मुहिब्बाने अहले बैत जन्नती हैं

तमाम मुहिब्बाने अहले बैत जन्नती हैं :-

अल्लाह तआला और उसके महबूब हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने हम तमाम मुसलमानों को अहले बैत अतहार की मुहब्बत व इताअत पर मुतडूयन फ्रमां दिया सरवरे कायनात सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की सुन्नतों व सूरतो सीरत का मुकम्मल व आला और बेहतरीन नमूना अहले बैत अतहार हैं हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की सुन्नतों व सीरत का चमकता हुआ नूरानी माहताब अहले बैत अतहार हैं इसलिये हमें चाहिये कि इस माहताब की नूरानी किरन से अपने दिलों को अहले बैत की इन्तिहाई मुहब्बत व अकीदत से मुनव्वर करें ताकि हमें अल्लाह व रसूल की कुर्बत नसीब हो और अल्लाह तआला कयामत के दिन हमें अपने मुर्काब व मख़सूस बन्दों की फेहरिस्त में जगह अता फरमाये ।

हज़रत मौला अली करमल्लाहु वजहुल करीम से रिवायत है कि सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने हसनैन करीमैन का हाथ पकड़कर फरमाया जो कोई मुझसे और इन दोनों (इमाम हसन व इमाम हुसैन) से और इनके माँ बाप (सइयदा फातिमा व हज़रत मौला अली) से मुहब्बत करेगा वो रोज़े कयामत मेरे साथ मेरे दर्जे में होगा (यानी मेरे ही ठिकाने पर होगा) (तिर्मिज़ी-2/717) (मुस्नद अहमद-1/77) (मुअजम कबीर- तबरानी-3/50)

हर इबादत मेहनत व मशक्कत पर मुश्तमिल होती है लेकिन अल्लाह व रसूल और अहले बैत की दिलों में मुहब्बत बिला मेहनतो मशक्कत के हासिल होती है सिर्फ हुस्ने अकीदा होना लाज़िमी है और इस मुहब्बत की जज़ा और इनाम जैसा कि मज़कूरा हदीस पाक में है यानी क्यामत के दिन हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की नज़दीकी और उनका साथ बाइसे निजात और कुरबते इलाही है यानी अमल थोड़ा और अज्र बे शुमार है।

हज़रत अब्दुल्ला बिन अब्बास (रजिअल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया- मैं दरख़्त हूँ फातिमा उसकी टहनी है और अली उसका शगूफा है और हसन व हुसैन उसके फल हैं और अहले बैत से मुहब्बत करने वाले उसके पत्ते हैं और ये सब जन्नत में होंगे ये हक है ये हक है। (यह जुमला दो बार फ़रमाया) (अल फिरदौस-1/52)



अहले बैत से मुहब्बत दरअस्ल हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम से निसबती तआल्लुक की बुनियाद है और मुहिब्बाने अहले बैत के लिये ये बड़े फख़र का मक़ाम है कि अहले बैत की मुहब्बत के सबब मुहिब्बाने अहले बैत की हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम से बातिनी वाबस्तगी उनका मुकद्दर बन जाती है जो उन्हें जन्नत के आला दरजात से सरफराज़ करती है और अज़ाबे नार से महफूज़ रखती है और बाद मौत तमाम पुर ख़ौफ़ मकामात पर मुहब्बते अहले बैत उनके लिये फायदेमंद और मददगार होगी जैसा कि फ़रमाने रसूल सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम है-

हज़रत इब्ने मसऊद (रजिअल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया- मेरे अहले बैत की मुहब्बत सात पुर ख़ौफ़ मकामात पर नफा (फायदा) पहुँचायेगी, 1- मौत के वक़्त 2- कब्र में 3-कब्र से उठने के वक़्त 4- नामे आमाल हाथ में दिये जाने के वक़्त 5- हिसाब कि वक़्त 6- मीज़ान पर 7-पुलसिरात के वक़्त (हुब्बे अहले बैत और ताज़ियादारी-12)

वज़ाहतः-

1-मौत के वक़्तः- जिस वक़्त गुनाहगार बन्दे की रूह
कब्ज़ की जाती है तो फरिश्ते उसे हथोड़े से मारते हैं और उसकी रूह निहायत सख़्त तकलीफ के साथ जिस्म से खींची जाती है रूह कब्ज़ होने वक़्त उसे इतनी सख़्त और दर्दनाक तकलीफ होती है कि जितनी तलवार कि वार और कैंची के काटने पर भी नहीं होती तो मौत के वक़्त जब रूह खींची जायेगी उस वक़्त अहले बैत की मुहब्बत हमारे काम आयेगी और हमें फायदा पहुँचायेगी और मौत के वक़्त वाकैअ होने वाली तमाम तकालीफ से निजात देगी और हमारी रूह बिला तकलीफ आसानी से कब्ज़ की जायेगी ।

2-कब्र मेंः- मइयत को दफन करने के बाद जब उस
पर उसके गुनाहों के सबब अज़ाब मुसल्लत किया जाता है और उसके जिस्म को कीड़े मकोड़े, साँप और बिच्छू काटते नौचते और खाते हैं और उसको आग का अज़ाब और दीगर मुख्तलिफ अज़ाब उस पर मुसल्लत किये जाते हैं उस वक़्त अहले बैत की मुहब्बत मुहिब्बाने अहले बैत के काम आयेगी और नफा (फायदा) देगी और अज़ाब से निजात व राहत देगी

3-कब्र से उठने के वक़्तः- रोज़े क्यामत जब सूर

फूँका जायेगा तो लोग अपनी-अपनी कब्रों से नंगे पाँव नंगे जिस्म उठेंगे और उनके दिल इतने ख़ौफ़ ज़दा होंगे कि शर्मगााहें खुली होने के बावजूद लोग कयामत की हौलनाकियों और सख्त मसाइबो आलाम के सबब एक दूसरे को देखने से बे नियाज़ रहेंगे उस वक़्त अहले बैत की मुहब्बत मददगार व नफा बख़्श होगी ।

4-नामे आमाल मिलने के वक्तः- यानी कयामत के

दिन जिसको उसका नामे आमाल दाहिने हाथ में दिया जायेगा वो खुशी-खुशी पलटेगा और जिसको उसका नामे आमाल बाँये हाथ में दिया जायेगा उसके लिये हलाकत होगी वो वक़्त बड़ा ही हौलनाक होगा उस वक़्त अहले बैत की मुहब्बत मददगार व फायदे मंद साबित होगी ।

5-हिसाब के वक़्तः- यानी अल्लाह तआला बन्दे से

जब हर चीज़ के मुताअल्लिक हिसाब लेगा और इन्सान अपने रब के सामने ख़ौफ़ ज़दा खड़ा होगा और उसके तमाम आज़ा (अंग) ख़ौफ़ व डर के बाइस काँप रहे होंगे उस वक़्त अहले बैत की मुहब्बत काम आयेगी और अल्लाह तआला की रहमत उसकी निजात का बाइस बनेगी ।

6-मीज़ान के वक़्तः- रोज़े क्यामत जब इन्सान के

आमाल तौले जायेंगे और मीज़ान (तराजू) कायम किया जायेगा और इन्सान के गुनाह और नेकियाँ एक-एक पलड़े में रख दी जायेंगी वो वक़्त निहायत ख़ौफ़ व दिल दहलाने वाला होगा और उसकी निगाहें टकटकी बाँधे तराजू पर लगी होंगी कि कहीं हमारी नेकियाँगुनाहों के मुकाबिले कम न पड़ जायें उस वक़्त अहले बैत की मुहब्बत फायदेमंद व मददगार होगी।

7-पुलसिरात के वक़्तः- पुलसिरात जो बाल से ज़्यादा

बारीक और तलवार से ज़्यादा तेज़ होगी जो जहन्नुम के ऊपर बिछी होगी इसके नीचे जहन्नुम जो शोले मारती हुई दहक रही होगी और इस पर से हर एक को गुज़रना होगा और कुछ लोग फिसल-फिसल कर जहन्नुम में गिर रहे होंगे उस वक़्त अहले बैत की मुहब्बत मुहिब्बाने अहले बैत की मददगार होगी और तमाम मुहिब्बाने अहले बैत पुल सिरात से बा आसानी और बिला तकलीफो परेशानी तेज़ी से गुज़र जायेंगे।

मज़कूरा तमाम हौलनाक व ख़ौफ़नाक और दिल दहलाने वाले मकामात पर अहले बैत की मुहब्बत मुहिब्बाने अहले बैत के काम आयेगी और मददगार व नफा बख़्श होगी अहले बैत की मुहब्बत अज़ाबे इलाही से महफूज़ रहने और अल्लाह तआला की रहमत व रज़ा और खुशनूदी हासिल करने और दोज़ख से आजादी का आसान व बेहतरीन ज़रिया है



हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रजिअल्लाहु तआला अन्हु) बयान करते हैं कि सरवरे कायनात सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया कि मैं इल्म का तराजू हूँ अली उसका पलड़ा है हसन व हुसैन उसकी रस्सियाँ हैं फातिमा उसका दस्ता है और मेरे बाद आइम्मा अत्हार (उस तराजू की) उमूदी सलाख हैं जिसके ज़रिये हमारे साथ मुहब्बत करने वालों और बुग्ज़ रखने वालों के आमाल तौले जायेंगे।
(अल फिरदौस-1/44 ह०-107)



सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फ़रमाया- आले रसूल की माअरफ्त दोज़ख से निजात है आले रसूल की मुहब्बत पुलसिरात पर गुज़रने में आसानी है और आले रसूल की विलायत का इकार अज़ाबे इलाही से हिफाज़त है।
(अलशिफा-2/54)



योमे क़यामत मैदाने महशर में चीखो पुकार का आलम होगा और लोग निहायत खौफ व सख्त परेशानियों व तकलीफों से घिरे होंगे कुछ लोग अज़ाब में मुब्तिला होंगे और कुछ हिसाबो किताब से गुज़र रहे होंगे और कुछ की जुबाने भूक व प्यास की शिद्दत के बाइस बाहर को खिंच रहीं होंगी और निहायत सख़्त गर्मी की शिद्दत के बाइस लोगों के दिमाग़ खौलते होंगे और पसीने ने उनके जिस्मों को लगाम डाल रखी होगी लोग क्यामत की हौलनाकियों व मुसीबतो तकालीफ में गिरफ़्तार काँप रहे होंगे लोगों की योमे कयामत होगी और मुहिब्बाने अहले बैत के लिये योमे ज़ियाफत होगी अल्लाह तआला जन्नत के दस्तरख़्वान पर मुहिब्बाने अहले बैत को दावत खिलायेगा जैसा कि फ़रमाने रसूल

सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम है-
हज़रत मौला अली करमल्लाहु वजहुल करीम से रिवायत है नबी करीम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया-जो मुझसे और अली, फातिमा, हसन व हुसैन (अलैहिमुस्सलाम) से मुहब्बत करते हैं वो कयामत के दिन एक ही मुकाम पर जमा होंगे और हमारा खाना पीना भी इकट्ठा होगा। (मुअजम कबीर तबरानी-3/41) (तारीख दमिश्क-13/227)
(मजमउज़्ज़वाइद-9/174)



कोई भी शख़्स सिर्फ अपने नेक आमाल के बाइस जन्नत को नहीं पा सकता चाहे उसके पास समुन्दर और पहाड़ों के बराबर नेक आमाल हों जब तक कि अल्लाह तआला की रहमत उसे ढाँप न ले हदीस पाक में वारिद है कि रोज़े कयामत इन्सान के आमाल के तीन दफ़्तर (रजिस्टर) होंगे एक उसकी नेकियों का दफ़्तर होगा दूसरा उसके गुनाह व बुराइयों का और तीसरा अल्लाह तआला की नेअमतों का दफ़्तर होगा और जब कोई नेकी लायी जायेगी तो उसके मुकाबले नेअमत रख दी जायेगी हत्ता कि नेकियाँ नेअमतों में ख़त्म हो जायेंगी सिर्फ गुनाह और बुराइयाँ बाकी रह जायेंगी फिर अल्लाह तआला को उन पर इख़्तियार है।



चाहे तो अपनी रहमत से बख़्श दे या सज़ा दे और अल्लाह तआला की रहमत उसकी मुहब्बत के बगैर हासिल नहीं होती और अल्लाह तआला की मुहब्बत हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की मुहब्बत के बगैर हासिल नहीं होती और हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की मुहब्बत अहले बैत की मुहब्बत के बगैर हासिल नहीं होती हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम व अहले बैत अतहार के सदके व वसीले से ही हर शख़्स को जन्नत मिलेगी तो जो शख्स जन्नत और उसकी दायमी नेअमतों का तालिब व ख़्वाहिश मन्द हो उसे चाहिये कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम और अहले बैत अतहार की मुहब्बत को लाज़िम पकड़ ले क्योंकि तमाम मुहिब्बाने अहले बैत वारिसे जन्नत हैं।

नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फ़रमाया- अहले बैत की मुहब्बत को लाज़िम पकड़ो तो बेशक जो शख़्स इस हाल में अल्लाह तआला से मिलाकि वो मेरे अहले बैत को महबूब रखता था और मेरे अहले बैत से मुहब्बत करता था तो वो हमारी शफाअत के वसीले से जन्नत में दाखिल होगा उस ज़ात की कसम जिसके कब्ज़े कुदरत में मेरी जान है किसी शख़्स को उसका अमल हमारे हक की माअरफ्त हासिल किये बगैर फायदा नहीं देगा । (मुअजम औसत
तबरानी-2/360) (मजमउज़्ज़वाइद-9/172)


हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर रजिअल्लाहु तआला अन्हुम से रिवायत है रहमते दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने आखिरी चीज़ जो इरशाद फरमाई वो ये है कि मुझे मेरे अहले बैत में तलाश करो।
(मुअजम औसत- तबरानी-4/173)



हज़रत अबू मसऊद अन्सारी रज़िअल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है सरवरे कायनात सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया-जिसने नमाज़ पढ़ी और मुझ पर और मेरी आल पर दुरूद न पढ़ा उसकी नमाज़ कुबूल न होगी। (बैहकी-सुनन कुबरा-2/530)



हज़रत मौला अली शेरे खुदा करमल्लाहु वजहुल करीम फ़रमाते हैं कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने मुझे बताया कि मेरे साथ सबसे पहले जन्नत में दाखिल होने वाले मैं (हज़रत अली) सइयदा फातिमा ज़हरा, हसन व हुसैन (अलैहिमुस्सलाम) हैं मैने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह हमसे मुहब्बत करने वाले कहाँ होंगे आप सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फ़रमाया तुम्हारे पीछे होंगे। (मुस्तदरक हाकिम-3/164)
(तारीख दमिश्क-14/173)

हज़रत मौला अली करमल्लाहु वजहुल करीम से रिवायत है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया-सबसे पहले हौज़े कौसर पर मुझसे मेरे अहले बैत मिलेंगे। (कंजुल उम्माल-12/100)

हज़रत मौला अली मुर्तज़ा करमल्लाहु वजहुल करीम से रिवायत है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने खातूने जन्नत सइयदा फातिमा से फ़रमाया (ऐ फातिमा) मैं और तू और ये दोनो (हसनैन करीमैन) और अली (अलैहिमुस्सलाम) रोज़े क़यामत एक ही जगह पर होंगे। (मजमउज़्ज़वाइद-9-169,180) (मुस्नद अहमद-1/101, 2/692)



सरवरे कायनात सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने हज़रत मौला अली से फरमाया-
ऐ अली तू और तेरे मददगार (रोज़े क्यामत) मेरे पास हौज़े कौसर पर चेहरे की शादाबी और सैराब होकर आयेंगे और उनके चेहरे (नूर की वजह से) सफेद होंगे और बेशक तेरे दुश्मन (रोज़े कयामत) मेरे पास हौज़े कौसर पर बदनुमा चेहरों के साथ सख़्त प्यास की हालत में आयेंगे। (मुअजम कबीर- तबरानी-1/319) (मजमउज़्ज़वाइद-9/131)

हज़रत अब्दुल्ला बिन मसऊद से रिवायत है नबी करीम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया-मेरे अहले बैत की एक दिन की मुहब्बत एक साल की इबादत से बेहतर है और जो इसी मुहब्बत पर फौत हुआ वो जन्नत में दाखिल हो गया। (मुस्नद अल फिरदौस-2/142)



हज़रत मौला अली (रजिअल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है कि सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया कि चार शख़्स ऐसे हैं कि कयामत के रोज़ जिनके लिये मैं शफाअत करने वाला होऊँगा (और वो ये हैं) मेरी औलाद की इज़्ज़त व तकरीम करने वाला और उनकी हाजात को पूरा करने वाला और उनके मुआमलात के लिये तग व दू (दौड़ धूप) करने वाला और दिल व जान से उनसे मुहब्बत करने वाला। (कंजुल उम्माल-12/100 ह०-34180)

हज़रत अबू हुरैरा (रजिअल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है कि सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया तुम में से बेहतरीन वो है जो मेरे बाद मेरे अहले बैत के लिये बेहतरीन है।
(मुस्तदरक हाकिम-3/352) (मजमउज़्ज़वाइद-9/174)
(अल फ़िदौस-2/170)
(तारीख बगदाद-7/276)

हज़रत अबू राऊ बयान करते हैं कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने हज़रत अली से फ़रमाया बेशक जो पहले चार शख़्स जन्नत में दाखिल होंगे वो मैं, (हुजूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम) और तुम (हज़रत अली) और हसन व हुसैन (रज़िअल्लाहु तआला अन्हुम) होंगे और हमारी औलाद हमारे पीछे होगी और हमारी बीवियाँ हमारी औलाद के पीछे होंगी और हमारे चाहने वाले हमारे दाँये और वाँये जानिब होंगे। (मुअजम कबीर- तबरानी-1/319)
(मजमउज़्ज़वाइद-9/131)

हज़रत मौला अली (रजिअल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है कि सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया कि चार शख़्स ऐसे हैं कि कयामत के रोज़ जिनके लिये मैं शफाअत करने वाला होऊँगा (और वो ये हैं) मेरी औलाद की इज़्ज़त व तकरीम करने वाला और उनकी हाजात को पूरा करने वाला और उनके मुआमलात के लिये तग व दू (दौड़ धूप) करने वाला और दिल व जान से उनसे मुहब्बत करने वाला। (कंजुल उम्माल-12/100 ह०-34180)

Leave a Reply