Hadith Sayyidah Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Khafa To Allah Khafa……. In Kee Riza Allah Kee Riza

Sayyidah Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Khafa To Allah Khafa……. In Kee Riza Allah Kee Riza

“Hazrat Ali كَرَّمَ للهُ تَعَالىٰ وَجْهَهُ الْكَرِيْم Se Riwayat Hai Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Sayyidah Fatimah Se Farmaya : Be Shak Allah Ta’ala Teri Naaraazgi Par Naaraaz Aur Teri Riza Par Raazi Hota Hai.”

[1_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 03/167, Raqam-4730,

2_Aboo Ya’la Fi Al-Mu’jam,/190, Raqam-220,

3_Shaybani Fi Al-Ahad Wa’l-Mathani, 05/363, Raqam-2959,

4_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 01/108, Raqam-182,

5_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 22/401, Raqam-1001,

6_Doolabi Fi Adh-Dhurriyah At-Tahirah,/120, Raqam-235,

7_Qazwini Fi At-Tadwin Fi Akhbar Qazwin, 03/11,

8_Haythami Ne ‘Majma’-uz-Zawa’id Wa Manba’-ul-Fawa’id (09/203)’ Me Kaha Hai Ki Ise Tabarani Ne Hasan Isnaad Ke Saath Kiya Hai.

9_Ibn Jawzi Fi Tadhkirat-ul-Khawass,/279,

10_Ibn Athir Fi Usd-ul-Ghabah Fi Ma’rifat-is-Sahabah, 07/219,

11_Asqalani Fi Tahdhib-ut-Tahdhib, 12/468,

12_Asqalani Fi Al-Isabah Fi Tamyiz-is-Sahabah, 08/56, 57,

13_Muhibb Tabari Fi Dhakha’ir-ul-‘Uqba Fi Manaqibi Dhawi-‘l-Qurba,/82,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/60 61, Raqam-43.]

रोज़े के दौरान हमारे जिस्म का रद्दे अमल (Reaction) क्या होता है?

🌸 रोज़े के दौरान हमारे जिस्म का रद्दे अमल (Reaction) क्या होता है? इस बारे में कुछ दिलचस्प मालूमात:

पहले दो रोज़े:

पहले ही दिन ब्लड शुगर लेवल गिरता है यानी ख़ून से चीनी के ख़तरनाक असरात का दर्जा कम हो जाता है।

दिल की धड़कन सुस्त हो जाती है और ख़ून का दबाव कम हो जाता है। नसें जमाशुदा ग्लाइकोजन को आज़ाद कर देती हैं। जिसकी वजह से जिस्मानी कमज़ोरी का एहसास उजागर होने लगता है। ज़हरीले माद्दों की सफ़ाई के पहले मरहले के नतीज़े में सरदर्द, सर का चकराना, मुंह का बदबूदार होना और ज़बान पर मवाद जमा होता है।

तीसरे से सातवें रोज़े तक:

जिस्म की चर्बी टूट फूट का शिकार होती है और पहले मरहले में ग्लूकोज में बदल जाती है। कुछ लोगों में चमड़ी मुलायम और चिकना हो जाती है। जिस्म भूख का आदी होना शुरु हो जाता है और इस तरह साल भर मसरूफ़ रहने वाला हाज़मा सिस्टम छुट्टी मनाता है।

ख़ून के सफ़ेद जरासीम (white blood cells) और इम्युनिटी (रोग प्रतिकार शक्ति) में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है, हो सकता है रोज़ेदार के फेफड़ों में मामूली तकलीफ़ हो इसलिए कि ज़हरीले माद्दों की सफ़ाई का काम शुरू हो चुका है। आंतों और कोलोन की मरम्मत का काम शुरू हो जाता है। आंतों की दीवारों पर जमा मवाद ढीला होना शुरू हो जाता है।

आठवें से पंद्रहवें रोज़े तक:

आप पहले से चुस्त महसूस करते हैं। दिमाग़ी तौर पर भी चुस्त और हल्का महसूस करते हैं, हो सकता है कोई पुरानी चोट या ज़ख़्म महसूस होना शुरू हो जाए। इसलिए कि आपका जिस्म अपने बचाव के लिए पहले से ज़ियादा एक्टिव और मज़बूत हो चुका होता है। जिस्म अपने मुर्दा सेल्स को खाना शुरू कर देता है। जिनको आमतौर से केमोथेरेपी से मारने की कोशिश की जाती है। इसी वजह से सेल्स में पुरानी बीमारियों और दर्द का एहसास बढ़ जाता है। नाड़ियों और टांगों में तनाव इसी अमल का क़ुदरती नतीजा होता है जो इम्युनिटी के जारी अमल की निशानी है।

रोज़ाना नमक के ग़रारे नसों की अकड़न का बेहतरीन इलाज है।

सोलहवें से तीसवें रोज़े तक:

जिस्म पूरी तरह भूक और प्यास को बर्दाश्त का आदी हो चुका होता है। आप अपने आप को चुस्त, चाक व चौबंद महसूस करते हैं।

इन दिनों आप की ज़बान बिल्कुल साफ़ और सुर्ख़ हो जाती है। सांस में भी ताज़गी आ जाती है। जिस्म के सारे ज़हरीले माद्दों का ख़ात्मा हो चुका होता है, हाज़में के सिस्टम की मरम्मत हो चुकी होती है। जिस्म से फ़ालतू चर्बी और ख़राब माद्दे निकल चुके होते हैं। बदन अपनी पूरी ताक़त के साथ अपने फ़राएज़ अदा करना शुरू कर देता है।

बीस रोज़ों के बाद दिमाग़ और याददाश्त तेज़ हो जाते हैं। तवज्जो और सोच को मरकूज़ करने की सलाहियत बढ़ जाती है। बेशक बदन और रूह तीसरे अशरे की बरकात को भरपूर अंदाज़ से अदा करने के क़ाबिल हो जाते हैं। (शब ए क़द्र भी बीसवें रोज़े के बाद है)

यह तो दुनिया का फ़ायदा रहा जिसे बेशक हमारे ख़ालिक़ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने हमारी ही भलाई के लिए हम पर वाजिब किया। मगर देखिए उसका अंदाज़े करीमाना कि उसके एहकाम मानने से दुनिया के साथ साथ हमारी आख़िरत भी संवारने का बेहतरीन बंदोबस्त कर दिया।

सुब्हानल्लाहि व बेहम्दिहि सुब्हानल्लाहिल अज़ीम

🤲 अल्लाह हुम्मा अज्जील ले वलियेकल फ़रज🌹

EK BUZURG SE PUCHA GAYA !!!

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EK BUZURG SE PUCHA GAYA !!!

AAP KI NAZAR ME MAULA ALI (A.S) KYA HAIN ?

UNHO NE PUCHA : BEHTARIN JAGAH KYA HAI ?

MAE NE KAHA : MASJID,

UNHO NE PUCHA: MASJID KI BEHTARIN JAGAH KAUN SI HAI ?

MAE NE KAHA : MEHRAB,

UNHO NE PUCHA : BEHTARIN AMAL KYA HAI ?

MAE NE KAHA NAMAZ,

UNHO NE PUCHA: BEHTARIN NAMAZ ?

MAE NE KAHA NAMAZ E SUBAH,

UNHO NE PUCHA : NAMAZ KA BEHTARIN HISSA ?

MAE NE KAHA SAJDA,

AUR BADAN KA BEHTARIN HISSA ?

MAE NE KAHA PESHANI,

UNHO NE PUCHA: BEHTARIN MAHINA ?

MAE NE KAHA RAMZAN,

UNHO NE PUCHA : BEHTARIN RAAT ?

MAE NE KAHA SHAB E QADAR,

UNHO NE PUCHA: BEHTARIN MAUT (MARNA) ?

MAE NE KAHA SHAHADAT,

TAB BUZURG NE MUJ SE KAHA :
MAULA ALI (A.S) MAHE RAMZAN ME, SHAB E QADAR ME, MASJID ME, MEHRAB ME, NAMAZ ME, SUBAH K WAQT SAJDE KI HALAT ME, SHAHID HUWE,

IS K ELAWA BHI KOI MAQAM HO SAKTA HAI ??
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