
नादे अली
जब खैबर की जंग फतह नजर ना आई और लश्करे इस्लाम में मायूसी फलने लगी तो हज़रत जिब्रिल नाज़िल हुऐ और रसूलल्लाहﷺ की खिदमत में अर्ज किया की “अल्लाह आप को सलाम कहता है और फरमाता है कि या तो में फरिश्तों की फौज़ भेज दूं और तुम्हारे लिए जंग फतह करू या फिर अली को मदद के लिए बुलाये” रसूल ऐ अकरम ने फरमाया “में अली को अख्तियार करता हूं” तो जिब्रिल ने कहा अच्छा आप अली को अख्तियार करते है तो फिर कह दीजिये
“नादे अली यम मजहरुल अजाईबे
तजहिदु ओनलका फिन नवाईबे
कुल्लि हम्मीमव व गममीन शयनजली
बे अजमतेका या अल्लाहो
बे नबुवतेका या मोहम्मद सल्ललाहो अलेही वस्सलम
बे विलायतेका या अलीयो अलीयो या अलीयो”
ऐ रसूल अली को पुकारो जिससे अजाईबात जाहिर होते है तुम उन को हर मुसीबत में अपना मददगार पाओगे तुम्हारी सारी दुख परेशानी दूर हो जायेगी अली की मदद से अली की मदद से अली की मदद से

