जुमा कि नमाज न छोड़

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हदीस 
“जिसने जुमे कि नमाज (2 रकात जुमा) से पहले, 4 सुन्नत नमाज और जुमा के 2 रकात के बाद 4 सुन्नत 2 सुन्नत , 2 नाफिल पढी, अल्लाह उस पर जहन्नम
कि आग हराम कर देगा 
(तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 1 (हदीस :- 410 )

 अल कुरान :::: 
“जुमे कि नमाज के लिए अजान दि जाये, तो तुम अल्लाह कि याद के लिए चल पड़ो, के तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानते हो (सूरह जुमुआ )
 हदीस 
“जूमा कि नमाज जुमा से जुमा तक के लिए कफ्फारा है शर्त है कि गुनाहे कबीरा से बचा जाये.
(मुस्लिम शरिफ)
 हदीस 
“जो शख्स बगैर किसी उजर के “3 जुमा कि नमाज़े छोड देता है, अल्लाह त’आला उसके दिल पर मोहर लगा देता है 
 (इब्ने -माजा, ✒जिल्द -1 ,पेज ✏न. 75 )
 हदीस 
“जो शख्स खुत्बा शुरु होने के बाद हरकत करता है !! या पहलु बदलता है वोह लग्व (बेकार ) अमल है 
जुमे के दिन खास तोर से गुस्ल करे ये जुमा कि सुन्नतो मे से एक है !
 हदीस 
नबी -ए -अकरम (सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम) ने फरमाया, हर बालिग पर जुमा के दिन गुस्ल करना
वाजिब है(बुखारी ✒जिल्द :1 ✏सफाह:121 ) .
 हदीस 
 जुमा का गुस्ल आदमी के गुनाहो को , उसकी बाल के जड़ से खींच लेता है. (तिब्रानी)
 हदीस 
जो शख्स जुमा के दिन गुस्ल करके अव्वल वक्त मे मस्जिद जाये , गोया उसने ऊँट (कैमेल) कि कुरबानी कि (मुस्लिम शरीफ )
 दुआ ओ कि कुबुलियत का दिन भी है जुमा !
 हदीस 
जुमा के दिन एक पल है जो भी दुआ इस पल मे कि जाये वो कुबूल होती है
“जो शख्स जुमा के दिन सुरह -ए -कहफ पढ़ेगा तो उसके लिए दोनो जुमा के दर्मियाँ एक नूर चमकता रहेगा (सुनन निसाई शरिफ )
“जुमा कि सुन्नते”
(1)  गुस्ल करना , (2)  साफ कपड़े पहन्ना ,
(3)  खुश्बु. तेल. सुर्मा लगाना, (4)  नाखुन काट्ना , (5)  मस्जिद जल्द जाना, (6)  सुरह कहफ पढ़ना, (तिर्मिज़ीमुस्लिम बुखारी)

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