हजरत जॉन शहीद ऐ करबला

हजरत जॉन शहीद ऐ करबला

इमाम हुसैन के साथ मदीने से 16 गुलाम भी आए थे जिसमे बहुत से इथोपिया के थे
कुछ का ताल्लुक इमाम के घराने से था कुछ इमाम के असहाबो के थे…
शब ऐ आशूर इमाम और उनके असहाब ने इन 16 गुलामों को आजाद दिया और चले जाने को कहा मगर कि नही गया. उनको इमाम का मकसद समझ आ गया था और जानते थे जन्नत में उनके लिए एक आला मुकाम है

उनमें से एक थे हजरत जॉन
जॉन को सहाबी ऐ रसूल जनाब अबू जर गफ्फारी ने तोहफे में मौला अली और बीबी फातिमा को दिया था.. मौला के साथ रहकर उन्होंने कुरान की तफसीर और रसूलल्लाह की हदीसे सीखी
जब मौला की शहादत हुई तो आप इमाम हसन के साथ रहे उनकी शहादत के बाद इमाम हुसैन के साथ जनाब ऐ जॉन कितने खुशनसीब थे की उन्हें 3 इमामों की सौबत नसीब हुई

शब ऐ आशूर जॉन की सारी रात अपनी तलवार को तेज़ करने और कुरान की तिलावत में गुजरी

रोज ऐ आशूर एक एक करके सब शहीद होते गए सबने बहुत शुजाअत और दिलेरी से जंग की.. इमाम अपने भाई अब्बास और बेटे अली अकबर के साथ मिलकर सबके लाशे खेमे में लाते…जब नमाज ऐ जुहर हो गई जनाबे जॉन इमाम के पास आए और हाथ बांधकर चुपचाप खड़े थे..
इमाम ने देखा और पूछा
जॉन! मेरे दोस्त जॉन! क्या बात है?
जॉन बोले मौला बहुत हुआ में और नही देख सकता बीबी फातिमा के बच्चो को मेरे सामने कत्ल होते नही देख सकता आका मुझको इजाज़त दें में भी रन में जाऊ..
मौला ने फरमाया जॉन तुम जईफ हो तुम जैसे जईफ पर जिहाद वाजिब नहीं में तुम्हे इजाजत नहीं दे सकता

जॉन को किसी भी तरह से इजाजत लेनी थी वो बोले

मौला में जानता हूं आप मुझको रन में क्यों नहीं जाने देते वो इसलिए ना क्योंकि में काला हूं और आप एक काले हब्शी गुलाम के खून को अहले बेत के खून ने नही मिलाना चाहते??

मौला को ये सुनकर बहुत हैरत हुई अपने फरमाया

जॉन मेरे दोस्त ऐसा मत कहो तुम जानते हो हम ऐसा नहीं सोचते ना हम ऐसा करते है

जाओ जॉन जाओ तुम्हारा अल्लाह हाफिज हो
इमाम ने खुद जॉन को तैयार किया और सवार किया और फरमाया फि अमानाल्लाह जॉन

जॉन खुदाई बहुत खुश थे की वो रन में जा रहे थे रास्ते में उनको रसूलल्लाह का ज़माना याद आ गया की केसे वो अपने नवासे हुसैन से मुहब्बत करते थे जब इमाम के खेल खेल में चोट लग जाती तो रसूल ऐ खुदा आपका ख्याल रखते
उन्हे वो दिन याद आया जब रसूल सजदे में थे और इमाम उनकी पुश्त पे चढ़े थे और उन्होंने जब तक सजदे से सर ना उठाया जब तक की इमाम खुद ना उतरे वो अपने नवासे को चोट नहीं लगने देना चाहते थे ये सब सोचकर जॉन की आंखे भर आई

जॉन मैदान में पहुंचे और यजीदियो से कहने लगे
मुझे देखो तुमने मुझे रसूल ऐ खुदा के साथ देखा है मुझे देखकर उनको याद करो तुम कहते हो वो पयंबर है तुम अपने आप को मुसलमान कहते हो क्या तुम्हे लगता है रसूलल्लाह की इस बात से खुश होंगे के तुम लोग उनके प्यारे नवासे को कत्ल करते हो?

हुसैन ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है वो मासूम है उनको छोड़ दो और खुद को नार ऐ दौजक से बचा लो

यजीदी लईन थे वो असल में मुसलमान थे ही नहीं वो सच सुनने को तैयार नहीं थे
जनाबे जॉन पे हमला कर दिया गया हर तरफ से तीरों की बारिश होने लगी उन्होंने बहुत शूजाअत से जंग की कई को नार ऐ जहन्नम वासिल किया

अफसोस!!
एक 80 साल का जईफ 3 दिन का भूखा प्यासा केसे बर्दाश्त करता घोड़े से गिर गए और फरमाया

मौला मेरे पास आए में आपका आखरी बार दीदार करना चाहता हूं
इमाम भागते हुए जॉन के पास पहुंचे उसका सर अपनी गोद मे रखा और गिरया करने लगे

जॉन मुझे माफ करना तुम मेरे घर से 3 दिन के भूखे प्यासे जा रहे हो

जॉन ने फरमाया
मौला आप शर्मिंदा क्यों होते है आपने मेरे हक़ में बहुत बड़ा एहसान किया है मुझको आप पर निसार होने के लिए इजाजत देकर…
देखे कौन कौन आया है मुझे लेने के लिए खुद रसूलल्लाह आए है बीबी फातिमा मौला अली मौला हसन भी यही है
ये कहकर जनाब ऐ जॉन की रूह परवाज हो गई

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