ALLAH HAS PROTECTED HIMSALLALLAHU ‘ALAYHI WA-AALIHI WA-SALLAM FROM (HOSTILE) PEOPLE.

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According to Aysha :
“The beloved Prophet was guarded by security until
this verse was revealed, {And Allah will (Himself) protect your
(life) from the (hostile) people. [al-Maydah-67]}. So, Allah’s
Messenger took his head out of the tent and said: ‘O people
go back, indeed Allah 9 will protect me.’”
Reported by al-Tirmidhi, al-Hakim, al-Bayhaqi. Hakim said;
‘this is a tradition with authentic chain of transmission.’ Al-Asqalani
said; ‘The chain of transmission is fine.’
وآلو وسلم وَجْهَوُ بَػيْنَ ااَظْهُرِکُمْ؟ قَالَ : فَقِيْلَ: نَػعَمْ، فَػقَالَ : وَالالَّ تِ وَالْعُزَّی، لَئِنْ رَااَیػْتُوُ یَػفْعَلُ . عَنْ ااَبِي ىُرَیػْرَةَ رضی اهلل عنو قَالَ : قَالَ ااَبُػوْ جَهْلٍ : ىَلْ یُػعَفّْرُ مُحَمَّدٌ صلی اهلل عليو ۵۲ / ۲
هللِ صلی اهلل عليو لَی رَقَػبَتِوِ، ااَوْ الَاُعَفّْرَنَّ وَجْهَوُ فِي التػُّرَابِ ، قَالَ : فَااَتَی رَسُوْلَ ذَلِکَ الَاَطَااَنَّ عَ | صلى الله عليه وسلم
سَائِيُّ وَأَحْمَدُ وَابْنُ حِ بَّانَ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ وَالنَّ عُضْوًا. صلی اهلل عليو وآلو وسلم: لَوْ دَنَا مِنّْي الَ خْتَطَفَتْوُ الْمَػالَ ئِکَةُ عُضْوًا هللِ وَااَجْنِحَةً، فَػقَالَ رَسُوْلُ یْوِ، قَالَ : فَقِيْلَ لَوُ: مَا لَکَ؟ فَػقَالَ : إِنَّ بَػيْنِي وَبَػيػْنَوُ لَخَنْدَقًا مِنْ نَارٍ وَىَوْالً عَقِبػَيْوِ وَیَػتَّقِي بِيَدَ وآلو وسلم. وَىُوَ یُصَلّْي. زَعَمَ لِيَطَااَ عَلَی رَقَػبَتِوِ، قَالَ : فَمَا فَجِ ئػَهُمْ مِنْوُ إِالَّ وَىُوَ یَػنْکُصُ عَلَی

Set forth by al-Tirmidhi in al-Sunan, 5/251, $ 3046. al-Hakim in al￾Mustadrak, 2/342, $ 3221. al-Bayhaqi in al-Sunan al-Kubra, 9/8, $ 17508. al￾Lalaka’i in I’tiqad Ahl al-Sunna, 4/762, $ 1417. Abu Nu’ymin Hulliyat al￾Awliya6/206. al-Asqalani in Fath al-Bari, 6/82.

 According to Abu Hurayra :
“Abu Jahi said: ‘Does Muhammad put his face on the
ground (i.e., prostrate) among you?’ He was said: ‘Yes.’ He said:
‘By a1-Lât and a1-‘Uzza [names of idols], if I see him doing that, I
will stomp on his neck or smear his face with dust.’ He came to
the Messenger of Allah while he was praying, and he wanted
to stomp on his neck, but suddenly they saw him turning upon his
heels, trying to shield himself with his hands. It was said to him:
‘What is the matter with you?’ He said: ‘Between him and I there
is a ditch filled with fire, and wings.’ “The Messenger of Allah
said: ‘If he had come near me, the angels would have torn his
limbs.’”
Reported by al-Muslim, al-Nasai, Ahmad, Ibn Hibban.

Set forth by al-Muslim in al-Sahih, 4/2154, $ 2797. al-Nasa’i in al-Sunan
al-Kubra, 6/518, $ 11683. Ahmed b. Hanbal in al-Musnad ,2/370, $ 8817. Ibn
Hibban in al-Sahih, 14/532, 533, $ 6571. Abu Ya’la in al-Musnad, 11/70, $
6207

Hadith:Doghlapan

Hazrat Ammar Ibn Yasir RadiAllahu Anhu se riwayat hai ki Nabi e Akram SallAllahu Aalihi wa Alaihi wa Sallam ne farmaya Jo duniya mein do(2) muh rakhe (yani jisme doghlapan ho) toh Qayamat ke Roz uske muh mein do(2) Aag ki Zubane hungi”

Abu Dawood, As-Sunan – 4873, Ibne Hibban, As-Sahih – 5756, Daarmi, As-Sunan – 2764, Ibne Abi Shaiba’h, Al-Musannaf – 25463, Baheqi, As-Sunan ul Kubra – 10/246

हज़रत इमाम जाफ़र सादिक अलैहिस्सलाम और एक दहरिया मल्लाह।



एक दहरिया मल्लाह खुदा की हस्ती के एक मुनकिर की (जो मल्लाह था) हज़रत इमाम जाफ़र सादिक रज़ियल्लाहु अन्हु से बातचीत हुई। वह मल्लाह कहता था कि ख़ुदा कोई नहीं (मआज़ल्लाह!) हज़रत इमाम जाफ़र सादिक रज़ियल्लाहु अन्हु ने उससे फ़रमाया तुम जहाज़रान (जहाज़ चलाने वाले) हो तो यह बताओ कभी समुंद्री तूफान से भी तुम्हारा सामना पड़ा? वह बोला हां! मुझे अच्छी तरह याद है कि एक मर्तबा समुंद्र के सख्त तूफ़ान में मेरा जहाज़ फंस गया था । हज़रत इमाम ने फ़रमाया फिर क्या हुआ? वह बोला मेरा जहाज़ गर्क हो गया और सब लोग जो उस पर सवार थे डूबकर हलाक हो गए। आपने पूछातुम कैसे बच गए? वह बोलाः मेरे हाथ जहाज़ का एक तख़्ता आ गया मैं उसी के सहारे तैरता हुआ साहिल के कुछ करीब पहुंच गया। मगर अभी साहिल

सच्ची हिकायात हिस्साअव्वल कर दी । हाथ पैर मारकर इमाम जाफर सादिक रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाने लगे लो! अब सुनोः

अपने जहाज़ पर सवार थे तो तुम्हें अपने जहाज़ पर एतमाद देगा । फिर वह शुरू व भरोसा था कि यह जहाज़ पार लगा डूब गया तो फिर तुम्हारा एतमाद व भरोसा उस तख्ते पर रहा जो इत्तिफाकन तुम्हारे जब हाथ

दूर ही था कि वह तख़्ता भी हाथ से छूट गया फिर मैंने खुद ही कोशिश -किसी न किसी तरह किनारे आ लगा। हज़रत

। मगर जब वह भी तुम्हारे हाथ से छूट गया तो अब सोचकर उम्मीद थी कि अब भी कोई बचाना चाहे तो मैं बच

बताओ कि इस बेसहारा वक्त और बेचारगी के आलम में भी क्यों तुम्हें यह लग गया थासकता हूं? वह बोला

हां! यह उम्मीद तो थी। हज़रत ने फ़रमाया- मगर वह उम्मीद थी किससे

कि कौन बचा सकता है? अब वह दहरिया ख़ामोश हो गया। आपने फ़रमायाखूब याद रखो! इस बेचारगी के आलम में तुम्हें जिस ज़ात पर उम्मीद थी वही खुदा है और उसी ने तुम्हें बचा लिया था। मल्लाह यह सुनकर होश
में आ गया और इस्लाम ले आया।