मफ़हूम ए हदीस

मफ़हूम ए हदीस :- *अली से दुश्मनी रखने वाले से मेरा कोई ताल्लुक़ नही

* हदीस ए पाक जाबिर बिन अब्दुल्लाह रदिअल्लाहो अन्हो से रिवायत है के हुज़ूर नबी ए अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम ने इरशाद फ़रमाया 👇👇👇👇👇 तीन चीज़े जिस में हों वो मुझसे नही और मैं उससे नही 1- अली से बुग्ज़ 2- मेरे अहलेबैत से दुश्मनी 3- ये कहना के ईमान कलाम है हवाला 📚📚 तारीख़ ए दमिश्क़ 42/274

🇹🇷आया सोफ़िया मस्जिद में तलवार 🗡️लेके खुतबा क्यों?

*🇹🇷आया सोफ़िया मस्जिद में तलवार 🗡️लेके खुतबा क्यों?*

*⚡इस जुमा को मस्जिद आया सोफ़िया में जो ख़ुत्बा में तलवार लेकर जो खतीब अली अरबाश साहब बैठे थे वो तलवार तारीखी मुजाहिद सुल्तान मोहम्मद अल फतेह की है*

*जिस 🗡️तलवार से कुस्तुन्तुनिया की जंग जीती गयी थी*

*ओर कल जब आया स़ोफ़िया में जुमा के ख़तीब “अली अरबाश” को तलवार हाथ में लेकर ख़ुत्बा देते सुना तो मेरे लिए यह तजस्सुस की बात हो गई कि तलवार लेकर ख़ुत्बा देने के क्या इशारे हो सकते हैं..*

*⚡थोड़ा सा तलाश और सर खपाने के बाद यह राज़ खुल गया कि यह कोई धाक जमाने या शोबाज़ी करने जैसा कोई मामला नहीं बल्कि एक ख़ास़ ह़िक्मत इसके पीछे काम करती है…*

*⚡याद रहे कि “डॉक्टर अली अरबाश” स़िर्फ़ ख़तीब ही नहीं बल्कि वह तुर्किश कैबिनेट में मज़हबी और वक़्फ़ मामलों के मिनिस्टर भी हैं..*
दरअस़ल तलवार लेकर ख़ुत्बा देने का जो राज़ मुझे पढ़ने को मिला वह बड़ा दिलचस्प , मुफ़ीद और तारीख़ी नवैयत का है..

*⚡सबसे पहले तो जब ख़तीब हाथ में तलवार🗡️ लेकर ख़ुत्बा देता है तो यह इस बात की निशानी है कि यह इलाक़ा हमने तलवार के दम पर फ़तह़ किया था और यह फ़तह़ की निशानी है…*

*वही तलवार 🗡️अगर ख़ुत्बा देते वक़्त दाहिने हाथ में हो तो यह विरोधियों को पैग़ाम है कि हम जंग के लिए पूरी तरह तैयार हैं…*

*अगर तलवार 🗡️बायें हाथ में है तो उसे अमन का पैग़ाम समझा जाता है…*

*और अगर वही तलवार 🗡️बायें हाथ में होने के साथ साथ उस पर दाहिना हाथ रखा हुआ है तो यह इस बात का पैग़ाम है कि…हमारी तरफ़ से दुश्मन को सलामती और अमन का पैग़ाम है लेकिन अगर आप जंग करना चाहते हैं तो हम उसके लिए भी तैयार हैं…*

*आप ख़ुत्बा देते समय ख़तीब के हाथ में तलवार देखिए…उस वक़्त तलवार बायें हाथ में है जबकि दाहिना हाथ तलवार पर रखा गया है..यानि आप चाहते हैं तो हमारी तरफ़ से अमन का ऐलान समझो और अगर जंग चाहते हैं तो त़िब्ल-ए-जंग भी बजाकर हमें आज़मा सकते हो.. हमें कभी पीछे नहीं पाओगे…*