Hadith Ali (AlahisSalam)tum duniya wa āḳhirat mein mere bhai ho.

Sayyidinā ʻAlī Karrama Allāhu Waj·hahu Al-karīm Kā Ẕikre Jamīl

سیدنا علی کرم اﷲ وجھہ الکریم کا ذکرِ جمیل

٢٣۔ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللهُ عَنْهُمَا، قَالَ: آخٰی رَسُوْلُ اﷲِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ بَيْنَ أَصْحَابِه فَجَاءَ عَلِيٌّ تَدْمَعُ عَيْنَاهُ، فَقَالَ: يَا رَسُوْلَ اﷲِ، آخَيْتَ بَيْنَ أَصْحَابِکَ وَلَمْ تُؤَاخِ بَيْنِي وَبَيْنَ أَحَدٍ. فَقَالَ لَه رَسُوْلُ اﷲِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ : أَنْتَ أَخِي فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ. رَوَاهُ التِّرْمِذِيُّ وَالْحَاکِمُ، وَقَالَ التِّرْمِذِيُّ: هٰذَا حَدَيْثٌ حَسَنٌ غَرِيْبٌ.

’’حضرت عبد اﷲ بن عمر رضی اﷲ عنہما سے مروی ہے کہ جب حضور نبی اکرم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم نے انصار و مہاجرین کے درمیان بھائی چارہ قائم کیا تو حضرت علی رضی اللہ عنہ روتے ہوئے حاضر ہوئے اور عرض کیا: یا رسول اﷲ! آپ صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم نے صحابہ کرام میں بھائی چارہ قائم فرمایا لیکن مجھے کسی کا بھائی نہیں بنایا۔ آپ صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم نے ان سے فرمایا: (اے علی!) تم دنیا و آخرت میں میرے بھائی ہو۔‘‘

اسے امام ترمذی اور حاکم نے روایت کیا ہے۔ امام ترمذی نے فرمایا: یہ حدیث حسن غریب ہے۔

  • “Ḥaz̤rat ʻAbd Allāh bin ʻUmar raḍiya Allāhu ‘anhumā se marwī hai ki jab Ḥuz̤ūr Nabīye Akram ṣallá Allāhu ‘alayhi wa-Ālihi wa-sallam ne anṣār-o muhājirīn ke darmiyān bhā’ī-chārā qā’im kiyā to Ḥaz̤rat ʻAlī raḍiya Allāhu ‘anhu rote hū’e ḥāz̤ir hū’e aur ʻarz̤ kiyā: yā Rasūl Allāh! Āp ṣallá Allāhu ‘alayhi wa-Ālihi wa-sallam ne ṣaḥabā-e kirām meṅ bhā’ī-chārā qā’im farmāyā lekīṅ mujhe kisī kā bhā’ī nahīṅ banāyā. Āp ṣallá Allāhu ‘alayhi wa-Ālihi wa-sallam ne un se farmāyā: (ae ʻAlī) tum dunyā wa āḳhirat meṅ mere bhā’ī ho.” Ise imām Tirmiḏẖī aur Ḥakim ne riwāyat kiyā hai. Imām Tirmiḏẖī ne farmāyā: yeh ḥadis̲ ḥasan ġharīb hai.
    [Aḳhrajah al-Tirmiḏẖī fī al-Sunan, kitāb al-manākib, bāb manāqibi ʻAlī ibn Abī Ṭālib raḍiya Allāhu ‘anhumā, 05/636, al-raqm: 3720,

al-Ḥākim fī al-Mustadrak, 03/15, al-raqm: 4288,

Ibn ʻAsākir fī Tārīḳh Madīnaṫ Dimashq,/42, al-raqm: 51,

al-Nawawī fī Tahḏẖīb al-asmā’, 01/318,

Ṭāhir al-Qādrī fī Ḥusnu al-maʻāb fī Ḏh̲ikri Abī Turāb karrama Allāhu waj·hahu al-Karīm,/34_35, al-raqm: 23.]
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रिफअते मुसतफा

नबीए करीम अलैहिस्सलाम ने इरशाद फरमाया मेरी मिसाल और नबियों की मिसाल उस महल की सी है जिसकी तामीर बहुत अच्छी की गई हो और एक इंट की जगह छोड़ दी गई हो देखने वाले उस महल के इर्द गिर्द फिरते हैं और खूबी तामीर से खुश होते हैं मगर उस एक इंट की खाली जगह से [हैरान रह जाते हैं] के ये खाली जगह क्यों है पस मैंने आकर उस खाली जगह को बन्द कर दिया है
ये महल मेरे वुजूद से पूरा कर दिया गया और रसूलों को मुझ से ख़तम कर दिया गया मैं उस इमारत की वह पहली इंट हूँ और मैं नबियों का ख़तम करने वाला हूँ
मिश्कात शरीफ,
नबी ने फरमाया हम आए सब से आखिर में और [जन्नत में दाखिल होते हुए होंगे] सब से आगे
मिश्कात शरीफ,
मुख़्तसर ये के आते हुए हम सबसे पीछे हैं मगर वापसी पर दखूले जन्नत के वक़्त हमारे आका व मौला सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी उम्मत को साथ लेकर सब से आगे होंगे
सर’वरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शबे मेराज अल्लाह से अर्ज़ की के मौला तूने मेरी उम्मत को सब उम्मतों के बाद क्यों भेजा तो रब ने जवाब में इरशाद फरमाया के ताके तुम्हारी उम्मत को जियादह देर कब्रों में न रहना पड़े
बा हवाला : मुफीदुल वाएज़ीन सफहा 48,
इमामे नस्फी रज़ियल्लाहू तआला अन्हु ने फरमाया के मूसा अलैहिस्सलाम ने रब से पूछा के मौला मैं तेरा कलीम हूँ और मुहम्मद [सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम] तेरा हबीब है ये तो फरमा के कलीमो हबीब में किया फर्क है खुदा ने फरमाया के कलीम वह है जो अपने मौला की रज़ा से काम करे और हबीब वह है जिस की रज़ा से मौला काम करे
और कलीम वह है जो अल्लाह को चाहे हबीब वह है जिसको अल्लाह चाहे कलीम वह है जो खुद तूरे सीना पर आकर इल्तिजा करे और हबीब वह है जो अपने बिस्तर पर आराम फरमा हो और [बहुक्मे खुदा] जिब्रील खुद हाज़िर होकर उसे एक पल में वहाँ ले आए जहाँ कोई न पहुँचा हो
बा हवाला: मुफीदुल वाएज़ीन सफहा 19,