Imam Jafar Sadiq AlahisSalam aur Modern Science

आज हम बात करते हैं एक ऐसे वैज्ञानिक, चिन्तक, फिलोसॉफर की जो आधुनिक केमिस्ट्री के पिता जाबिर इब्ने हय्यानر (जेबर) के उस्ताद थे । जो अरबिक विज्ञान के स्वर्ण युग के आरंभकर्ता थे । जिसने विज्ञान की बहुत सी शाखाओं की बुनियाद रखी ।

जी हाँ बात हो रही इमाम जाफ़र अल सादिक़ अलैहिस्सलाम की जो हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम की चौथी पीढी में है. उनके पिता इमाम मोहम्मद बाकीर अलैहिस्सलाम (इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पोते) स्वयं एक वैज्ञानिक थे और आपने मदीने में सबसे पहली यूनिवर्सिटी बनाई थी. अपने पिता की शहादत के बाद इमाम जाफ़र अल सादिक़ अलैहिस्सलाम ने यह कार्य संभाला और अपने शिष्यों को कुछ ऐसी बातें बताईं जो इससे पहले अन्य किसी ने नहीं बताई थीं.

उन्होंने अरस्तू की चार मूल तत्वों की थ्योरी से इनकार किया और कहा कि मुझे आश्चर्य है कि अरस्तू ने कहा कि विश्व में केवल चार तत्व हैं, मिटटी, पानी, आग और हवा. मिटटी स्वयं तत्व नहीं है बल्कि इसमें बहुत सारे तत्व हैं. इसी तरह इमाम जाफ़र अल सादिक़ अलैहिस्सलाम ने पानी, आग और हवा को भी तत्व नहीं माना. हवा को भी तत्वों का मिश्रण माना और बताया कि इनमें से हर तत्व सांस के लिए ज़रूरी है.

मेडिकल साइंस में इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने बताया कि मिटटी में पाए जाने वाले सभी तत्व मानव शरीर में भी होते हैं. इनमें चार तत्व अधिक मात्रा में, आठ कम मात्रा में और आठ अन्य सूक्ष्म मात्रा में होते हैं. आधुनिक मेडिकल साइंस इसकी पुष्टि करती है.

उन्‍होंने बताया, “जो पत्थर तुम सामने गतिहीन देख रहे हो, उसके अन्दर बहुत तेज़ गतियाँ हो रही हैं.” उसके बाद कहा, “यह पत्थर बहुत पहले द्रव अवस्था में था. आज भी अगर इस पत्थर को बहुत अधिक गर्म किया जाए तो यह द्रव अवस्था में आ जायेगा.”

ऑप्टिक्स (Optics) का बुनियादी सिद्धांत ‘प्रकाश जब किसी वस्तु से परिवर्तित होकर आँख तक पहुँचता है तो वह वस्तु दिखाई देती है.’ इमाम सादिक अलैहिस्सलाम का ही बताया हुआ है.

एक बार उन्होंने अपने लेक्चर में बताया कि शक्तिशाली प्रकाश भारी वस्तुओं को भी हिला सकता है. लेजर किरणों के आविष्कार के बाद इस कथन की पुष्टि हुई.

इनका एक अन्य चमत्कारिक सिद्धांत है की हर पदार्थ का एक विपरीत पदार्थ भी ब्रह्माण्ड में मौजूद है. यह आज के मैटर-एंटी मैटर थ्योरी की झलक थी.

एक थ्योरी में इमाम ने बताया कि पृथ्वी अपने अक्ष के परितः चक्कर लगाती है. जिसकी पुष्टि बीसवीं शताब्दी में हो पाई, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ब्रह्माण्ड में कुछ भी स्थिर नहीं है. सब कुछ गतिमान है.

ब्रह्माण्ड के बारे में एक रोचक थ्योरी उन्होंने बताई कि ब्रह्माण्ड हमेशा एक जैसी अवस्था में नहीं होता. एक समयांतराल में यह फैलता है और दूसरे समयांतराल में यह सिकुड़ता है.

इनके प्रमुख शिष्यों में फाधर ऑफ केमिस्ट्री जाबिर इब्ने हय्यानر , अबू हनीफ़ा (हनफ़ी शाखा के प्रवर्त्तक) , मालिक इब्न अनस (मालिकी शाखा के प्रवर्त्तक), महान सुफ़ी ख़्वाजा बायज़ीद बुस्तामी वग़ैरह प्रमुख हैं.

यह विडंबना रही कि दुनिया ने इमाम जाफ़र अल सादिक़ अलैहिस्सलाम की खोजों को हमेशा दबाने की कोशिश की। इसके पीछे उस दौर के अरबी शासकों का काफ़ी हाथ रहा जो अपनी ईर्ष्यालू प्रवृति एवं इमाम की लोकप्रियता के कारण से उन्हें हमेशा अपना सिंहासन डोलता हुआ महसूस होता था.

इन्हीं सब वजहों से अरबी शासक ने 765 में इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम को ज़हर देकर शहीद करवा दिया

इस कम इल्म दुनिया को अपने फ़िक़्ह (islamic jurisprudence), फ़लसफ़ा (Philosophy), इल्म ए कलाम (Theology), इल्म ए रियाज़ी (Mathematics), इल्म ए हा’यत व फलक(Astronomy), इल्म ए तशरीह (Anatomy), इल्म ए कीमिया (Alchemy)…वग़ैरह दूसरे अनगिनत इल्म से रोशन करने वाले इमाम ए सादिक अलैहिस्सलाम पर हमारा लाखो सलाम हो

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मदص वा आला आले मोहम्मदص

आज के दिन यानी 22वी रजब इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम के चाहने वाले उनके वसीले से फ़ातिहा व ज़िक्र का एहतेमाम करते हैं । इमाम के सभी चाहने वालों को #कुंडे की ढ़ेरों मुबारकबाद

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