Hazrat Muhammad al Asghar saani R.A

हज़रत सैय्यदना मोहम्मद अल असग़र सानी रहमतउल्लाह अलैहआपकी विलादत मुबारक मदीना मुनव्वरा मे ही हुई और आपका नाम मोहम्मद, लक़ब असग़र सानी पड़ा, आपके ही वजह से आपके वालिद हज़रत अबु मोहम्मद अब्दुल्लाह अल अशतर की कुन्नियत अबु मोहम्मद पड़ी, शुरु मे आपकी तालीम व तरबियत आपके वालिद मोहतरम हज़रत सैय्यदना अब्दुल्लाह अल अशतर रहमतउल्लाह अलैह के ज़ेरे साया हुई और आपके विसाल के बाद राजा सिंध ने आपकी परवरिश फ़रमाई!

आपके वालिदे मोहतरम हज़रत सैय्यदना अबदुल्लाह अल अशतर रहमतउल्लाह अलैह ने जब मदीना मुनव्वरा से सिंध कूच किया तो उनके साथ आप भी मौजूद थे! हज़रत अब्दुल्लाह शाह अल अशतर उर्फ़ अब्दुल्लाह शाह ग़ाज़ी रहमतउल्लाह अलैह की शहादत के बाद अब्बासी गवर्नर सफ़ीह बिन अमरू ने आपको भी क़त्ल करना चाहा लेकिन राजा सिंध ने आपको छुपा दिया और सफ़ीह बिन अमरू इस मंसूबे मे कामियाब न हो पाया, बाद मे मंसूर के हुक्म से सफ़ीह बिन अमरु ने राजा से जंग करने के लिये उस पर चढ़ाई कर दी जिसमे राजा ने शिकस्त खाया और उसके मुल्क पर सफ़ीह बिन अमरु काबिज़ हुआ और राजा और उसके हरमों को जिनमे उसकी बेटी जो हज़रत सैय्यदना अब्दुल्लाह शाह ग़ाज़ी के ज़ौजियत मे थीं और हज़रत अब्दुल्लाह शाह ग़ाज़ी के बेटों को जिनमे हज़रत मोहम्मद असग़र सानी रहमतउल्लाह अलैह भी थे मंसूर के पास बग़दाद रवाना कर दिया! मंसूर ने हज़रत अब्दुल्लाह शाह ग़ाज़ी रहमतउल्लाह अलैह के कुनबे को उनके ख़ानदान वालों के पास मदीना मुनव्वरा रवाना कर दिया जहाँ कुछ दिन क़याम के बाद ख़ानवादा-ए-इमाम सैय्यदना ज़िउन्नफ़्स अज़ ज़की रज़िअल्लाह तआला अन्हु कूफ़ा मुन्तक़िल होगया! हज़रत सैय्यदना मोहम्मद असग़र सानी रहमतउल्लाह अलैह ताहयात इबादत इलाही मे मसरूफ़ रहें और पैग़ामे हुसैनी जारी और सारी रखा! आपका विसाल कूफ़ा मे हुआ और आपको मदीना मुनव्वरा मे जन्नतुल बक़िया मे सुपुर्द ख़ाक किया गया!

हज़रत सैय्यदना मोहम्मद अल असग़र सानी रहमतउल्लाह अलैह की शादी आपके ताया के बेटी से हुई जिनके बत्न से आप के पाँच फ़रज़न्द हुए-(1) हज़रत सैय्यदना हसन अल जव्वाद (2) हज़रत सैय्यदना मोहम्मद (3) हज़रत सैय्यदना अली (4) हज़रत सैय्यदना इब्राहीम और (5) हज़रत सैय्यदना ताहिर! लेकिन तमाम मोअर्रख़ीन का मानना है कि हज़रत मोहम्मद अल असग़र सानी रहमतउल्लाह अलैह की नस्ल पाक सिर्फ़ हज़रत सैय्यदना हसन अल जव्वाद से चली!

(Ba hawala Tareekh e Sindh by Allama Syed Sulemaan Nadvi r.a)

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