Year: 2021
Hadith Hazrat Ammar bin Yasir r.a was on side of Haq…
Hazrat Ali AlaihisSalam ki Hazrat Usman Radiallahu anhoo ko Muwayia aur Marwan ke bare mein Salah.
Hadith About Fazail-o-Manaqib AhlulBayt

हजरत अब्दुल्लाह इब्न उमर रजियल्लाहु अन्हुमा से मर्वी है कि रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : मेरी उम्मत में सबसे पहले मेरी शफाअत अपने अहले – बैत के लिये होगी।.
📗 (सवाइके मुहर्रका सफा : 778)
हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया : क्यामत के रोज चार किस्म के आदमियों की शफाअत करूंगा।
१, जो मेरी आल व औलाद की इज्जत करेगा,
२, जो उनकी जरुरियात को पूरा करेगा,
३, जब वह किसी काम में परेशान हो जायें तो उनके उमूर को पाए तकमील तक पहुंचाने के लिए सरगरमे अमल हो जाएय और
४ जो अपने दिल और जुबान से उनका चाहने वाला हो।
📗 (मनाकिबे अहले – बैत सफा : 70 , सवाइके मुहर्रका सफा : 692 व 589)
यज़ीद इब्ने मुआविया मलऊन मुसलमान नहीं है

यज़ीद इब्ने मुआविया मलऊन मुसलमान नहीं है
यज़ीद इब्ने मुआविया मलऊन के दौरे हुक़ूमत में तीन बड़े काले कारनामें जो उसके हुक्म पर उसकी फ़ौज ने अंजाम दिए:
1) सन 61 हिजरी में वाक़ेय करबला:
इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम और असहाब और अहलेबैत इमाम अलैहिस्सलाम का क़त्ल, बचे हुए लोगों को बंदी बनाकर उन के साथ ज़ुल्म की इंतेहा की और क़ैद ख़ानों में क़ैद रखा।
2) सन 63 हिजरी में वाक़ेय हर्रा:
मदीना ए मुनव्वरा में रौज़ए रसूले ख़ुदा (स) की हुरमत को पामाल किया, फ़ौजे यज़ीद मलऊन ने वहां और जन्नतुल बक़ी में अपने घोड़े बांधे और नजासत फैलाई, हज़ारों सहाबिए रसूल (स) का क़त्ले आम किया, तीन दिनों तक सैकड़ों मासूम लड़कियों, औरतों और बेवाओं के साथ इज्तेमाई फ़ेले हराम (बलात्कार) किया जिस के नतीजे में तकरीबन हज़ारों नाजाएज़ बच्चे पैदा हुए, तीन दिनों तक मस्जिदे नबवी में अज़ान और नमाज़ ना हो सकी।
3) सन 64 हिजरी में वाक़ेय मक्का:
मक्के को कई दिनों तक घेरकर रखा, काबे पर आग़ के गोले और पत्थर बरसाए जिस के नतीजे में काबे की छत पर आग लग गई और ग़िलाफ़े काबा जल गया, बहुत से तबर्रुकात जलकर ख़ाक हो गए, दीवारे काबा तक हिल गई, यह घेरा यज़ीद की मौत की ख़बर आने तक जारी रहा।
यज़ीद इब्ने मुआविया मलऊन शराबी, ज़ानी था और गुनाहे कबीरा खुले आम और बड़े फ़ख़्र से करता था, मिम्बर की तौहीन और बंदरों से खेलना वगैरह उस की आदतों में शुमार था।
यज़ीद इब्ने मुआविया मलऊन एक शायर भी था उसने गुस्ताख़ी में कुछ शेर कहे जिस में उसने दीने इस्लाम का इन्कार करते हुए उसका मज़ाक उड़ाया और अपनी जीत पर अपने पुरखों (अबू सुफ़ियान व मुआविया) को याद करके उन्हें कहा कि काश तुम मौजूद होते तो देखते मैंने किस तरह तुम्हारा बदला लिया है खानदाने रसूल (स) से, ना कोई ख़बर (वही) आई थी और ना कोई इनक़ेशाफ़ हुआ था बल्कि यह सब एक ढकोसला था।
इसके अलावा भी बहुत सारे जुर्म और गुनाह तारीख़ में मौजूद हैं। इतने ज़ुल्म व जब्र और गुनाहों के बाद भी मुनाफ़ेक़ीन का मिशन यज़ीद को मुसलमान साबित करना है जिसके लिए यह मुनाफ़ेक़ीन तरह तरह की दलीलें, क़िस्से और कहानियां पेश करते हैं।
क्या यज़ीद मुसलमान हो सकता है?
काबे पर हमला यानी “ला इलाहा इल्लल्लाह” का मुनकिर।
मदीने पर हमला यानी “मुहम्मद रसूल अल्लाह” का मुनकिर।
और जब वह इन दोनों विलायतों का मुनकिर हो गया तो अपने आप तीसरी विलायत यानी “अलियुन वलीउल्लाह” का मुनकिर भी हो गया।
यज़ीद जब सारी विलायतों का मुनकिर था तो इस का मतलब है कि वह मुसलमान नहीं था बल्कि काफ़िर से बदतर था और यही वजह थी कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने यज़ीद को ललकारा और इमाम (अ) को इस्लाम बचाने के लिए घर से निकलना पड़ा।

