Taleemat e Ameer R.A part 84

** تعلیمات امیر (Taleemat e Ameer r.a)
** چوراسیواں حصہ (part-84)

  • دعاۓ بشمخ۔
    “منبع الانساب” (اردو ترجمہ) کے حواشی میں “ڈاکٹر ساحل شہسرامی” لکھتے ہیں کہ۔
    سیدنا شاہ بدیع الدین قطب المدار قدس سرہ بڑے عالی مرتبت اور روشن ضمیر بزرگ گزرے ہیں۔ آپ مقام قطبیت پر فائز ہیں۔ کئی روحانی عطیات بارگاہ رب العزت سے آپ کو الہام ہوۓ۔ ان میں دعاۓ بشمخ بھی ہے جو خاص آپ سے منقول ہے۔ اسد العارفین سید شاہ محمد حمزہ عینی مارہروی قدس سرہ اس دعا کے بارے میں “کاشف الاستار شریف” میں رقم طراز ہیں۔
    “جان لو! یہ دعا فقیر کے خاندان میں بہت رائج ہے۔ درویشوں نے اس سے چلے پورے کئے ہیں، دنیادار لوگ بھی اسے پڑھتے ہیں۔ میرے جد امجد حضور صاحب البرکات قدس سرہ کو حضرت شاہ مدار قدس سرہ کی روح مبارک سے اس کی سند اجازت ملی ہے۔ یہ دعا حضرت شاہ مدار کی پیش کی ہوئی ہے، ان سے پہلے اس دعا کا رواج نہیں تھا۔ اس فقیر نے جب اپنے وطن مالوف بلگرام سے مارہرہ مطہرہ آنے کا قصد کیا تو دوران سفر قنوج میں سارا سامان چھوڑ کر بالکل خالی ہاتھ ۴/ذی الحجہ ۱۱۵۷ھ کو مکن پور کی زیارت کے لئے گیا۔ رات کے اخیر حصے میں حضرت مدار قدس سرہ کے روشن چاند جیسے جمال جہاں آرا کی زیارت نصیب ہوئی۔ آپ نے فقیر کو بھی یہ دعا مرحمت فرمائی۔

📚 ماخذ از کتاب چراغ خضر۔

Radd e Muwayia by sunni references in Hindi

अब्दुल रहमान बीन अब्दे रब्बे काबा ने अब्दुल्लाह बीन उमरो बीन आस से कहा

“तुम्हारे चाचा का बेटा मुआविया हमें ना हक़ माल लुटने और ना हक़ क़त्ल करने का हुक्म देता है जब की अल्लाह ने तो ये फ़रमाया है की ऐ इमान वालो एक दूसरे का माल ना हक़ तरीके से ना खाओ”

  • सही मुस्लिम जिल्द 3, हदीस नं 4776, सफा नं 713 से 715

क़ुरान ऐ करीम में अल्लाह ने ना हक़ क़त्ल करने वालो की सजा जहन्नम फरमायी हैं।

जिसे अल्लाह जहन्नमी केहता हैं, मुल्ला उसे सहाबी और जन्नती केहता हैं।

आप फैसला करे की अल्लाह का कलाम सही है, या मुल्ला का फ़तवा।

अकरमा बयान करते है की

“मैं अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हु के साथ मुआविया के पास था, मुआविया ने एक रकात नमाज़ पढ़ी तो इब्ने अब्बास ने फ़रमाया की इस गधे से पुछो ये तरीका इसने कहा से सीखा।”

  • किताब शरह ऐ मुआनियुल आसार अल मारूफ,
    तहवी शरीफ जिल्द 1, हदीस न. 1678, सफा न. 828

मुआविया ने साद इब्ने अबी वकास को हुक्म दिया की वो मौला अली अलैहिस्सलाम को गालिया दे। नऊज़ुबिल्लाह मीन ज़ालिक।

सही मुस्लिम – जिल्द 4, हदीस No 6220, सफा No 559

अगर एहलेबैत से मुहब्बत करते हो तो उनको गालिया दिलवाने वालो का साथ छोड़ना होगा।

“मुआविया के दौर ऐ हुकूमत में आल ऐ मारवान में से एक शख्श ने हज़रत सहल बीन साद रदियल्लाहो अन्हु से कहा की वो मौला अली अलैहिसालाम को गाली दे।

जब उन्हों ने इंकार कर दिया तो कहा की ये कह दो की अबू तुराब पर अल्लाह की लानत”

नउज़ोबिल्लाह मीन ज़ालिक ! ! ! ! !

  • सही मुस्लिम जिल्द 4 , हदीस नं 6229, सफा नं 565

खुदा जाने उन लोगो की अक़्लो पर कौन से पत्थऱ पड़े थे की मौला से इस कदर दुश्मनी थी, लोगो को मज़बूर किया जाता था की वो मौला पर लानत करे और जब अकीदतमंद इंकार करते थे तो उन्हें क़त्ल कर दिया जाता था जैसा हाजर बीन आदी और साथिओ के साथ किया गया।

रसूलल्लाह सल्ललाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया “अल्लाह, मुआविया का कभी पेट ना भरे”

  • सही मुस्लिम हदीस न. 6628

और रसूलल्लाह सल्ललाहो अलैहि वसल्लम का ये फरमान हमेशा की तरह सच साबित हुवा और मुआविया का कभी पेट न भरा।

  • तारीख इबने कसीर हिस्सा 8, सफा न. 455

मुआविया को रसूलल्लाह सल्ललाहो अलैहि वसल्लम की हदीस सुन कर अच्छा ना लगा।

इस पर हज़रत अबादा बिन सामित रदियल्लो अन्हु ने कहा “हम तो रसूलल्लाह सल्ललाहो अलैहि वसल्लम की हदीस ज़रुर बयान करेंगे चाहे मुआविया ना पसंद करे या मुआविया की नाक खाक आलूद हो। “

सही मुस्लिम – जिल्द 3, हदीस No 4061, सफा No ३२३

रसूलअल्लाह सल्ललाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया “अम्मार इब्ने यासिर रदियल्लाहो अन्हु को एक बागी जमात क़त्ल करेगी, अम्मार उन्हें जन्नत की तरफ बुलाएंगे और वो अम्मार को जहन्नम की तरफ बुलाएंगे”

  • सही बुखारी जिल्द न. 3, हदीस न 2812 सफ़ा न. 227

सिर्फ इसी एक हदीस को बंदा अपना जहन साफ कर के पढ़ ले तो पता चल जायेगा की मुआविया जहन्नमी था।

जंग ऐ सिफ़्फ़ीन में मुआविया ने हुकूमत की लालच में जंग कर के अम्मार बिन यासीर को क़त्ल किया, और ये साबित कर दिया की अम्मार बिन यासिर को क़त्ल करने वाला ये मुआविया का गिरोह जहन्नम की तरफ बुलाने वाला था।

ये मेरा या किसी मुल्ला का फरमान नहीं पर हुज़ूर सल्ललाहो अलैहि वसल्लम का फरमान है।

हम सब ने ये तो सुना और जाना है की यज़ीद लानती शराबी था पर शराब पीना कहा से सिखा ये मैं आज बताता हूँ।

इमाम अहमद इब्ने हम्बल लिखते है की अपने दौर ऐ हुकूमत में मुआविया शराब पीता था।

जब हम कहते है तो हम को राफ़जी, गुमराह, क़ाफ़िर, सहाबा का गुस्ताख़, ख़ारजी जैसे लफ़्ज़ों से नवाजा जाता है, वही मोलवी अब इब्ने हम्बल के बारे में क्या कहेगा???!!

सहाबी वो हैं जो ईमान की हालत मैं मौत पाये, ये कैसा सहाबी जो शराब पीता था और इमान में मरा???!!!

अगर अब भी मुआविया को इमान में माना तो मतलब शराब को हराम नहीं समझा।

हवाला

  • मुसनद अहमद बीन हम्बल, जिल्द 10, हदीस न. 23329, सफ़ा न. 661

सईद बीन ज़ुबैर रिवायत करते है की

“मैं अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास के साथ अराफात में था

और उन्हों ने कहा “मैं लोगो को तलबिया पढ़ते क्यों नहीं सुन रहा हु?”

मैंने कहा “ये लोग मुआविया से डरे हुवे है”

तो इब्ने अब्बास अपने खेमे से बहार आये और कहा “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक, लब्बैक! और कहा मुआविया ने सिर्फ अली से नफरत में सुन्नत को छोड़ दिया है”

  • Sunan Nisai Jild No. 4, Hadis No 3009, Safa No 628

मुआविया खुद को हज़रत उमर से भी ज्यादा खिलाफत का हक़दार समझता था, मुआविया ने अब्दुल्लाह इब्ने उमर की तरफ इशारा कर के कहा “मैं उसके बाप से भी ज्यादा खिलाफत का हक़दार हूँ”।

  • सही बुखारी जिल्द न. 4, हदीस न. 4108, सफा न. 259

मैं लिख के देता हूँ की तुम्हे आज तक किसी भी अत्तारी बरेलवी ने ये रिवायत नहीं बताई होगी। इस लिए की अब तक तो आप ने सुना था की मुआविया मौला अली अलैहिसलाम का गुस्ताख़ था, पर इस हदीस से साबित होता है की उसने हज़रत उमर को भी नहीं छोड़ा।

उन्ही के बेटे की तरफ इशारा कर के कहता है “वो अपना सर उठाये, मैं उसके बाप से भी ज्यादा खिलाफत का हक़दार हूँ।”

अगर शिया हज़रात हज़रत उमर को कुछ कहे तो वो काफिर हो जाते है और मुआविया कुछ भी कहे, रहेगा वो रदिअल्लह ही। वाह मुसलमान वाह।

इमाम अब्दुल रज़्ज़ाक के सामने जब मुआविया का जिक्र हुवा तो आप ने फ़रमाया

“हमारी मेहफ़िलों को अबू सुफियान के बेटे के जिक्र से गन्दा ना करो”

  • मीज़ान अल एतदाल जिल्द 4, सफा 343
  • सायरे आलम अल नुबाला जिल्द 9, सफा 580
  • किताब अल जुआफा जिल्द 1, सफा 859

जो बन्दे सोच रहे है की इमाम अब्दुल रज़्ज़ाक कौन है तो ये कोई चंदा खोर मौलवी नहीं बता पायेगा, उस शक्श को चाहिए की मुसन्नफ़ अब्दुल रज़्ज़ाक पढ़े जो की हदीस का मजमुआ है तब पता चलेगा की कितने बड़े एहले सुन्नत के मुहद्दिस थे।

मुआविया ने अपने दौर ए हुकूमत में खुद भी मौला अली अलैहिसलाम को गालिया दी है और अपने हुक्मरानो से भी मौला अली अलैहिसलाम को गालिया दिलवाई है।

  • तारीख इ तबरी जिल्द 4, हिस्सा 1, सफा 82
  • खिलाफत व मुलुकियत सफा 174
  • फ़तहुल बारी जिल्द 7, सफा 88
  • अल मफ़हीम जिल्द 1, सफा 231

ये एक हकीकत है और इसका एक नहीं सुन्नी मोतबर किताब और सियासित्ता के अनेक हवाले मौजूद है फिर भी इस हकीकत से मुँह फेर लेना आलीमो की हाथ धर्मी मक्कारी और अपनी दुकान चलाने के लिए आदत बन चुकी है।

अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास ने फ़रमाया की

“मौला अली अलैहिसलाम को गाली देना अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को गाली देना है।”

  • तारीख ऐ मसूदी जिल्द 1, हिस्सा 2, सफा न. 359

जाबिर बिन अब्दुल हमीद जो की सियासित्ता की हदीस के रिजाल लिखने वालो में से है मुआविया को ऐलानिया तौर पर गालिया देते थे।

  • तहज़ीब अल तहज़ीब जिल्द 1, सफा 297-298

जब हम कुछ कहते है तो फ़ौरन राफ्ज़ी और काफिर के फतवे ठोक देते है, अब इन मोलविओ से पूछना चाहता हु, जाबिर बिन अब्दुल हामिद साहब के बारे में क्या कहेंगे???

उम्मुल मोमिनीन बीबी उम्मे सल्मा सलामुल्ला अलैहा से रिवायत है, फरमाती है की
“मौला अली अलैहिसलाम को गाली देना दर असल रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को गाली देना है।”

  • कंज़ुल उम्माल जिल्द 7, हदीस न 36460, सफा न. 74

याद रहे की ये वाक़िया मुआविया लानतुल्लाह की दौर ए हुकूमत का है और उस दौर में लोग मुआविया की तक़लीद में इतने अंधे हो चुके थे की उन्हें ये भी नहीं पता था की वो मौला को गाली दे कर कितना बड़ा गुनाह कर रहे थे।

मुआविया और बनु उमैया के हुक्मरानो को कब तक बचाते रहोगे, खुद उम्मुल मोमिनीन गवाही दे रही है की मौला अली पर शब्बो सितम हुवे है।

मुआविया की नमाज़ ऐ जनाज़ा पढ़ाने वाला यज़ीद मलऊन था।

  • तारीख इब्न इ कसीर जिल्द 8, सफा न. 188

इस पर इमाम शाफ़ई का कॉल है की “यज़ीद अपने बाप की वफ़ात से क़ब्ल (पहले) दमिश्क में दाखिल हुवा और आप ने (मुआविया) ने उसे (यज़ीद को) वसी मुक़र्रर किया”

और यही कॉल इब्ने इश्हाक और दीगर मुअर्रिख़ीन का है।

मौला अली अलैहिस्सलाम का क़ौल बनु उमैया के लिए।

मौला अली अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया की दो सबसे बड़े फासिक और फ़ाजिर कबीले बनु उमैया और बनु मुग़ीरा है।

और बनु उमैया के मान ने वाले भी फासिक होंगे चाहे वो बड़े से बड़ा मौलवी हो या मुफ़्ती हो।

  • अल मुस्तदरक लील हाकिम जिल्द 3, सफा न 273, हदीस न. 3343

मुआविया के नाम का मतलब !

एहले सुन्नत के मशहूर आलिम अल्लामा जलालुद्दीन सुयूती अलैहि रेहमा ने अपनी किताब में लिखा की

“मुआविया नाम के माने उस कुत्ते के है जो दुसरो पर भोंकता है”

और यही रिवायत एहले सुन्नत की दो और किताबो में भी है जो यहाँ पोस्ट करने जा रहा हूँ।

  • Tareekh ul Khulafa by al Hafidh Jalaluddin Suyuti (Urdu translation by Maulana Hakeem Nasree) page 253
  • Rabi’ ul Abrar by Allamah Zamakhshari page 700
  • Tahzeeb ul Kamaal fi Asma’ al-Rijal by Jamaluddin Mizzi page 371