आयतल कुर्सी

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बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम

अल्लाहो ला इलाहा इल्ला होवा, अल -हय्युल क़य्यूमो, ला’ता ख़ु-ज़ोहू सेनातुन  वाला  नौमुन,

लहू मा फ़ीस समावाते व मा फिल अर्ज़े, मन ज़ल लज़ी यश-फ-ओ’ इ’न्दहू इल्ला बे-इज़्नेही, या’लमो मा बैना अय्दीहीम व मा ख़ल’फ़हुम, व ला  योहीतूना  बे शै’यिम  मिन  इ’ल्मेही  इल्ला बेमा  शा-अ, वसे-अ’ कुर्सिय्यो’हुस समावाते वल अर्ज़, व ला या-ऊदोहू हिफ़’ज़ोहोमा, व होवल अ’लिय्युल अ’ज़ीमो.

ला इक्राहा फ़िद दीन, क़द तबय्या-नर रुश्दो मेनल गै’यए , फ़’मय्न यक्फुर बीत-ताग़’हूते  व यू-मीम बिल्लाहे फ़क़दिस तमसका बिल-उ’र्वातिल वुसक़ा, लन्फेसामा  लहा, वल्लाहो समी-उ’न अ’लीमुन. अल्लाहो वालिय्युल लज़ीना आ’मनू, युखरेजोहुम  मेनज़ ज़ोलोमाते एलन नूरे, वल’लज़ीना कफरू अव्लेया-ओ-होमुत ताग़’हूतो  युखरे’जूनाहुम  मेनन नूरे इ’लाज़ ज़ोलोमाते, ऊला-एका अस्हाबुन  नारे, हुम फ़ीहा  ख़ालेदून  !

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للَّـهُ لَا إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖوَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ﴿٢٥٥﴾ لَا إِكْرَاهَ فِي الدِّينِ ۖ قَد تَّبَيَّنَ الرُّشْدُ مِنَ الْغَيِّ ۚ فَمَن يَكْفُرْ بِالطَّاغُوتِ وَيُؤْمِن بِاللَّـهِ فَقَدِ اسْتَمْسَكَ بِالْعُرْوَةِ الْوُثْقَىٰ لَا انفِصَامَ لَهَا ۗ وَاللَّـهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ﴿٢٥٦

आयतल कुर्सी पढ़ने से अल्लाह की तवज्जोह अपने बन्दों की तरफ हो जाती है!

6ठे इमाम जाफर सादिक (आ:स) ने फरमाया:   :

لَمَّا أَمَرَ اللَّهُ عَزَّ وَ جَلَّ هَذِهِ الْآيَاتِ أَنْ يَهْبِطْنَ إِلَى الْأَرْضِ تَعَلَّقْنَ بِالْعَرْشِ وَ قُلْنَ أَيْ رَبِّ إِلَى أَيْنَ تُهْبِطُنَا إِلَى أَهْلِ الْخَطَايَا وَ الذُّنُوبِ فَأَوْحَى اللَّهُ عَزَّ وَ جَلَّ إِلَيْهِنَّ أَنِ اهْبِطْنَ فَوَ عِزَّتِي وَ جَلَالِي لَا يَتْلُوكُنَّ أَحَدٌ مِنْ آلِ مُحَمَّدٍ وَ شِيعَتِهِمْ فِي دُبُرِ مَا افْتَرَضْتُ عَلَيْهِ مِنَ الْمَكْتُوبَةِ فِي كُلِّ يَوْمٍ إِلَّا نَظَرْتُ إِلَيْهِ بِعَيْنِيَ الْمَكْنُونَةِ فِي كُلِّ يَوْمٍ سَبْعِينَ نَظْرَةً أَقْضِي لَهُ فِي كُلِّ نَظْرَةٍ سَبْعِينَ حَاجَةً وَ قَبِلْتُهُ عَلَى مَا فِيهِ مِنَ الْمَعَاصِي وَ هِيَ أُمُّ الْكِتَابِ وَ شَهِدَ اللَّهُ أَنَّهُ لا إِلهَ إِلَّا هُوَ وَ الْمَلائِكَةُ وَ أُولُوا الْعِلْمِ وَ آيَةُ الْكُرْسِيِّ وَ آيَةُ الْمُلْكِ

“When Allah, the Noble and Grand, commanded the verse (mentioned at the end of this tradition) to descend down to the Earth, they (the verses) attached themselves to the Throne (of Allah) and said, ‘O Lord! Where are you sending us to? Are you sending us to a place of [the People of] transgressions and sins?’ Allah, the Noble and Grand, revealed to them (the verses), ‘Go down as I swear by My Greatness and My Majesty that not a single person from amongst the progeny of Muhammad and their followers  shall recite you after that which I have made obligatory upon them (the five canonical prayers) every day except that I will glance at them with a special glance with My eyes seventy times every day and with every glance, I will fulfill seventy of their desires and I will accept (their supplications) even though they have sins (on their record) and these verses will make up the basis of The Book (Ummul Kitab – meaning Suratul Hamd) and the verse, ‘Allah bears witness that there is no other entity worthy of worship except for Him and so do the angels (bear witness to this) and so do those who possess knowledge’ [Q. 3:18] and Ayatul Kursi and the verse of dominion, ‘Say: To Allah belongs the Kingdom…’ [Q. 3:26].”

मुस्लिम शरीफ की हदीसे पाक है कि क़ुर्आन की आयतों में सबसे अज़मत वाली आयत आयतल कुर्सी है, इसके बेशुमार फज़ायल हैं चन्द यहां ज़िक्र करता हूं*_

_*1). मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि जो शख्स हर फर्ज़ नमाज़ के बाद आयतल कुर्सी पढ़ेगा तो वो मरते ही फौरन जन्नत में दाखिल होगा*_

_*📕 मिश्कात, जिल्द 1, सफह 89*_

_*2). जो कोई जुमा के दिन बाद नमाजे अस्र 313 बार आयतल कुर्सी पढ़े तो ऐसी खैरो बरकत हासिल हो कि क़यास में ना आये और जो कोई हर फर्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ता रहे तो मौला तआला उसे शाकिरों का क़ल्ब सिद्दीक़ों का अमल और अम्बिया का सवाब अता फरमायेगा और उसको जन्नत में दाखिल होने से कोई चीज़ माने नहीं यानि मरते ही फौरन जन्नत में जायेगा*_

_*📕 वज़ाइफे रज़वियह, सफह 131*_

_*3). अगर मकान में ऊंची जगह कुंदा करदे तो उसके घर में कभी फाक़ा ना होगा रिज़्क़ में खूब बरकत होगी और ना ही कभी उसके घर चोरी होगी*_

_*📕 जन्नती ज़ेवर, सफह 460*_

_*4). कोई भी हाजत हो तो बाद नमाज़े फज्र सलाम फेरने के फौरन बाद उसी तरह बैठे बैठे 25 बार और मग़रिब बाद उसी तरह 8 बार आयतल कुर्सी पढ़े इन शा अल्लाह बहुत जल्द मुराद पायेगा, बलगम अगर सीने पर जमा हो गया हो तो सुबह नमक की 7 कंकरियों पर 7-7 बार पढ़कर दम करके खा लें मर्ज़ से इज़ाला होगा, दिमाग की तेज़ी के लिए चीनी की प्लेट पर लिखकर धोकर पियें*_

_*📕 आमाले रज़ा, हिस्सा 3, सफह 42-45*_

_*5). अपनी अपने घर की अपने अहलो अयाल की जानो माल इज़्ज़त आबरू की हिफाज़त के लिए सुबह शाम पढ़कर उन पर दम करता रहे, और रात को अव्वल आखिर दरूद शरीफ और 1 बार आयतल कुर्सी पढ़कर खुद पर व घर के तमाम अफराद पर और घर के चारो कोनों पर दम करदे तो सबकी हिफाज़त की ज़िम्मेदारी रब की यहां तक कि उसका घर ही नहीं बल्कि आस पड़ोस के घर भी चोरी से महफूज़ हो जायेंगे इन शा अल्लाह तआला*_

_*📕 अलवज़ीफतुल करीमा, सफह 21*_

_*ⓩ दम करने के लिए सबका सामने होना कुछ ज़रूरी नहीं बस तसव्वुर करके दम कर दें युंही पूरे घर का तसव्वुर करके दम करें, आयतल कुर्सी की फज़ीलत में ये रिवायत पढ़िये और एक बहुत काम का मसअला भी समझ लीजिये*_

_*6). एक मर्तबा हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को सदक़ये फित्र की हिफाज़त के लिए मुक़र्रर किया, एक रात आपने देखा कि एक चोर चंद बोरियां उठाए लिए जा रहा है आपने उसे पकड़ लिया जिस पर वो रोने लगा कि मैं बहुत ग़रीब आदमी हूं मुझे जाने दीजिये, हज़रत अबु हुरैरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का दिल पिघल गया और आपने उसे छोड़ दिया, दूसरे दिन जब सरकार सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम से मुलाक़ात हुई तो मेरे आक़ा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम खुद ही इरशाद फरमाते हैं कि ऐ अबू हुरैरह रात वाले चोर का क्या किया, इस पर वो फरमाते हैं कि मुझे रहम आ गया और मैंने उसे जाने दिया तो हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि वो झूठा है आज फिर आयेगा होशियार रहना, रात को फिर वही चोर आया और पकड़ा गया इस बार फिर उसने रो रोकर दुहाई दी तो फिर से हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को उस पर रहम आ गया और उसे जाने दिया, फिर दूसरे दिन सरकार ने पूछा कि उस चोर का क्या किया तो वो बोले कि उसने अपनी मोहताजी की शिकायत की तो मैंने उसे छोड़ दिया फिर आक़ा फरमाते हैं कि वो झूठा है आज फिर आयेगा, रात को फिर वही आया और फिर से पकड़ा गया अब हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने कहा कि आज तो मैं तुझे हरगिज़ नहीं छोड़ूंगा जब चोर ने जान लिया कि आज निकलना मुश्किल है तो कहने लगा कि अगर आप मुझे छोड़ने का वादा करें तो मैं आपको एक बहुत इल्म वाली बात बताऊं, इस पर हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु तैयार हो गए तो वो बोला कि जब भी आप सोने को बिस्तर पर जाओ तो आयतल कुर्सी पढ़ लिया करो कि इससे अल्लाह तुम्हारी रात भर हिफाज़त फरमायेगा और शैतान तुम्हारे नज़दीक नहीं आ पायेगा, ये सुनकर हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु बहुत खुश हुए और उसे छोड़ दिया, सुबह को रात का सारा वाक़िया आपने हुज़ूर को बताया तो मेरे आक़ा इरशाद फरमाते हैं कि बात तो उसने सच्ची कही मगर है वो बहुत बड़ा झूठा जो पिछली तीन रातों से तुम्हारे पास चोर बनकर आ रहा था वो कोई और नहीं बल्कि इब्लीस था*_

_*📕 मिश्कात, जिल्द 1, सफह 177*_

_*ⓩ जैसा कि आपने पढ़ लिया कि हर अच्छी बात करने वाला व नेकी की दावत देने वाला अच्छा ही हो ये कोई ज़रूरी नहीं क्योंकि नेकी की दावत देना सिर्फ मुसलमान ही नहीं करते बल्कि ज़रूरत पड़ने पर शैतान और उसके चेले भी नेकियों की दावत दिया करते हैं मगर इसमें उनका छुपा हुआ मक़सद कुछ और ही होता है, जैसा कि आजकल के बद अक़ीदे वहाबियों का मामूल बन चुका है कि झोला झप्पड़ टांग कर मस्जिदों को नजासत आलूद करने और मुसलमानों का इमान बर्बाद करने के लिए निकल पड़ते हैं, बज़ाहिर तो वो नेकियों की दावत देते हुए दिखाई देते हैं मगर उनका मक़सद सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को गुमराह करना और काफिर बनाना है लिहाज़ा ऐसों से दूर रहने में ही ईमान की भलाई है*_

Water Dam

The collapse of Marib dam in Yemen caused an entire civilization to collapse.

1400 years ago people thought that the breach was caused by large rats gnawing at it with their teeth and scratching it with their nails. But today we know that this is false. Modern archeology revealed the true cause of the collapse.

The Great Dam that made the desert fertile and enabled the region to flourish, fell into disrepair. The sophisticated techniques of hydraulic engineering that the Sabaeans were famous for were slowly forgotten, and maintenance of the dam became increasingly difficult. Consequently, from the middle of the 5th century onwards, the dam began to suffer regular breaches until the year 570 AD, when the dam gave away for one last time.

There is much debate what caused the dam to collapse. Some scholars say it was heavy rains, while other believe an earthquake undid the stonework. According to legend, the breach was caused by large rats gnawing at it with their teeth and scratching it with their nails.

Amusing Planet, The Collapse of Marib Dam And The Fall of an Empire, 2018

Today archeologists are certain that the rats story was just a legend, so it was either an earthquake or too much water. But 1400 years ago the Quran said that it was just too much water.

[Quran 34:15-16] In Sheba’s homeland there used to be a wonder: two gardens, on the right, and on the left. “Eat of your Lord’s provision, and give thanks to Him.” A good land, and a forgiving Lord. But they turned away, so We unleashed against them the flood of the dam; and We substituted their two gardens with two gardens of bitter fruits, thorny shrubs, and meager harvest.

Flash Flood

Sudden surge in water.

In a flash flood loose objects are swept by the flood.

Riverine (Channel)
Floods occur in all types of river and stream channels, from the smallest ephemeral streams in humid zones to normally-dry channels in arid climates to the world’s largest rivers. When overland flow occurs on tilled fields, it can result in a muddy flood where sediments are picked up by run off and carried as suspended matter or bed load… Flash floods are the most common flood type in normally-dry channels in arid zones, known as arroyos in the southwest United States and many other names elsewhere.
Wikipedia, Flood, 2019

In a flash flood loose objects are swept by the flood but wood always floats on top. However this was portrayed in the Quran 1400 years before it was discovered.

[Quran 13:17] He sends down water from the sky, and riverbeds flow according to their capacity. The current carries swelling froth and from what they burn for fire, to make ornaments or utensils comes a similar froth. Thus Allah exemplifies truth and falsehood. As for the froth, it is swept away, but what benefits the people remains in the ground. Thus Allah presents the analogies.

What they burn for fire” is wood. So the water current carries wood on top. Today we know what this is, it is a flash flood. However there is no such thing in Arabia.