Month: July 2020
Madine ke moti 3

16 Zil Qadah
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*16 Zil Qada* 💐💐 🌹 *616wa URS MUBARAK* 🌹 *Shehansha e Deccan Wali Al Kabeer As Saadiq Hazrat Khawaja Syed Sadr ud Deen Abul Fatah Muhammad Hussaini Almaroof Sarkar Khawaja Banda Nawaaz Gaisu Daraaz (Rehmatullah Alaih)* *Aapki Wiladat 4 Rajab 720 Hijri 10 August 1320 Esvi Baroz Itvar Hui, Aapka Wisaal 16 Zil Qada 825 Hijri Mutabik 1 November 1422 Esvi Baroz Itvar Hua, Aap Hazrat Khawja Naseer ud Deen Mehmood Chiraag e Dehlavi (Rehmatullah Alaih) Ke Mureed wa Khalifa Hai, Aapke Khalifa Hazrat Khawja Syed Hussain Urf Muhammad Akbar Husaini (Rehmatullah Alaih) Hai, Aapka Mazar Mubarak Gulbarga Sharif, Karnataka, India Me Marjai Khaliak Hai…*

Hadith on झूठ बोलना
झूठ बोलना*
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_*ये भी एक अलमिया है कि मुसलमान झूट बोलकर या धोखा देकर अपने भाई को बेवकूफ बनाता है और उसपे फख्र करता है कि मैंने फलां को बेवकूफ बनाया हालांकि झूट बोलना और धोखा देना दोनों ही हराम काम है, जैसा कि हदीसे पाक में मज़कूर है हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि*_
*_जिस के अन्दर ये बातें पायी जाए यानि जब बात करे तो झूट बोले वादा करे तो पूरा ना करे और अमानत रखी जाए तो उसमे खयानत करे तो वो खालिस मुनाफिक़ है अगर चे वो नमाज़ पढ़े रोज़ा रखे और मुसलमान होने का दावा करे_*
_*📕 मुस्लिम, जिल्द 1, सफह 56*_
*_बेशक झूट गुनाह की तरफ ले जाता है और गुनाह जहन्नम में_*
_*📕 बुखारी, जिल्द 2, सफह 900*_
*_उस शख्स के लिए खराबी है जो किसी को हंसाने के लिए झूट बोले_*
_*📕 अत्तर्गीब वत्तर्हीब, जिल्द 3, सफह 599*_
*_झूटा ख्वाब बयान करना सबसे बड़ा झूट है_*
_*📕 मुसनद अहमद, जिल्द 1, सफह 96*_
*_मोमिन की फितरत में खयानत और झूट शामिल नहीं हो सकती_*
_*📕 इब्ने अदी, जिल्द 1, सफह 44*_
*_झूटे के मुंह को लोहे की सलाखों से गर्दन तक फाड़ा जायेगा_*
_*📕 बुखारी, जिल्द 2, सफह 1044*_
_*अब कुछ हुक्म क़ुरान से भी पढ़ लीजिए*_
*_झूटों पर अल्लाह की लानत है_*
_*📕 पारा 3, सूरह आले इमरान, आयत 61*_
*_बेशक अल्लाह उसे राह नहीं देता जो हद से बढ़ने वाला बड़ा झूटा हो_*
_*📕 पारा 24, सूरह मोमिन, आयत 28*_
*_मर जाएं दिल से तराशने वाले (यानि झूट बोलने वाले)_*
_*📕 पारा 26, सूरह ज़ारियात, आयत 10*_
*_झूट और बोहतान वही बांधते हैं जो अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं रखते_*
_*📕 पारा 14, सूरह नहल, आयत 105*_
_*और वादे के ताल्लुक़ से अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरान में इरशाद फरमाता है*_
*_और वादा पूरा करो कि बेशक क़यामत के दिन वादे की पूछ होगी_*
_*📕 पारा 15, सूरह असरा, आयत 34*_
*_ऐ ईमान वालो वादों को पूरा करो_*
_*📕 पारा सूरह मायदा, आयत 1*_
_*ज़रा गौर कीजिये कि किस क़दर इताब की वईद आयी है झूट बोलने और धोखा देने के बारे में, हंसी मज़ाक करना या दिल बहलाना हरगिज़ गुनाह नहीं बस शर्त ये है कि झूट ना बोला जाए और किसी का दिल ना दुखाया जाए, हां मगर तीन जगह झूट बोलना जायज़ है*_
*_1. जंग मे – दुश्मन पर रौब तारी करने के लिये कहा कि हमरी इतनी फौज और आ रही है या दुश्मनों की फौज मे भगदड़ मचाने के लिये अफवाह उड़ा दी कि उनका सिपाह सालार मारा गया वगैरह वगैरह_*
*_2. दो मुसलमानों के बीच सुलह कराने मे – एक दूसरे से दोनो की झूटी तारीफ की कि वो तो तुमहारी बड़ी तारीफ कर रहा था इस तरह दोनो को मिलाना_*
*_3. शौहर का बीवी से – बीवी नाराज़ हो गयी तो उसको मनाने की गर्ज़ से कह दिया कि मैं तुम्हारे लिये ये ले आऊंगा वो ले आऊंगा या उसके पूछने पर कि कैसी लग रही हूं तो अगर चे अच्छी नहीं भी लग रही थी कह दिया कि बहुत अच्छी लग रही हो वगैरह वगैरह_*
_*📕 तिर्मिज़ी, जिल्द 4, हदीस 1939*_
_*इस्लाम में तफरीहात हरगिज़ मना नहीं बल्कि रसूल अल्लाह सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम से साबित है, पढ़िए*_
*_एक मर्तबा एक ज़ईफा बारगाहे नबवी में आईं और कहने लगी कि हुज़ूर मेरे लिए दुआ फरमा दें कि अल्लाह मुझे जन्नत में दाखिल करे, आप सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने उससे फरमाया कि कोई बुढ़िया जन्नत में नहीं जाएगी, इस पर वो रोने लगी तो आपने मुस्कुराते हुए फरमाया कि ऐ अल्लाह की बन्दी मेरे कहने का ये मतलब है कि कोई बूढ़ी औरत जन्नत में नहीं जाएगी बल्कि हर बूढ़ी को जवान बनाकर जन्नत में भेजा जायेगा, तो वो खुश हो गयी इसी तरह एक सहाबी हाज़िर हुए और सवारी के लिए ऊंट मांगा तो आप फरमाते हैं कि मैं ऊंटनी का बच्चा दूंगा तो वो कहते हैं कि हुज़ूर मैं बच्चे पर सवारी कैसे करूंगा तो आप मुस्कुराकर फरमाते हैं कि ऊंट भी तो ऊंटनी का बच्चा ही होता है ऐसे ही कई सच्ची तफरीहात अम्बिया व औलिया व सालेहीन से मनक़ूल है_*
_*📕 रूहानी हिकायत, सफह 151*_
*_एक फक़ीह किसी के घर में किराए पर रहते थे, मकान बहुत पुराना और बोसीदा था अकसर दीवारों और छतों से चिड़चिड़ाने की आवाज़ आती रहती थी, एक दिन जब मकान मालिक किराया लेने के लिए आये तो फक़ीह साहब ने फरमाया कि पहले मकान तो दुरुस्त करवाइये तो कहने लगे कि अजी अल्लामा साहब आप बिल्कुल न डरें ये दीवार और छत तस्बीह करती रहती है उसकी आवाज़ें हैं, तो फक़ीह बोले कि तस्बीह तक तो गनीमत है लेकिन अगर किसी रोज़ आपकी दीवार और छत पर रिक़्क़त तारी हो गयी और वो सजदे में चली गयी तब क्या होगा_*
_*📕 मुस्ततरफ, सफह 238*_
_*कहने का मतलब सिर्फ इतना है की हंसी मज़ाक करिये बिल्कुल करिये मगर झूट ना बोलिये गाली गलौच ना कीजिये और ना किसी की दिल आज़ारी कीजिये, मौला से दुआ है कि हम सबको हक़ सुनने हक़ समझने और हक़ पर चलने की तौफीक अता फरमाये

