Milad-un-Nabi SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa-Aalihi Wa-Sallam Ahaadithe Mubaaraka Kee Raushni Me

“Hazrat Anas رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُNe Bayaan Farmaya : Jab Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمMadinah Munawwarah Tashreef Laa’e To Ahle Habasha Ne Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Kee Aamad Kee Khushi Manaate Hu’e Apne Aalaate Harb Ke Saath Khoob Khel Kood (Aur Raqs) Kiya.”
Is Hadith Ko Imam Ahmad Aur Aboo Dawud Ne Riwayat Kiya Hai. Aur Is Kee Isnaad Sahih Hai, Is Ke Ilaawa Imam Ahmad Aur Bukhari Ne At-Tarikh Al-Saghir Me Aur Aboo Ya’la Ne Riwaayat Kiya Hai.

📕 Reference-
[Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 03/161, Raqm-12670,

Aboo Dawud Fi As-Sunan, 04/281, Raqm-4923,

Bukhari Fi At-Tarikh Al-Saghir, 01/08, Raqm-15,

Abd Bin Humayd Fi Al-Musnad, 01/371, Raqm-1239,

Aboo Ya’la Fi Al-Musnad, 06/177, Raqm-3459,

Farhat-ul-Quloob Fi Mawlid-in-Nabiyy-il-Mahboob SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa-Aalihi Wa-Sallam,/55, Raqm-18.]

Ramzan ki Fazilat रमज़ान की फ़ज़ीलत

7392c60efa71039b5e9ab25e89e410c9_ramzan-ki-fazilat-1440-c-90

हज़ार गुना स़वाब :

माहे रमज़ानुल मुबारक में नेकियों का अज्र बहुत बढ़ जाता है लिहाज़ा कोशिश कर के ज्‍़यादा से ज्‍़यादा नेकियां इस माह में जमा कर लेनी चाहियें। चुनान्चे ह़ज़रते सय्यिदुना इब्राहीम नख़्इ़र् फ़रमाते हैं: माहे रमज़ान में एक दिन का रोज़ा रखना एक हज़ार दिन के रोज़ों से अफ़्ज़ल है और माहे रमज़ान में एक मरतबा तस्बीह़ करना (यानी कहना) इस माह के इ़लावा एक हज़ार मरतबा तस्बीह़ करने (यानी ) कहने से अफ़्ज़ल है और माहे रमज़ान में एक रक्अ़त पढ़ना गै़रे रमज़ान की एक हज़ार रक्अ़तों से अफ़्ज़ल है। (अद्दुर्रुल मन्स़ूर, जिल्द:1, स़-फ़ह़ा:454)

 

रमज़ान में जि़क्र की फ़ज़ीलत :

अमीरुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते सय्यिदुना उ़मर फ़ारूक़े आ’ज़म रजि से रिवायत है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: (तर्जमा) “रमज़ान में जि़क्रुल्लाह करने वाले को बख़्श दिया जाता है और इस महीने में अल्लाह तआला से मांगने वाला मह़रूम नहीं रहता।” (शुअ़बुल ईमान, जिल्द:3, स़-फ़ह़ा:311, ह़दीस़:3627)

 

 

माहे रमज़ान में मरने की फ़ज़ीलत :

जो खु़श नस़ीब मुसल्मान माहे रमज़ान में इन्तिक़ाल करता है उस को सुवालाते क़ब्र से अमान मिल जाती, अ़ज़ाबे क़ब्र से बच जाता और जन्नत का ह़क़दार क़रार पाता है। चुनान्चे ह़ज़राते मुह़द्दिस़ीने किराम का क़ौल है, “जो मो’मिन इस महीने में मरता है वो सीधा जन्नत में जाता है, गोया उस के लिये दोज़ख़ का दरवाज़ा बन्द है।” (अनीसुल वाइ़ज़ीन, स़-फ़ह़ा:25)

 

तीन3 अफ़राद के लिये जन्नत की बशारत :

ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने मस्ऊ़द रजि से रिवायत है, हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “जिस को रमज़ान के इखि़्तताम के वक़्त मौत आई वो जन्नत में दाखि़ल होगा और जिस की मौत अ़रफ़ा के दिन (यानी 9 ज़ुल हि़ज्जतुल ह़राम) के ख़त्म होते वक़्त आई वो भी जन्नत में दाखि़ल होगा और जिस की मौत स़दक़ा देने की ह़ालत में आई वो भी दाखि़ले जन्नत होगा।” (हि़ल्यतुल औलिया, जिल्द:5, स़-फ़ह़ा:26, ह़दीस़:6187)

 

कि़यामत तक के रोज़ों का स़वाब :

उम्मुल मुअ्मिनीन सय्यि-दतुना आइशा सि़द्दीक़ा रजि से रिवायत है, हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “जिस का रोज़े की ह़ालत में इन्तिक़ाल हुआ, अल्लाह उस को कि़यामत तक के रोज़ों का स़वाब अ़त़ा फ़रमाता है।” (अल फि़रदौस बिमअूसरिल खि़त़ाब, जिल्द:3, स़-फ़ह़ा:504, ह़दीस़:5557)

रोज़ादार किस क़दर नस़ीबदार है कि अगर रोज़़े की ह़ालत में मौत से हम-कनार हुआ तो कि़यामत तक के रोज़़ों के स़वाब का ह़क़दार क़रार पाएगा।

 

जन्नत के दरवाजे़ खुल जाते हैं :

ह़ज़रते सय्यिदुना अनस बिन मालिक फ़रमाते हैं कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “यह रमज़ान तुम्हारे पास आ गया है, इस में जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे़ बन्द कर दिये जाते हैं और शयात़ीन को कै़द कर दिया जाता है, मह़रूम है वो शख़्स़ जिस ने रमज़ान को पाया और उस की मगि़्फ़रत न हुई कि जब इस की रमज़ान में मगि़्फ़रत न हुई तो फिर कब होगी ?” (मज्मउज़्ज़वाइद, जिल्द:3, स़-फ़ह़ा:345, ह़दीस़:4788)

 

Ramzan me Shaitan Qaid ho jata hai रमज़ान में शैतान कैद कर दिया जाता है

माहे रमज़ान तो क्या आता है रह़मत व जन्नत के दरवाजे़ खुल जाते, दोज़ख़ को ताले पड़ जाते और शयात़ीन क़ैद कर लिये जाते हैं। चुनान्चे ह़ज़रते सय्यिदुना अबू हुरैरा रजि फ़रमाते हैं कि हुज़ूरे अकरमﷺ अपने स़ह़ाबए किराम को ख़ुश ख़बरी सुनाते हुए इर्शाद फ़रमाते हैं “रमज़ान का महीना आ गया है जो कि बहुत ही बा बरकत है। अल्लाह तआला ने इस के रोज़े तुम पर फ़र्ज़ किये हैं, इस में आस्मान के दरवाजे़ खोल दिये जाते हैं। और जहन्नम के दरवाज़े बन्द कर दिये जाते हैं। सरकश शैत़ानों को क़ैद कर लिया जाता है। इस में अल्लाह तआला की एक रात शबे क़द्र है, जो हज़ार महीनों से बढ़ कर है जो इस की भलाई से मह़रूम हुआ वोही मह़रूम है।” (सु-नने नसाई, जिल्द:4, स़-फ़ह़ा:129)

ह़ज़रते सय्यिदुना अबू हुरैरा रजि फ़रमाते हैं: हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: जब रमज़ान आता है तो आस्मान के दरवाजे़ खोल दिये जाते हैं। (स़ह़ीह़ुल बुख़ारी, जिल्द अव्वल, स़-फ़ह़ा:626, ह़दीस़:1899)

और एक रिवायत में है कि जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और दोज़ख़ के दरवाज़े बन्द कर दिये जाते हैं शयात़ीन जन्ज़ीरों में जकड़ दिये जाते हैं। एक रिवायत में है कि रह़मत के दरवाजे़ खोले जाते हैं। (स़ह़ीह़ मुस्लिम, स़-फ़ह़ा:543, ह़दीस़:1079)

 

शैत़ान क़ैद में होने के बा वुजूद गुनाह क्यूं होते हैं ? :

ह़ज़रते मुफ़्ती अह़मद यार ख़ान फ़रमाते हैं: ह़क़ यह है कि माहे रमज़ान में आस्मानों के दरवाज़े भी खुलते हैं जिन से अल्लाह की ख़ास़ रहमतें ज़मीन पर उतरती हैं और जन्नतों के दरवाज़े भी जिस की वजह से जन्नत वाले हू़रो गि़ल्मान को ख़बर हो जाती है कि दुनिया में रमज़ान आ गया और वो रोज़ा दारों के लिये दुआओं में मश्ग़ूल हो जाते हैं।

माहे रमज़ान में वाक़ेई दोज़ख़ के दरवाजे़ ही बन्द हो जाते हैं जिस की वजह से इस महीने में गुनहगारों बल्कि काफि़रों की क़ब्रों पर भी दोज़ख़ की गरमी नहीं पहुंचती। वो जो मुसल्मानों में मश्हूर है कि रमज़ान में अ़ज़ाबे क़ब्र नहीं होता इस का येही मत़लब है और ह़क़ीक़त में इब्लीस मअ़ अपनी जु़िर्रय्यतों (यानी औलाद) के क़ैद कर दिया जाता है। इस महीने में जो कोई भी गुनाह करता है वो अपने नफ़्से अम्मारा की शरारत से करता है न शैत़ान के बहकाने से। (मिआर्तुल मनाजीह़, जिल्द:3, स़-फ़ह़ा:133)

 

गुनाहों में कमी तो आ ही जाती है :

रमज़ानुल मुबारक में हमारी मसाजिद ग़ैरे रमज़ान के मुक़ाबले में ज्‍़यादा आबाद हो जाती हैं। नेकियां करने में आसानियां रहती हैं और इतना ज़रूर है कि माहे रमज़ान में गुनाहों का सिल्सिला कुछ न कुछ कम हो जाता है।

d7f1819c581b41114b81ef25468b6e21_shaitan-qaid-1440-c-90

Volcano

Earthquakes or tremors precede eruptions. volcano1

Seismic activity (earthquakes and tremors) always occurs as volcanoes awaken and prepare to erupt and are a very important link to eruptions. Some volcanoes normally have continuing low-level seismic activity, but an increase may signal a greater likelihood of an eruption. The types of earthquakes that occur and where they start and end are also key signs.
 Wikipedia, Prediction of volcanic activity, 2018

Earthquakes and tremors always precede volcanic eruptions. However 1400 years ago this was portrayed in the Quran.

[Quran 99.1-2] If the earth is shaken with its quake. If the earth brings out its loads.

Earth brings out its loads by volcanic eruptions. In the Quran earthquakes precede volcanic eruptions.