अहलेबैत के बारे में दरयाफ्त

मुहिब्बे तबरी ने एक रिवायत नक़ल फ़रमाई है कि हुज़ूर नबी ए करीम ﷺ  ने फ़रमाया

“अल्लाह तआला ने तुम (उम्मती) पर जो मेरा अज्र मुक़र्रर किया है वह मेरे अहलेबैत से मुहब्बत करना है। और में कल तुमसे उनके बारे में दरयाफ्त करूंगा।”

📚📚 
सवाइके मुहर्रका  सफ़ा 753)

सूरह अल-मुजादिला की आयत 12 और 13 का शान ऐ नुज़ूल।


सूरह अल-मुजादिला की आयत 12 और 13 का शान ऐ नुज़ूल।

आयत 12 में जो हुक़्म है जिस पर सिर्फ़ मौला अली शेरे खुदा ع ने ही अमल किया और इस  आयात के बाद यानी आयत 13 में यह हुक़्म अल्लाह ﷻ ने मनसूख कर दिया ।

आयत नम्बर 12
“ऐ लोगो, जो ईमान लाये हो! जब तुम रसूल ﷺ से अकेले में बात करो तो बात करने से पहले कुछ सदक़ा दो, यह तुम्हारे लिये बेहतर और पाकीज़ातर है। अलबत्ता अगर तुम सदक़ा देने के लिये कुछ ना पाओ तो अल्लाह ﷻ गफ़ूर वा रहीम है।”

मफ़हूम हदीस:
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास رازي الله تالا أنه
इस हुक़्म की वजह यह बयान करते है रसूल अल्लाह ﷺ से मुसलमान अकेले में बात करते और अपने मसले पूछते और रसूल अल्लाह ﷺ किसी को मना नहीं करते थे जिससे रसूल अल्लाह ﷺ बहुत परेशान हो गये तो अल्लाह ﷻ ने चाहा कि रसूल अल्लाह ﷺ पर यह बोझ हल्का कर दे फ़िर यह हुक़्म दिया कि नबी ﷺ से शरगोशी करने से पहले सदका किया करो।

इस हुक़्म के आ जाने पर मौला अली शेरे खुदा ع ने पहले सदका दिया और फ़िर रसूल अल्लाह ﷺ से बात करी!
यह हदीस क़ुरआन की कई तफ़सीर में नकल की गई है! मैंने यहां सिर्फ़ तफ़सीर दुर्रे मंसूर का हवाला लगाया/अपलोड किया है ।

इमाम जलालुद्दीन अब्दुर्रहमान बिन अबी बकर अल सुयूती رحمة الله तफ़सीर दुर्रे मंसूर में इस आयात की तफ़सीर में लिखते है की:- इमाम अब्दुर्रज़्जाक, अब्द बिन हमीद, इब्ने मुंदिज, [इमाम] इब्ने अबी हातिम और इमाम इब्ने मर्दवया ने बयान किया है कि हज़रत अली रज़ि’अल्लाह ने फ़रमाया कि:-

मेरे सिवा किसी ने इस आयत के मुताबिक अमल नहीं किया, यहां तक कि यह [आयत] मन्सूख हो गयी।

आयत-ऐ-नज़्वा का हुक़्म एक साथ तक ही बाकी रहा।’

जब आयत 12 का हुक़्म लोगो ने सुना की नबी ﷺ से सरगोशी करने से पहले सदका करना पड़ेगा तो लोगों ने सरगोसी नही करी, सिवा मौला अली ع के तो अल्लाह ﷻ ने आयत 13 में इस हुक़्म को मंसूख कर दिया । फ़िर यह हुक़्म आया।

आयत नम्बर 13 “क्या तुम डर गये इस बात से कि अकेले में बातचीत करने से पहले तुम्हें सदक़ात देने होंगे? अच्छा, अगर तुम ऐसा ना करो और अल्लाह ﷻ ने तुमको इससे माफ़ कर दिया तो नमाज़ क़ायम करते रहो, ज़कात देते रहो और अल्लाह ﷻ और उसके रसूल ﷺ की इताअत करते रहो। तुम जो कुछ करते हो अल्लाह ﷻ उससे बाख़बर है।

Shan A Mohammed (Sal Lallaho Alyhe Wa-Alehi wasallam)

Shan A Mohammed (Sal Lallaho Alyhe Wa-Alehi wasallam)

*Hazrat Ibrahim As aur Nabi A Alam Sal Lallaho Alyhe Wa-Alehi wasallam*

Al Quran:

Quran me waqiya mozud he hazrat Ibrahim As ne khuda se kaha ay Allah Tu Murdo ko kese zinda karta he?

Allah ne farmaya ay Ibrahim kya tujhe yakin nahi..

Ibrahim As ne farmaya ay mere Rab mujhe yakin he bas *DIL KO MUTMAIN* karna chahta hu..

Fir khuda ne tartib batai jo pura waqia *Sureh Bakra* me mozud he..

But jab baat Apni Habib ki aai to Quran me Allah Rabbul ijjat ne farmaya..

*Ay Mutmain Nafs* ab wapas laut aa (Sureh Fazr)

Ek aur baat wapes word tab use hota he jab jise kaha jaye woh khud wahi ka ho…

Allah Humma Salle Ala Mohammed Wa Alemohammed Sal Lallaho Alyhe Wa-Alehi Wasallam..