Hadith on Ahele Bait 2

Hazart Abdullah ibne Abbas RadiAllahu Anhuma se marfuan Hadees marvi hai ke Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya: “Mai Darakht Hun, Fatimah Uski Tehni Hai, Ali Uska Shagofa Hai, Hasan aur Hussain Uska Phal Hain aur Ahle Bayt se Muhabbat karne waale Uske Patte hain. Ye sab Jannat me honge. Ye Haq hai Ye Haq hai!” Alaihi-Muswalatu was-Salaam -Daylami, Musnad al Firdaus, 1/52, #135 Shawkani, Istijlab Irteqab.. , page 99 Allahumma Salle Ala Sayyedina wa Maulana Muhammad wa Ala Sayyedina Aliyyuw wa Sayyedatina Fatimah wa Sayyedatina Zainab wa Sayyedina Hasan wa Sayyedina Hussain wa Ala Aalihi wa Sahbihi wa Baarik wa Sallim. Allahumma Salli Ala Sayyedina Mohammadi Nin Nabiyyi wa Azwajihi Ummahatul Mumineen wa Zurriyatihi wa Ahle Baytihi kama Sallaita Ala Ibrahima Innaka Hamidum Majeed.💞

अल्लाह_रसूल_ने_जिनसे_मोहब्बत_का_हुक्म_दिया_उनसे_मोहब्बत_कीजे

#अल्लाह_रसूल_ने_जिनसे_मोहब्बत_का_हुक्म_दिया_उनसे_मोहब्बत_कीजे
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त और हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम ने जिनसे मोहब्बत का हुक्म दिया है उनसे मोहब्बत करना हम पर फ़र्ज़ है

लेकिन वो ख़ुद भी किसी और मोहब्बत का शिकार हैं और लोगों को भी मजबूर करते हैं की उन्ही से मोहब्बत की जाये जिससे वो मोहब्बत करते हैं

ये तो अल्लाह रसूल की नाफ़रमानी है लेकिन उनको समझ में नही आ रहा

उन्हें कौन बताए की पहले हुज़ूर के अहलेबैत की मोहब्बत ज़रूरी है क्योंकि ये अल्लाह रसूल का हुक्म है और इस मोहब्बत का ताल्लुक़ हमारे ईमान से है

आप जिनसे मोहब्बत करवाना चाह रहे हैं उनसे मोहब्बत बाद में क्योकि वो मोहब्बत अक़ीदत्न है

वो पूछते हैं कि जिससे मैं मोहब्बत करता हूँ तुम उनसे मोहब्बत करते हो या नही
जिसे मैं मानता हूँ उसे तुम मानते हो या नही

जबकि पूछना तो ये चाहिए
अल्लाह रसूल के हुक्म के मुताबिक़ अहलेबैत से मोहब्बत करते हो या नही
अहलेबैत को मानते हो या नही

लेकिन एक ज़िद पाल ली जिसने बुग़ज़ (दुश्मनी) की शक्ल इख़्तेयार कर ली है

अल्लाह हम सब को हिदायत दे और अहलेबैत के मुहिब्बो में शामिल करे

अहलेबैत का बुग़ज़ दुनिया आख़िरत सब तबाह कर देता है

लम यअरिफुनी गैरु रब्बी..

लम यअरिफुनी गैरु रब्बी..

यह #हदीस आपने कई मर्तबा सुनी होगी कि हुज़ूर नबी ए अकरम ने सैय्यदना अबू बकर सिद्दीक र.अ. से फ़रमाया कि मेरी हक़ीक़त को मेरे रब के अलावा कोई नहीं जानता..

इसके बरअक्स आपने यह हदीस शायद ही कभी सुनी हो कि जब नजरानियों से मुबाहले का मुआमला पेश आया और #अल्लाह ने आयते मुबाहिला नाज़िल फरमाई और आयत के मुताबिक़ सरकार जाने बहार ने अपने साथ सैय्यदा फातमा, हसन-हुसैन, और मौलाए कायनात को बुला लिया
लिहाज़ा उस आयत के मुताबिक मौला ए #कायनात अली अल-मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम नफ्से रसूल क़रार पाये.
इसके अलावा अली और मैं एक #नूर से हैं, अली मुझसे हैं और मैं अली से हूँ, जिसने अली को गली दी उसने मुझे गाली दी. अली का खून मेरा खून है, #अली का गोश्त मेरा गोश्त है, अली का जिस्म मेरा जिस्म है वगैरह वगैरह फरमाने नबवी भी कसरत के साथ मौजूद हैं.

इन सब को मद्देनज़र रखते हुए अब आप ख़ुद यह सोचिये कि जब अल्लाह के अलावा साहिबे लौलाक सरवरे कायनात की हक़ीक़त को कोई नहीं जानता तो भला यह कैसे मुमकिन है कि अल्लाह और उसके #रसूल के अलावा कोई नफ्से रसूल, नूरे रसूल, खूने रसूल, शोहरे #बतूल की हक़ीक़त को जान सकता हो?

समझ आया क्यों हुज़ूर ने फ़रमाया अली मिस्ले #ईसा अलैहिस्सलाम हैं, अली का मुकाम ऐसा ही है जैसा #मूसा के नजदीक #हारुन अलैहिमुस्सलाम का.. और क्यों ग़दीरे खुम पर ख़ुत्बा में इरशाद फ़रमाया कि जिसका मैं मौला हूँ अली उसका मौला है ?

समझ आया क्यों फ़रमाया मैं #इल्म ओ #हिकमत का शहर हूँ और अली उसका दरवाज़ा ?

اللهم صل وسلم و بارك علیٰ سیدنا محمد و علیٰ آل سیدنا محمد كما صلیت و باركت علیٰ سیدنا ابراهیم و علیٰ آل سیدنا یبراهیم انك حمید مجید۔