गिलोय की बेल के पत्ते खाने से शुगर का स्तर कम हो जाता है… हमारी एक हमसाई की शुगर का स्तर हमेशा 250 से ज़्यादा रहता था… वो हमारे घर से हर रोज़ गिलोय के पत्ते ले जाया करती थीं… उन्होंने लगातार तीन माह निहार मुंह गिलोय का पत्ता चबाकर पानी पी लिया… अब उनकी शुगर नियंत्रित हो गई… शुगर के अलावा बुख़ार, हड्डियों के दर्द, कैंसर, पेट और आंखों आदि की बीमारी में गिलोय बेहद फ़ायदेमंद है…
हमारे घर गिलोय की बहुत-सी बेलें हैं… बहुत लोग इसके पत्ते ले जाते हैं… गिलोय की बेल तक़रीबन हर जगह पाई जाती है… एक बार लगाने पर ये कई साल तक पत्तों से भरी रहती है… गिलोय की बेल किसी भी नर्सरी में मिल सकती है… पार्क में भी मिल सकती है… सड़क किनारे खड़े पेड़ों पर भी ये बेल ख़ूब देखी जा सकती है… हो सके, तो इसे अपने घर में ज़रूर लगाएं… इसे गमले में भी उगाया जा सकता है…
गिलोय का वैज्ञानिक नाम तिनोस्पोरा कार्डीफ़ोलिया है… इसे मधुपर्णी, अमृता, तंत्रिका, कुंडलिनी गुडूची भी कहा जाता है… फ़ारसी में इसे गिलाई कहते हैं… अंग्रेज़ी में गुलंच, मराठी में गुलबेल, कन्नड़ में अमरदवल्ली, तेलगू में गोधुची, तमिल में शिन्दिल्कोदी और गुजराती में गालो में आदि नामों से जाना जाता है… गिलोय में ग्लुकोसाइन, गिलो इन, गिलोइनिन, गिलोस्तेराल और बर्बेरिन नामक एल्केलाइड पाए जाते है… मान्यता है कि देव और दानवों के युद्ध के दौरान जहां-जहां अमृत कलश की बूंदे गिरीं, वहां-वहां गिलोय की बेल उग आई…


