मशाएख़ का क़ौल है बन्दे के लिए चार हिजाब हैं

मशाएख़ का क़ौल है बन्दे के लिए चार हिजाब हैं
(1) दुनिया (2) ख़ल्क़ (3) शैतान (4) नफ़्स


हर एक का कुछ ना कुछ ईलाज भी बताया गया है । दुनिया के हिजाब को दूर करने के लिए क़नाअत (सब्र) है । ख़ल्क़ के नक़ाब को दूर करने के लिए ईज़्ज़त व गोशा-नशीनी (तन्हाई) है । शैतान से बचने के लिए ईस्ताअज़त-मिनल्लाह (अल्लाह से पनाह माँगे) और रसूलल्लाह ﷺ की तरफ ईल्तेजा है । नैज़ शैख़ से ईल्तेजा भी है, चुँके मुर्शिद नाएबे-मन्सूब होता है । अगर इंसानी नज़र से देखा जाए तो कोई हिजाब नफ़्स के हिजाब के बराबर नहीं । क्योंके दुनिया की तलब और मख़्लूक़ की तरफ रग़बत का सबब यही नफ़्स है । नफ़्स के अन्दर तस्वीलाते शैतानी (फ़रेब व मक्र) भी हैं । नफ़्स सत्तर (70) शयातीन से ज़्यादा ख़बीस है ।
“अल-जुमआते-अल-शाहीया ज़िल्द -2 (हज़रत शाहेआलम रहमतुल्लाह अलैह के ज़ुमआ के ख़ुत्बे -जिल्द 2)”

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