
फरमान ए अमीरूल मोमेनीन हज़रत ईमाम अली इब्ने अबुतालिबع☝🏻
मदद करना एक बहुत ही महँगा तोहफा है, इस लिए सब से इसकी तवक्को हरगिज ना रखो, क्यु की इस दुनिया मे बहुत ही थोड़े लोग दिल के अमीर होते है..

फरमान ए अमीरूल मोमेनीन हज़रत ईमाम अली इब्ने अबुतालिबع☝🏻
मदद करना एक बहुत ही महँगा तोहफा है, इस लिए सब से इसकी तवक्को हरगिज ना रखो, क्यु की इस दुनिया मे बहुत ही थोड़े लोग दिल के अमीर होते है..

हदीसों की रौशनी, हज़रते बरा फ़रमाते हैं मैंने रसूलुल्लाहि सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम से ज़्यादह खूबसूरत कभी किसी चीज़ को न देखा,
बुख़ारी शरीफ़ जिल्द 1 सफ़्हा 502
हज़रते अबू हुरैरह कहते हैं के मैंने कोई चीज़ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ज़्यादह खूबसूरत, हसीनो जमील न देखी ऐसा लगता था जैसे आपके चेहरे में सूरज गरदिश कर रहा है,,,
तिरमिज़ी शरीफ जिल्द 2 सफ़्हा 205
ऐ अल्लाह हमें अपने प्यारे हबीब अलैहिस सलातो वस्स्लाम के सदक़े मोबाइल को इस्लामी तरीक़े से इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ अता फरमा और खातिमा बिलखैर फरमा, आमीन

वसीले का इन्कार न करो
हदीसों की रौशनी, हज़रते उमैय्यह बिन ख़ालिद से मरवी है के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुहाजिरिन दरवेशों के वसीले से जंगों में फ़तह की दोआ माँगते थे
मिश्कात शतिफ सफ़्हा 443
प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस अंदाज़ में दोआ कर के अपनी पूरी उम्मत को ये बता दिया के जो हुस्नो खूबी के साथ मेरे दामन से वाबस्तह हो जाए उस्के वसीले से भी दोआ मांगी जा सकती है
हज़रते अनस से मर’वी है के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया के अल्लाह के कुछ बन्दे ऐसे हैं के अगर वह अल्लाह तआला पर क़सम खाजाएँ तो अल्लाह तआला उनकी बात पूरी फरमा देता है,
बुखारी जिल्द 1 सफ्हा 394
जब उम्मत में ऐसे कुछ बन्दगाने खुदा हैं के खुदाए तआला उनकी बात पूरी फरमाता है तो जो उसके खास महबूब हैं तो उनका चाहा हुआ क्यों नहीं होगा,
रसूलुल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया के मेरी शफ़ाअत से कुछ लोग जहन्नम से निकाले जाएँगे और जन्नत में दाख़िल किए जाएंगे और जन्नत में उनका नाम जहन्नम वाले होगा[यानी जहन्नम से आने वाले]
बुख़ारी शरीफ़ जिल्द 2 सफ़्हा 971



अहले सुन्नत की मशहूर और मोतबर किताब ‘कंजुल-उम्माल’, ‘मुसनद अबी याला’ और ‘इजालतुल खुफा’ में हदीस है कि मुहम्मद सल्ल० ने मौला अली अलैहिस्सलाम से फरमाया कि-
“मेरे बाद उम्मत तुमसे गद्दारी करेगी, तुम मेरे दीन पर क़ायम रहोगे और मेरी सुन्नत पर शहीद किए जाओगे।
जिसने तुमसे मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने तुमसे बुग्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा और आपकी दाढ़ी अनकरीब सर के ज़ख्म से तर होगी।” – कंजुल-उम्माल, हदीस नंबर 32997.
लगभग यही बात इमाम अबी याला (वफात 307 हिजरी) ने अपनी मशहूर किताब मुस्नदे अबू याला में लिखा है कि-
“हजरत अली अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि हम रसूलुल्लाह सल्ल० के साथ मदीने की गलियों में टहल रहे थे और आपने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था फिर अचानक हम सब एक बाग के पास पहुंचे तो मैंने कहा कि या रसूलुल्लाह.! ये कितना अच्छा बाग है। आप सल्ल० ने फरमाया कि आपके लिए जन्नत में इससे भी अच्छा बाग है। इसी तरह हम सात बागों से गुजरें और हर बार यही सवाल किया तो रसूलुल्लाह ने यही जवाब दिया कि आपके लिए जन्नत में इससे भी अच्छा बाग है। फिर रास्ते में मुहम्मद सल्ल० रोने लगें तो मैंने कहा कि या रसूलुल्लाह सल्ल० आप क्युं रो रहे हो.?? तो आप सल्ल० ने फरमाया कि “उस बुग्ज की वजह से रो रहा हूं जो लोगों के सीने में तेरे लिए है..जिसका इज़हार मेरे (विसाल के) बाद करेंगें। फिर मैंने अर्ज किया कि क्या मेरा दीन सलामत रहेगा.?? आपने कहा कि आपका दीन सलामत रहेगा।”
-मुस्नद अबी याला, जिल्द अव्वल, सफा नंबर 361 और 362, हदीस नंबर 561
इस हदीस को हजरत शाह वली उल्लाह मुहद्दिस देहलवी रह० ने भी ‘इजालतुल-खुफा’ में लिखा है और इस किताब में दूसरी जगह यह भी लिखते हैं कि मुहम्मद सल्ल० ने मौला अली अलैहिस्सलाम को नसीहत कर गये थे कि मेरे बाद सब्र करना.!!
यह बात अहले सुन्नत वल जमाआत के काई मोतबर किताब से साबित है कि मुहम्मद मुस्तफा (स.अ.व) ने मौला अली (अ.स) से कह कर गये थे कि मेरे बाद यानि मेरे विसाल होने के बाद मेरी ये उम्मत तुमसे (यानि अली अलैहिस्सलाम और इनके खानदान से) गद्दारी करेगी और लोगों के दिलों में तुम्हारे लिए जो बुग्ज आज छिपा हुआ है वो जाहिर होगा।
नबी सल्ल० की मशहूर हदीस है कि अली से कोई बुग्ज नहीं करेगा सिवाय मुनाफिक और कोई मुहब्बत नहीं करेगा सिवाय मोमिन के… यानि अली अलैहिस्सलाम की मोहब्बत ईमान है और अली अलैहिस्सलाम का बुग्ज मुनाफिकत है।

हज़रत मौला अली अलैहिस्सलाम से रवायत है कि रसूले करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि कयामत के दिन अर्शे इलाही के गिर्द मेरे अहले बैत के दोस्तों यानी मानने वालों के लिए मिंबर रखे जाएंगे अल्लाह रब्बुल इज्जत इरशाद फरमायेगा की मेरे बंदों आओ मै तुम पर अपना करम निछावर करूं तुम दुनिया में बहुत अज़ीयत सह चुके हो