरहमी से क़त्ल किया, औरतों और बच्चों को भी न छोड़ा. हज़रत हुसैन की गर्दन काटकर उसे नेज़े पे उठा कर पूरे शहर में घुमाया गया, उनकी मौत पर जश्न मनाया गया, उनके जिस्म पर घोड़े दौड़ाए गए. यह सब पढ़ कर, सुन कर कोई यह कहे कि यह नफ़्से इंसानी के क़त्ल का मामला है. انا للہ وانا الیہ راجعون कर्बला में शहादते हुसैन और शहादते अहले बैत को क़त्ल ए इंसानी के जुर्म के हुक्म में नहीं देखा जाएगा बल्कि अज़ियत ए नबी के हुक्म में देखा जाएगा.
जो लोग नबी को अज़ियत देना चाहते हैं वह चाहे नबी की ज़ात की निस्बत से हो, चाहे वह नबी की औलाद की निस्बत से हो, चाहे वह नबी की अहले बैत की निस्बत से हो, जिनके बारे में हुज़ूर ने फ़रमा दिया कि जिसने इनको अज़ियत दी उसने मुझे अज़ियत दी. और नबी को अज़ियत देने वालों के लिये काफ़िरों वाला अज़ाब मुक़र्रर कर दिया गया है. फिर क़ुरआन का सरीह हुक्म आ जाने के बाद अज़ियत देने वाले के लिये ईमान और तौबा के इमकानात ढूंढना और फ़ेल ए हराम और फ़ेल ए कुफ़्र के फ़र्क़ को ढूंढना, हुसैन व अहले बैत के क़ातिल के लिये हमदर्दी ज़ाहिर करना, उसके लिये तहफ़्फ़ुज़ फ़राहम करना, उसको जन्नती साबित करना हैरत की बात है.
लोगों को क्या हो गया है, क्या वह नबी के इतने बेवफ़ा हो गए हैं ? हुज़ूर से इतनी भी हया न रही, हुज़ूर से इतने ग़ैर हो गए हैं. क्या वो हुज़ूर के वो फ़रमूदात भी भूल गए हैं जो हुज़ूर ने अपनी अहले बैत और अपने बेटे हसन व हुसैन के लिये फ़रमाए थे.
عن علی رضى الله تعالى عنه قال بعثنی رسول الله صلى الله تعالى عليه وآله وسلم الی الیمن فقلت یا رسول الله صلى الله تعالى عليه وآله وسلم بعثنی و انا شاب اقضی بینهم ولا ادری ما القضاء فضرب صدری بیده ثم قال اللهم اهد قلبه ثبت لسانه فوالذی خلق الحبة ما شککت فی قضاء بین اثنین
“HazratAli RadiyAllahu Ta’ala ‘Anhu Se Riwayat Hai Unhone Kaha Ki RasoolAllah SallAllahu Ta’ala Alayka Wa Sallam Ne Mujhe Yaman Kee Bheja Mein Ne Arz Kiya Ya RasoolAllah Aap Mujhe Bhej To Rahe Hain Lekin Mein Nau Jawaan Hoo’n Mein Un Logo’n Ke Daarmiyaan Faisle Kyun Kar Karunga? Mein Jaanta Hee Nahin Hoo’n Ki Qaza Kya Hai? Pas Huzoor SallAllahu Ta’ala Alayka Wa Sallam Ne Apna Daste Aqdas Mere Seene Par Maara Phir Farmaya Aye Allah Is Ke Dil Ko Hidaayat Ata Farma, Us Zaat Kee Qasam Jis Ne Daane Ko Paida Farmaya Mujhe Do Aadmiyo’n Ke Maabain Faisle Karte Waqt Koi Shikaayat Nahin Huwi.” – [Hakim Fi Al-Mustadrak, 03/135.]
Yahi Wajah Hai Ki Sayyidina Ali RadiyAllahu Ta’ala ‘Anhu Kee Baseerate Daanaa’i Aur Quwwate Faisla Zarbe Mathal Ban Gayi. Ahde Risaalat Ma’ab SallAllahu Ta’ala Alayka Wa Sallam Ke Ba’d Ahde Khilaafate Rashidah Tak Tamaam Daqeeq Ilmi Fiqhi Aur Roohaani Masa’il Ke Liye Log Aap Se Hee Rujoo’ Karte They. Khud Khulafa’-E-Rasool Sayyidina Siddiqe Akbar, Farooqe A’zam Aur Sayyidina Uthman Ridwanu Allahi Ta’ala ‘Alayhim Ajma’iyn Aap Kee Raae Ko Hamesha Fauqiyyat Dete They Aur Aap Ne Un Teeno’n Khulafa’ Ke Daur Me Mufti-E-A’zam Ke Mansabe Jalila Par Faa’iz Rahe. Isi Du’aa Kee Taathir Thi Ki Aap Fehm Firaasat Ilm-o-Hikmat Aur Fikr-o-Tadabbur Kee Un Bulandiyo’n Par Faa’iz Hote Jo Ambiya’ Ke Ilaawah Kisi Shakhs Kee Isti’taa’at Me Mumkin Nahin. – [Dhib’he ‘Azeem(Dhib’he Isma’il ‘Alayh-is-Salam Se Dhib’he Husayn RadiyAllahu Ta’ala ‘Anhu Tak)/63_64.] 〰〰 Join Karen