
- आयते ततहीर “अल्लाह पाक का इरादाह यही है कि, ऐ एहलेबैत (नबी के घर वालों) तुम्हें हर नापाकी से दूर रखे, और पूरी तरीके से तुम्हें खूब पाक व सुथरा कर दे।”
(सूरह अल-अहज़ाब, आयत नं.-33)

हजरत अबु सईद खुदरी (र.ज.) फरमाते हैं, कि एहलेबैत से मुराद यहाँ इस आयत में “हजरत मौला अली शेरे खुदा (क.व.क.), हजरत खातूने जन्नत फातिमा
जहरा (स.अ.), हजरत इमाम हसन (अ.स.) व हजरत इमाम हुसैन (अ.स.)
“रिवायत है कि एक रोज़ हजरत फातिमा जहरा (स.अ.) गोश्त के समोसे बना कर हुजूर (अ.स.) की खिदमत में लाई, तो हुजूर सल्लाहो अलैहे-वा-आलिही वसल्लम ने फरमाया कि ऐ जाने पिदर ‘अली हसन व हुसैन (अ.मु.स.) को बुलाओ ताकि हम सब मिल कर खाँऐ जब सब आ गये और खाना खा लिया तो हुजूर (अ.स.) ने उन चारों और खुद को अपनी कमली में दाखिल करके फरमाया. “ऐ अल्लाह ! यह मेरी एहलेबैत है इन से रिज्स (नापाकी) को दूर फरमा और इनको पाकीज़ा रख” उसी वक्त यह आयते ततहीर नाजिल हुई (सुब्हान-अल्लाह)। बाज तफ्सीरों में लिखा है जब हुजूर (अ.स.) नमाज के वक्त दरे फातिमा जहरा (ए.ज.अ.) पर गुज़र फरमाते तो फरमाते –
السلام عليكم يا أهل البيت الصلوة انمايريد اللہ ليذهب عنكم الرجس أهل البيت
(तफ्सीरे हुसैनी, जिल्द-2, सफा-600)
नोट- (अल्लाह ने इस आयत में एहलेबैत-ए-पाक की पाकीजगी व उनकी तहारत का जिक्र किया है। और हुजूर सल्लाहो अलेहे-वा-आलिही वसल्लम ने जब अपनी कमली (मुबारक चादर) में चारों नूफूसे नूरानी को दाखिल किया तो उस मुबारक कमली में पांच नूफूसे नूरानी जलवा अफरोज थे, (i) हुजूर (स.अ.वा.व.), (ii) हज़रत अली (आ स.) (iii) हजरत फातिमा ज़हरा (स.अ.), (iv) हजरत इमाम हसन (अ.स.), (v) हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) थे, तो इसलिए कमली में तन थे पाँच और नाजिल हुई. आयत उनकी शान में उनकी पाकी व तहारत के चरचे के लिए, इसलिए एहले इश्क ने कुरआन-ओ-हदीस के मुताबिक उनको ‘पंजतन पाक’ कहा।
इसलिए इन पाँच मुबारक हस्तियों को एक साथ पंजतन पाक भी कहते हैं।
क्योंकि अल्लाह ने इनको पाक रखा है और उनकी पाकी का ऐलान फरमाया है। इसका यह भी मतलब नहीं के सहाबा-ए-कराम (र.ज.अ.) की कोई शान नहीं है। वह भी अपने-अपने दर्जे पर फायज हैं, और उनको हुजूर (अ.स.) ने अपने करम से नवाजा है, लेकिन पंजतन पाक वह हैं जिनको खुद अल्लाह ने अजल से पाक किया है और उनकी पाकी का ऐलान खुद फरमाया है, इसलिए पंजतन पाक से किसी क मुकाबला नहीं हो सकता। अल्लाह ने पंजतन पाक को इस तरह पाक किया है कि उनको पाकी का दरिया बना दिया है। अल्लाह ने खुद इरादा किया है, और अल्ला का इरादा तब से है, जब से अल्लाह है।)

