Hadith on Ahele Bayt 4

*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*

*اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى سَيِّدِنَا وَ مَوْلَانَا مُحَمَّدٍ وَّ عَلٰى اٰلَهٖ وَ اَصْحَابِهٖ وَ عَلىٰ سَيِّدِنَا وَ مُرْشِدِنَا وَ مَحْبُوْبِناَ حَضْرَتِ رَاجْشَاهِ السُّونْدَهَوِيِّ وَ بَارِكْ وَ سَلِّمْ۞*

🌹🌹🌹 *Hadees_E_Pak* 🌹🌹🌹

Hazrat Anas RadiyAllahu Ta’ala Anhu Se Riwayat Hai Ki *Huzoor Nabi-E-Akram SallAllahu Ta’ala Alaihi Wa Aalehi Wa Sallam* Ne Farmaya:- Koi Banda Momin Nahin Ho Sakta Jab Tak Ki Mein Us Ke Nazdeek Us Ke Ghar Waalon, Us Ke Maal Aur Tamam Logon Se Mahboob Tar Na Ho Jaoo’n.

📚 Reference 📚
[Muslim As-Sahih, 01/67, Raqam-44,
Ahmad Bin Hanbal Al-Musnad, 05/162, Raqam-21480,
Aboo Ya’la Al-Musnad, 07/06, Raqam-3895,
Bayhaqi Shuab-ul-Iman, 02/129, Raqam-1375,
Ibn Hayyan Al-Azmah, 05/1780, Raqam-2824,
Daylami Musnad-ul-Firdaws, 04/53, Raqam-6169,
Ibn Mansur Kitab-us-Sunan, 02/204, Raqam-2443,
Al-Minhaj-us-Sawi, Safah-93, 94, Raqam-05.]

Hadith कामिल मोमिन

*🌸 कामिल मोमिन… 🌸*

*_🌹नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: “ईमान में सबसे कामिल मोमिन वो है जो सबसे बेहतर अख़लाक़ वाला हो, और तुम में सबसे बेहतर वो है जो अख़लाक़ में अपनी औरतों के हक़ में सबसे बेहतर हो!”_*

_*📚 Sahi Jamiat Tirmidhi:1162*_
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Hadith मुसलमान भाई की अयादत

🌺 _नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया : “जो शख्स अपने (बीमार)मुसलमान भाई की अयादत के लिए जा रहा होता है तो वो ऐसा है जैसे जन्नत में चल रहा है.. यहाँ तक की वो बैठ जाए और जब वो बैठ जाता है तो अल्लाह की रहमत उसको ढांप लेती है.. और सुबह का वक़्त हो तो शाम तक 70,000 फरिश्ते उसके लिए रहमत और बखशीश की दुआ करते हैं। और अगर शाम का वक़्त हो तो सुबह तक 70,000 फरिश्ते उसके लिए रहमत और बख़्शिस की दुआ करते हैं”।_

📚 _*Sunan ibne majah: jild 1, kitab ul-janazah 6, hadith no. 1442*_
*Grade sahih*

रूकनुद्दीन बैबरस

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जिस तरह हज़रत मूसा(अलैहिस्सलाम) की परवरिश ज़ालिम फिरऔन के मह़ल में हुई थी, लगभग उसी तरह सिपहसालार “रूकनुद्दीन बैबरस” की भी परवरिश वह़शी मंगोलों के बीच में हुई थी, तीरंदाज़ी तलवार बाज़ी की महारत भी उसने मंगोलों से ही सीखी थी वह एक “ग़ुलाम” लेकिन क़पचाक़ तुर्क थे

कहते हैं मंगोलों ने दमिश्क के बाज़ार में उन्हें 500 दीनार के एवज़ में एक समुंदरी ताजिर के हाथ बेचा था उस व्यापारी ने उन्हें अपने व्यापारिक जहाज़ पर एक माहिर तीरअंदाज़ के तौर पर तैनात किया था

लेकिन क़ुदरत को कुछ और ही मंज़ूर था एक दिन क़िस्मत ने उन्हें मिस्र का सिपहसालार बना दिया

मंगोलों के ज़ुल्म के आगे पूरी इस्लामी दुनिया बिखर चुकी थी सलजूक सल्तनत अपनी आखिरी सांसें गिन रही थी तो ख़िलाफत-अब्बासिया के आखिरी ताजदार मुस्ता’असिम बिल्लाह को हलाकू खान ने क़ालीनों में लपेटकर घोड़ों तले रौंद डाला था

अब मौज़ू’अ पर आते हैं हलाकू ने बग़दाद को ताराज किया फिर शाम की सरह़द में दाखिल हुआ गांव के गांव तबाह करता हुआ हलाकू ह़लब पहुंचा और शहर की ईंट से ईंट बजा दी बग़दाद की तरह ह़लब में भी रोने वाला कोई नहीं था शाम को तबाह करने के बाद हलाकू की आखिरी मंज़िल मिस्र थी जिसके बाद लगभग पूरी इस्लामी दुनिया ख़त्म हो जाती

हलाकू ने अपने एलची मिस्र दौड़ा दिए जहां ममलूक(ग़ुलामवंश) खानदान राज कर रहा था , वहां उनका सामना उसी सिपहसालार से हुआ जिसको कभी मंगोलों ने ही दमिश्क़ में बेच दिया था

वह कोई और नहीं सिपहसालार “रूकनुद्दीन बैबरस” था जो ममलूक बादशाह “सैफुद्दीन क़ित्ज़” के मातह़ती में ममलूक फौज की कमान संभाले हुए थे

ताक़त के नशे में चूर मंगोल एलचियों ने ममलूक दरबार में हुक्म सुनाया कि मिस्र हथियार डाल दे वरना उसका ह़श्र बग़दाद और ह़लब से भी बद्तर कर दिया जायेगा

दरबारी डरे सहमे हुए मंगोलों का हुक्म सुन रहे थे लेकिन सिपहसालार “बैबरस” के दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा था वह अचानक उठे और भरे दरबार में ही तमाम मंगोलों के सर काट दिये “बैबरस” यहीं पर नहीं रूके बल्कि मंगोलों के कटे हुए सर को उसने मिस्र के मुख्य चौराहे पर लटका दिए

कहते हैं इसके पीछे “बैबरस” की हिक्मत थी कि इससे मुसलमानों के दिल में मंगोलों के लिए बैठा हुआ डर ख़त्म हो जायेगा और “बैबरस” की हिक्मत कामयाब भी रही

“बैबरस” ने उसी वक़्त एक फैसला और लिया इससे पहले कि हलाकू को खबर लगे कि उसके एलचियों की क्या दुर्दशा हुई है “बैबरस” अपने सुल्तान “सैफुद्दीन क़ित्ज़” के साथ मंगोलों से फैसलाकुन जंग लड़ने के लिए मिस्र से निकल खड़ा हुआ

सन्-1260 ई० रमज़ान का महीना और फिलिस्तीन के क़रीब ऐन-जालूत का वह तारीख़ी मक़ाम जिसका ज़िक्र क़ुरआन में भी मौजूद है मंगोलों के एक बाज़ू पर “बैबरस” तो दूसरे बाज़ू पर “क़ित्ज़” बिजली बनकर गिरे देखते ही देखते वह मंगोल जो सारी दुनिया की अक़वाम के लिए दह़शत बनकर उभरे थे तारीख़ ने देखा कि गाजर मूली की तरह काटे जा रहे थे शाम के वह रेगिस्तान जिसे उस वक़्त तक सिर्फ ख़ालिद बिन वलीद(रज़ियल्लाहु अन्हु) की छोटी सी टुकड़ी ही पार कर सकी थी आज यानि 25-रमज़ान को मंगोलों को पनाह देने को तैयार नहीं हुआ शाम के आम बाशिंदे जिनके पास जो भी हथियार थे ऐन जालूत से भागे हुए मंगोलों का शिकार कर रहे थे और एक नई तारीख़ रक़म हो रही थी ममलूक फ़ौज ने मंगोलों की बिसात लपेट दी।