इब्लीस​ शैतान की कुछ मालुमात

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने दरकये सिज्जीन में दो सूरतें पैदा फरमाई एक सांप की शक्ल में जिसका नाम खबलीस था और दूसरी भेड़िये की शक्ल में जिसका नाम नबलीस था दोनों ने आपस में जुफ्ती खाई तो इब्लीस पैदा हुआ*_

_*📕 माअरेजुन नुबूवत, जिल्द 1, सफह 15*_

_*इब्लीस की बीवी का नाम रसुल है*_

_*📕 नुज़हतुल मजालिस 6, सफह 117*_

_*इब्लीस जिन्न की क़ौम से है यानि आग से पैदा किया गया है इसलिए शरीर जिन्नो को भी शयातीन कहा जाता है*_

_*📕 खाज़िन, जिल्द 2, सफह 176*_
_*📕 तकमीलुल ईमान, सफह 10*_

_*पहले आसमान पर इब्लीस का नाम आबिद दूसरे पर ज़ाहिद तीसरे पर आरिफ चौथे पर वली पांचवे पर तक़ी छठे पर खाज़िन सातवे पर अज़ाज़ील और लौहे महफूज़ में इब्लीस था, ये 40000 साल तक जन्नत का खज़ांची रहा, 14000 साल तक अर्शे आज़म का तवाफ करता रहा, 80000 साल तक फरिश्तो के साथ रहा जिसमे से 20000 साल तक फरिश्तो का वाज़ो नसीहत करता रहा और 30000 साल कर्रोबीन फरिश्तो का सरदार रहा और 1000 साल रूहानीन फरिश्तो का सरदार रहा*_

_*📕 तफसीरे सावी, जिल्द 1, सफह 22*_
_*📕 तफसीरे जमल, जिल्द 1, सफह 50*_

_*इब्लीस ने 50000 साल तक अल्लाह की इबादत की यहां तक कि अगर उसके सजदों को जमीन पर बिछाया जाए तो तो एक बालिश्त जगह भी खाली ना बचे*_

_*📕 ज़रकानी, जिल्द 1, सफह 59*_

_*इनके यहां शादी ब्याह भी होती है और बच्चे भी मगर तरीके कई हैं,कुछ की दाहिनी रान में नर की अलामत और बाईं रान में मादा की अलामत पाई जाती है, खुद ही जिमअ करता है खुद ही हामिला होता है और खुद ही बच्चा जनता है, और कुछ रोज़ाना अण्डे दिया करते हैं हर अंडे से 70 शैतान और 70 शैतानिया पैदा होते हैं*_

_*📕 खाज़िन, जिल्द 4, सफह 176*_
_*📕 उम्दतुल क़ारी, जिल्द 7, सफह 271*_
_*📕 तफसीरे सावी, जिल्द 3, सफह 35*_
_*📕 तफसीरे जमल, जिल्द 3, सफह 35*_
_*📕 तफसीरे नईमी, जिल्द 1, सफह 174*_

_*पहले शैतान आसमानों पर जाया करते थे और वहां फरिश्तो की बातें सुनकर यहां काहिनों और नुजूमियों को बताते मगर जब से हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम तशरीफ लाये तब से इनको आसमानो पर जाने से रोक दिया गया*_

_*📕 महाहिबुल लदुनिया, जिल्द 1, सफह 398*_

_*हर इन्सान के साथ एक शैतान पैदा होता है जिसका नाम हमज़ाद है जब मुसलमान का इन्तेक़ाल होता है तो रब तआला उसके हमज़ाद को क़ैद कर लेता है लेकिन जब कोई काफिर मरता है तो उसके हमज़ाद को क़ैद नही किया जाता यही भूत कहलाता है अब हर शैतान आपस मे एक दूसरे से पूछ रखते हैं ज़िन्दा इन्सान का हमज़ाद किसी मरे हुए शख्स के हमज़ाद से उसकी ज़िन्दगी की सारी मालूमात करता है और फिर ज़िन्दा शख्स के मुंह से वो सारी बातें बोलता है ताकि उन लोगों को गुमराह कर सके और कुछ लोग इसी को पुनर्जन्म या आवा-गवन समझ लेते हैं*_

_*📕 अलमलफ़ूज़, हिस्सा 3, सफह 28*_
_*📕 तफसीरे नईमी, जिल्द 1, सफह 674*_

_*हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का हमज़ाद बल्कि तमाम नबियों के हमज़ाद उनकी सोहबत में रहकर मुसलमान हो गए*_

_*📕 तफसीरे नईमी, जिल्द 1, सफह 221*_
_*📕 तफसीरे अलम नशरह, सफह 199*_

_*इब्लीस का परपोता हम्मा बिन हीम बिन लाक़ीस बिन इब्लीस भी हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में हाज़िर होकर आप पर ईमान लाया और अपनी उम्र के बारे में कहा कि जब क़ाबील ने हाबील का क़त्ल किया तो मैं उस वक़्त बच्चा था*_

_*📕 क्या आप जानते हैं, सफह 484*_
_*📕 खुलासतुत तफासीर, सफह 170*_

_*मुअल्लमुल मलाकूत होने और लाखों बरस इबादत करने के बावजूद सिर्फ एक सज्दा हज़रते आदम अलैहिस्सलाम को ना करने की बिना पर उसको रांदये बरगाह कर दिया गया, उसके एक सजदा ना करने में 4 कुफ्र थे मुलाहज़ा फरमाएं*_

_*1. उसने कहा कि तूने मुझे आग से बनाया और इसको मिटटी से मैं इससे बेहतर हूं, इसमें मलऊन का मक़सद ये था कि तू बेहतर को अदना के आगे झुकने का हुक्म दे रहा है जो कि ज़ुल्म है, और उसने ये ज़ुल्म की निस्बत खुदा की तरफ की जो कि कुफ्र है*_

_*2. एक नबी को हिकारत से देखा, और नबी को बनज़रे हिक़ारत देखना कुफ्र है*_

_*3. नस के होते हुए भी अपना फलसफा झाड़ा, मतलब ये कि जब हुक्मे खुदा हो गया कि सज्दा कर तो उस पर अपना क़ौल लाना कि मैं आग से हूं ये मिटटी से है ये भी कुफ्र है*_

_*4. इज्माअ की मुखालिफत की,यानि जब सारे के सारे फरिश्ते झुक गए तो इसको भी झुक जाना चाहिए था चाहे बात समझ में आये या नहीं क्योंकि इज्माअ की मुखालिफत भी कुफ्र है*_

_*📕 नुज़हतुल मजालिस, जिल्द 2, सफह 34*_

_*सोचिये कि जब लाखों बरस इबादत करने वाला एक नबी यानि हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौहीन करने की बनिस्बत लाअनती हो गया तो जो लोग नबियों के सरदार हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की तौहीन कर रहे हैं उनका क्या होगा, उलमाये इकराम फरमाते हैं कि जिसने हुज़ूर की नालैन शरीफ की तौहीन कर दी वो भी काफिर है और आपके नालें पाक के नक्श के लिए आलाहज़रत फरमाते हैं कि*_

_*उलमाये इकराम ने हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की नालैन मुबारक की तस्वीर को अस्ल की तरह बताया और उसकी वही इज़्ज़त और एहतेराम है जो असल की है*_

_*📕 अहकामे तस्वीर, सफह 20*_

_*तो जब नालैन मुबारक की या सिर्फ उसकी नक्ल यानि तस्वीर की तौहीन करने वाला काफिर है तो जो आपकी ज़ात व औसाफ व हाल व अक़वाल की तौहीन करेगा वो कैसे ना काफिर होगा बल्कि वो काफिर नहीं काफिर से बदतर है*_

_*रिवायत में आता है कि एक दिन ये हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की बारगाह में हाज़िर हुआ और कहा कि रब से मेरी शिफारिश कर दीजिए मैं तौबा करना चाहता हूं, आपने उसके लिए दुआ फरमाई तो मौला फरमाता है कि ऐ मूसा इससे कह दो कि जाकर आदम की क़ब्र को सज्दा करले मैं इसे माफ कर दूंगा, ये बात जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने मलऊन को बताई तो खबीस कहने लगा कि जब मैंने उनको उनकी ज़िन्दगी में सज्दा नहीं किया तो अब उनकी क़ब्र को सज्दा करूंगा ये कहकर चला गया, यहां तक कि मौला उसको जहन्नम में 1 लाख साल जलाने के बाद निकालेगा और कहेगा कि अब भी आदम को सज्दा करले तो मैं तुझे माफ कर दूंगा इस पर वो इंकार करेगा और हमेशा के लिए जहन्नम में डाला जायेगा*_

_*📕 तफसीर रूहुल बयान, जिल्द 1, सफह 72*_

इबलीस का पोता

*बेहकी में अमीर-उल-मोमिनीन हजरते उमर फारूक रजी अल्लाहो व सल्लम के हमराह से रिवायत हैं के एक रोज हम हुजूर सल-लल्लाहो अलेह व सल्लम के हमराह तहामा की पहाड़ी पर बैठें थे के अचानक एक बूढ़ा हाथ मे असा लिए हुजूर रसूल-उल-सकलेन सय्यद-उल-अम्बिया सल लल्लाहो तआला अलेह व सल्लम के सामने हाजिर हुआ और सलाम अर्ज किया।*_

_*हुजूर ने जवाब दिया और फरमाया उसकी आवाज जिनों की सी है।फिर आपने उससे दरयाफ्त किया तु कौन हैं..?*_

_*उसने अर्ज किया मैं जिन्न हूँ। मेरा नाम हामा हैं , बेटा हेम का और हेम बेटा लाकिस का और लाकीस बेटा इबलीस का है। हुजूर ने फरमाया तो गोया तेरे और इबलीस के दरमियान सिर्फ दो पुश्तें है।*_

_*फिर फरमाया अच्छा ये बताओ तुम्हारी उम्र कितनी हैं..?*_

_*उसने कहा या रसूल अल्लाह!जितनी उम्र दुनिया की हैं उतनी ही मेरी हैं।कुछ थोड़ी सी कम है। हुजूर जिन दिनो काबील ने हाबिल को कत्ल किया था उस वक्त मैं कई बरस का बच्चा ही था मगर बात समझता था पहाड़ो में दौड़ता फिरता था और लोगों का खाना व गल्ला चोरी कर लिया करता था और लोगों के दिलों में वसवसे भी डाल देता था के वो अपने अपने खवीश व अक्रबत से बदसलूकी करे।*_

_*हुजूर ने फरमाया- तब तो तुम बहुत बुरे हो उसने अर्ज की हुजूर मुझे मलामत ना फरमाईये इसलिए के अब मैं हुजूर कि खिदमत में तौबा करने हाजिर हुआ हूँ। या रसूल अल्लाह !*_

_*मैंने हजरते नूह अलेहिस्सलाम से मुलाकत की है और एक साल तक उनके साथ उनकी मस्जिद में रहा हूँ उससे पहले मैं उनकी बारगाह में भी तौबा  कर चुका हूँ ।हजरते हूद, हजरते याकूब और हजरते युसूफ अलेहिस्सलाम की सोहब्बतो में भी रह चुका हूँ।और उन से तौरात सीखी है और उनका सलाम हजरत ईसा अलेहिस्सलाम को पहुँचाया था।और ऐ नबीयो के सरदार ईसा अलेहिस्सलाम ने फरमाया था के अगर तु मोहम्मद रसूल अल्लाह सल -लल्लाहो तआला अलेही व सल्लम से मुलाकात करें तो मेरा सलाम उनको पहुँचाना सो हुजूर! अब मैं इस अमानत से सबुकदोश होने को हाजिर हुआ हूँ। और ये भी आरजु हैं के आप अपनी जुबाने हक तर्जुमान से मुझे कुछ कलाम अल्लाह तलीम फरमाईये। हुजूर अलेहिस्सलाम ने उसे सूरह मुरसलात, सुरह अम्मायतासअलून, अख्लास और मऊजतीन और इजा अश्शम्स तालीम फरमायी।और ये भी फरमाया के ऐ हारा ! जिस वक्त तुम्हें कोई अहेतियाज हो फिर मेरे पास आ जाना और हम से मुलाकात ना छोड़ना।*_

_*हजरते उमर रजी अल्लाहो फरमाते है कि हुजूर अलेहिस्सलाम ने तो विसाल फरमाया लेकिन हामा की बाबत फिर कुछ ना फरमाया, खुदा जाने हामा अब जिन्दा है या मर गया है।*_

_*📝सबक- हमारे हुजूर सल-लल्लाहो तआला अलेह व सल्लम रसूल-उल-सकलेन और रसूल अलकुल है और आपकी बारगाहे आलियो जिन्नो इन्स की मरजऐ हैं।*_

_*📕 खुलासत-उल-तफासीर सफा 170*_

Day

Days getting longer.

The rotation of Earth is slowing down.

Earth rotates once in about 24 hours with respect to the Sun, but once every 23 hours, 56 minutes, and 4 seconds with respect to other, distant, stars. Earth’s rotation is slowing slightly with time; thus, a day was shorter in the past. This is due to the tidal effects the Moon has on Earth’s rotation. Atomic clocks show that a modern-day is longer by about 1.7 milliseconds than a century ago, slowly increasing the rate at which UTC is adjusted by leap seconds. Analysis of historical astronomical records shows a slowing trend of about 2.3 milliseconds per century since the 8th century BCE.
Wikipedia, Earth’s Rotation, 2019

The rotation of Earth is slowing down, that is, days were shorter in the past; but the few milliseconds per century would have been impossible to detect 1400 years ago. However the Quran said that the days are getting longer:

[Quran 7.54] And your Lord, Allah, who created the Heavens and the Earth in six days and then settled on the Throne. [Allah] Covers the night with the day, asks for it persistently; and the sun and the moon and the stars enslaved by His orders. Is this not His creation and His command? Blessed be Allah the Lord of all the worlds.

“Yatlubuhu hatheethan يَطْلُبُهُ حَثِيثًا” means asks for it persistently; more of the day and more of the night. If God asks more of the day and more of the night then this means the days are getting longer.

Human Embryo

Attaches to mother to feed.

The embryo attaches itself to the mother to feed, just like a leech attaches itself to a host to feed. The embryo also looks like a leech.

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The embryo looks like a leech but these pictures are magnified by microscope; nobody knew this 1400 years ago. However this was portrayed in the Quran.

[Quran 23.14] Then We developed the semen into a leech. Then We developed the leech into a lump. Then We developed the lump into bones. Then We clothed the bones with flesh. Then We produced it into another creature. Most Blessed is Allah, the Best of Creators.

“Alaqa عَلَقَةً”  means leech. It turned-out that the embryo looks like a leach. Then later it develops into a “Mudgha مُضْغَةً” meaning something chewed. It turned-out that at week 6 the vertebra of the embryo looks likes something chewed.

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