अल्लाह_रसूल_ने_जिनसे_मोहब्बत_का_हुक्म_दिया_उनसे_मोहब्बत_कीजे

#अल्लाह_रसूल_ने_जिनसे_मोहब्बत_का_हुक्म_दिया_उनसे_मोहब्बत_कीजे
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त और हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम ने जिनसे मोहब्बत का हुक्म दिया है उनसे मोहब्बत करना हम पर फ़र्ज़ है

लेकिन वो ख़ुद भी किसी और मोहब्बत का शिकार हैं और लोगों को भी मजबूर करते हैं की उन्ही से मोहब्बत की जाये जिससे वो मोहब्बत करते हैं

ये तो अल्लाह रसूल की नाफ़रमानी है लेकिन उनको समझ में नही आ रहा

उन्हें कौन बताए की पहले हुज़ूर के अहलेबैत की मोहब्बत ज़रूरी है क्योंकि ये अल्लाह रसूल का हुक्म है और इस मोहब्बत का ताल्लुक़ हमारे ईमान से है

आप जिनसे मोहब्बत करवाना चाह रहे हैं उनसे मोहब्बत बाद में क्योकि वो मोहब्बत अक़ीदत्न है

वो पूछते हैं कि जिससे मैं मोहब्बत करता हूँ तुम उनसे मोहब्बत करते हो या नही
जिसे मैं मानता हूँ उसे तुम मानते हो या नही

जबकि पूछना तो ये चाहिए
अल्लाह रसूल के हुक्म के मुताबिक़ अहलेबैत से मोहब्बत करते हो या नही
अहलेबैत को मानते हो या नही

लेकिन एक ज़िद पाल ली जिसने बुग़ज़ (दुश्मनी) की शक्ल इख़्तेयार कर ली है

अल्लाह हम सब को हिदायत दे और अहलेबैत के मुहिब्बो में शामिल करे

अहलेबैत का बुग़ज़ दुनिया आख़िरत सब तबाह कर देता है

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