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कर्बला के 27वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने उमेर-अल-कलबी

कर्बला के 27वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने उमेर-अल-कलबी

आपका नाम अब्दुल्लाह इब्ने उमैर इब्ने अब्दे कैंस इब्ने अलीम इब्ने जनाबे कलबी अलीमी था। आप कबीला-ए-अलीम के चशमो चराग थे। आप पहलवान और निहायत बहादुर थे। कूफ़े के मोहल्ले हमदान में करीब चाह जहद मकान बनाया था और उसी में रहते थे। मुकामे नखीला में लश्कर को जमा होते देखकर लोगो से पूछा लश्कर क्यो जमा हो रहा है? कहा गया हुसैन इब्ने अली अ० से लड़ने के लिये। ये सुन कर आप घनराये और बीवी से कहने लगे कि अरसा-ए -दराज़ से मुझे तमन्ना थी कि कुफ़्फ़ार से लड़कर जन्नत हासिल करूँ। लो आज मौका मिल गया है। हमारे लिये यही बेहतर है कि यहा से निकल चलें और इमाम हुसैन की हिमायत में लड़ कर शरफे शहादत से मुर्रफ हों और बेहिसाब जन्नत में चले जायें बीवी ने ताईद की और साथ ही साथ हमराह जाने की दरख्वास्त भी पेश कर दी। अब्दुल्लाह ने मन्जूर किया और दोनो रात को छिप कर इमाम हुसैन की ख़िदमत में जा पहुँचे और सुबहे आशूर जंगे मगलूबा में जख्मी होकर शहीद हो गये।

अल्लामा समावी लिखते हैं कि उस अज़ीम जंग में जब जनाबे अब्दुल्लाह की बीवी ने अपने चाँद को लिथड़ा हुआ देखा तो दौड़ कर मैदान में जा पहुँची और उन के चेहरे से खून व ख़ाक साफ करने लगीं। इसी दौरान में शिर्मे मलऊन के गुलाम ? रूस्तम लई ने उस मोमिना के सर पर गुर्ज़ मार कर उसे भी शहीद कर दिया।

कर्बला के 28वें शहीद हज़रते मुस्लिम इब्ने कसीर अल-अज़दी

कर्बला के 28वें शहीद हज़रते मुस्लिम इब्ने कसीर अल-अज़दी

आप कूफ़े के रहने वाले थे। आप का शुमार ताबेईन में था। आप असहाबे अमीरूल मोमिनीन में भी होने का शरफ रखते थे। आप का पूरा नाम मुस्लिम इब्ने कसीर अल-अरज अल-अज़दी अल-कूफी था। आप अमीरूल मोमिनीन के हमराह किसी जंग में ज़ख्मी हो कर लंग करने लगे थे इसी वजह से आप को “एअराज” कहा जाता था।

आप इमाम हुसैन के करबला पहुँचने से ब्ल उन के हमराह किसी मुकाम पर हो गये थे। फिर साथ ही रहे और सुबहे आशूरा शहीद हो गये थे। कुछ मुअर्ररखीन ने लिखा है कि नमाज़े ज़ोहर के बाद आप के गुलाम राऊ इब्ने अब्दुल्लाह भी शहीद हुऐ।

कर्बला के 29वें शहीद हज़रते ज़ोहेर इब्ने सलीम अल-अज़दी

कर्बला के 29वें शहीद हज़रते ज़ोहेर इब्ने सलीम अल-अज़दी

आप क़बीला-ऐ-अज़्द के एक नुमायाँ शख़्स थे उमर इब्ने साद के साथ करबला पहुँचे नौ की सुबह को

जब आप ने यकीन कर लिया कि सुलह नही होगी तो शबे आशूरा इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में हाज़िर हो कर सुबहे आशूर जंगे मगलूबा में शहीद हो गये।

कर्बला के 30वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने यज़ीद अल-अबदी

कर्बला के 30वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने यज़ीद अल-अबदी

आप अपनी कौम के सरदार थे और दोस्तदारे आले मोहम्मद थे। मनक़ज़ अबदी की बेटी मारिया के घर जो इमाम हुसैन की हिमायत में सलाह व मशवरा होता था उस में ये भी शिरकत करते थे। आप गैर न मारूफ रास्तो से गुज़र कर इमाम हुसैन की ख़िदमत थ में मक्का-ए-मोअज़्ज़मा पहुँचे एक मकाम पर क्याम कर छ के इमाम हुसैन से मिलने गये। हज़रत इमाम हुसैन अलै० के लिये तशरीफ ले गये। आख़िर कार ये लोग जल्दी वापस गये और हज़रत से अपने मकान पर मिलें आप मक्के से इमाम हुसैन अलै० के हमरकाब रहे और सुबहे आशूर करबला में शहीद हो गये।

बाज मोअर्ररखीन का बयान है कि आप के भाई अबीदुल्लाह और वालिदे माजिद यज़ीद इब्ने सबीत भी मक्के में इमाम हुसैन के हमराह हुये थे। हमला-ऐ-अव्वल में और बाद नमाज़ की जंग में वालिदे माजिद ने शहादत पाई है।

कर्बला के 31वें शहीद हज़रते बशीर इब्ने उमर-अल-कन्दी

कर्बला के 31वें शहीद हज़रते बशीर इब्ने उमर-अल-कन्दी

आप का पूरा नाम बशीर इब्ने उमर इब्ने अहदोस अल-हज़रमी अलं-कन्दी था। आप हज़रमौत के रहने वाले थे और आप का शुमार कबीला-ऐ-कुन्दा में होता था। आप ताबई और बड़ी फ्ज़ीलतों के मालिक थे। आप का और आपके लड़को का ज़िक्र अक्सर तारीख़ी जंगों में आता है। आप करबला में इमाम हुसैन की ख़िदमत में हाज़िर हुऐ थे। आप के हमराह आप के एक लड़के मोहम्मद नामी थे। सुबहे आशूर आगाज ही पर आपको इत्तेला मिली कि आप के एक लड़के उमर नामी हुकूमते रै की सरहद पर गिरफ़्तार हो गये हैं आप ने जब ये सुना तो कहा। खुदाया ! मैं अपने लड़के को तुझसे लूँगा ये मुझको गवारा नहीं हो सकता कि मैं ज़िन्दा रहूँ और मेरा लड़का गिरफ़्तार रहे।

हज़रत इमाम हुसैन अ० ने उनका ये कलाम सुन लिया फ्रमाया ऐ बशर ! मैं तुम्हे इजाज़त देता हूँ कि तुम जाकर अपने लड़के को रिहा कराओ। बशर ने जवाब दिया, “आका-ओ-मौला ! मुझे शेर और भेड़िये खा लें अगर में आपको इन दुश्मनों में छोड़कर चला जाऊँ।” हज़रत ने फ्रमाया, “अच्छा पाँच बरदे यमानी जिन की कीमत एक हज़ार अशरफी है अपने बेटे मोहम्मद को दे कर यहाँ से रवाना कर दो आपने इस के बाद पाँचों यमनी चादरे उनको अता फरमाई मुर्भरखीन का इस पर इत्तेफाक है यौमे आशूरा हमला-ए-अव्वल आप ने भी शहादत पाई।