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अर-रहीकुल मख़्तूम  पार्ट 74 सरीया मुहम्मद बिन मस्लमा  aur ग़ज़वा बनू लह्यान

2 सरीया मुहम्मद बिन मस्लमा

अहज़ाब व कुरैज़ा की लड़ाइयों से फ़ारिग़ होने के बाद यह पहला सरीया है, जिसकी रवानगी अमल में आई। यह तीस आदमियों पर सम्मिलित मुहिम थी ।

इस सरीया को नज्द के अन्दर बकरात के इलाक़े में ज़रीया के आस-पास करता नामी जगह पर भेजा गया था। जरीया और मदीना के दर्मियान सात रात का फासला है। रवानगी 10 मुहर्रम सन् 06 हि० को अमल में आई थी और निशाना बनू बक्र बिन किलाब की एक शाखा थी।

मुसलमानों ने छापा मारा तो दुश्मन के सारे लोग भाग निकले। मुसलमानों ने बकरियां और चौपाए हांक लिए और मुहर्रम में एक दिन बाक़ी था कि मदीना आ गए। ये लोग बनू हनीफ़ा के सरदार समामा बिन असाल हनफ़ी को भी गिरफ़्तार कर लाए थे। वह मुसैलमा कज़्ज़ाब के हुक्म से भेष बदलकर नबी सल्ल० को क़त्ल करने निकले थे। लेकिन मुसलमानों ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया और मदीना लाकर मस्जिदे नबवी के एक खम्भे से बांध दिया।

नबी सल्ल० तशरीफ़ लाए तो पूछा, समामा तुम्हारे नज़दीक क्या है ?

उन्होंने कहा, ऐ मुहम्मद! मेरे नज़दीक खैर (भलाई) है। अगर तुम क़त्ल करो तो एक खून वाले को क़त्ल करोगे और अगर एहसान करो तो एक क़द्र करने वाले पर एहसान करोगे और अगर माल चाहते हो, तो जो चाहे मांग लो। इसके बाद आपने उन्हें उसी हाल पर छोड़ दिया।

फिर आप दोबारा गुज़रे तो फिर वही सवाल किया और समामा ने फिर वही जवाब दिया।

इसके बाद आप तीसरी बार गुज़रे, तो फिर वही सवाल और जवाब हुआ।

आपने सहाबा से फ़रमाया कि समामा को आज़ाद कर दो। उन्होंने आज़ाद कर दिया। समामा मस्जिदे नबवी के क़रीब खजूर के एक बाग़ में गए, गुस्ल किया और आपके पास वापस आकर मुसलमान हो गए, फिर कहा, ख़ुदा की क़सम ! इस धरती पर कोई चेहरा मेरे नज़दीक आपके चेहरे से ज़्यादा नापसन्दीदा न था, लेकिन अब आपका चेहरा दूसरे तमाम चेहरों से पसन्दीदा और प्रिय हो गया है और खुदा की क़सम ! धरती पर कोई दीन मेरे नज़दीक आपके दीन से ज़्यादा पसन्दीदा न था, मगर अब आपका दीन दूसरे तमाम दीनों से ज़्यादा पसन्दीदा हो गया है। आपके सवारों ने मुझे इस हालत में गिरफ़्तार किया था कि मैं उमरे का इरादा कर रहा था।

रसूलुल्लाह सल्ल० ने उन्हें खुशखबरी दी और हुक्म दिया कि उमरा कर लें। जब वह कुरैश के शहर में पहुंचे तो उन्होंने कहा कि समामा ! तुम बद-बदीन

1. सीरत हलबीया 2/297

हो गए हो ?

समामा ने कहा, नहीं, बल्कि मैं मुहम्मद सल्ल० के हाथ पर मुसलमान हो गया हूं। और सुनो, ख़ुदा की क़सम ! तुम्हारे पास से गेहूं का एक दाना नहीं आ सकता, जब तक कि रसूलुल्लाह सल्ल० उसकी इजाज़त न दे दें।

यमामा मक्का वालों के लिए खेत की हैसियत रखता था। हज़रत समामा ने वतन जाकर मक्का के लिए गल्ला रवाना करना बन्द कर दिया, जिससे कुरैश बड़ी कठिनाई में पड़ गए और रसूलुल्लाह सल्ल० को रिश्तेदारी का वास्ता देते हुए लिखा कि समामा को लिख दें कि वह ग़ल्ले की रवानगी बन्द न करें । रसूलुल्लाह सल्ल० ने ऐसा ही किया।

3. ग़ज़वा बनू लह्यान

बनू लह्यान वही हैं जिन्होंने रजीअ नामी जगह पर दस सहाबा किराम रजि० को धोखे से घेरकर आठ को क़त्ल कर दिया था और दो को मक्का वालों के हाथों बेच दिया था, जहां वे बेदर्दी से क़त्ल कर दिए गए थे, लेकिन चूंकि उनका इलाक़ा हिजाज़ के अन्दर बहुत दूर मक्का की सरहदों से क़रीब बाक़े था और उस वक़्त मुसलमानों और कुरैश और अरबों के दर्मियान बड़ा संघर्ष चल रहा था, इसलिए रसूलुल्लाह सल्ल० उस इलाक़े में बहुत अन्दर तक घुसकर ‘बड़े दुश्मन’ के क़रीब चले जाना मुनासिब नहीं समझते थे, लेकनि जब कुफ़्फ़ार के अलग-अलग गिरोहों के दर्मियान फूट पड़ गई, उनके इरादे कमज़ोर पड़ गए और उन्होंने हालात के सामने बड़ी हद तक घुटने टेक दिए, तो आपने महसूस किया कि अब बनू लह्यान से रजीअ के मक्तूलों का बदला लेने का वक़्त आ गया है। सौ

चुनांचे आपने रबीउल अव्वल या जुमादल ऊला सन् 06 हि० में दो सहाबा के साथ उनका रुख किया, मदीना में हज़रत इब्ने उम्मे मक्तूम को अपना जानशीं बनाया और ज़ाहिर किया कि आप शाम देश का इरादा रखते हैं।

इसके बाद आप धावा बोलते हुए अमज और असफ़ान के दर्मियान बलेग़रान नामी एक घाटी में, जहां आपके सहाबा किराम को शहीद किया गया था, पहुंचे और उनके लिए रहमत की दुआएं कीं ।

उधर बनू लह्यान को आपके आने की ख़बर हो गई थी, इसलिए वे पहाड़ की चोटियों पर निकल भागे और उनका कोई भी आदमी पकड़ में न आ सका। आप उनकी धरती पर दो दिन ठहरे रहे। इस बीच सरीए भी भेजे, लेकिन

1. ज़ादुल मआद 2/119, सहीह बुखारी, हदीस न० 4372 आदि फ़हुल बारी 7/688
बनू लह्यान न मिल सके।

इसके बाद आपने अस्फ़ान का रुख किया और वहां से दस घुड़सवार करागुल ग़मीम भेजे ताकि कुरैश को भी आपके आने की खबर हो जाए। इसके बाद आप कुल चौदह दिन मदीने से बाहर गुज़ारकर मदीना वापस आ गए।

इस मुहिम से फ़ारिग़ होकर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक के बाद एक फ़ौजी मुहिमें और सरीए रवाना किए। नीचे उनका संक्षेप में उल्लेख किया जाता है

𝐀𝐥-𝐌𝐮𝐠𝐡𝐢𝐫𝐚 𝐢𝐛𝐧 𝐒𝐡𝐮’𝐛𝐚,  𝐰𝐚𝐬 𝐭𝐡𝐞 𝐟𝐢𝐫𝐬𝐭 𝐢𝐧𝐬𝐭𝐚𝐧𝐜𝐞 𝐨𝐟 𝐛𝐫𝐢𝐛𝐞𝐫𝐲 𝐢𝐧 𝐈𝐬𝐥𝐚𝐦𝐢𝐜 𝐡𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲.

𝐀𝐥-𝐌𝐮𝐠𝐡𝐢𝐫𝐚 𝐢𝐛𝐧 𝐒𝐡𝐮’𝐛𝐚,  𝐰𝐚𝐬 𝐭𝐡𝐞 𝐟𝐢𝐫𝐬𝐭 𝐢𝐧𝐬𝐭𝐚𝐧𝐜𝐞 𝐨𝐟 𝐛𝐫𝐢𝐛𝐞𝐫𝐲 𝐢𝐧 𝐈𝐬𝐥𝐚𝐦𝐢𝐜 𝐡𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲.

☀️Do not consume your property wrongfully, nor use it to bribe judges, intending sinfully and knowingly to consume parts of other people’s property

HolyQuran 2:188

👳‍♂️Al-Suyuti

“The first person to offer a bribe in Islam was al-Mughīra b. Shuʿba. He bribed Yarfaʾ, the chamberlain (ḥājib) of ʿHazrat Umar.”

Sunni source: al-Wasāʾil ilā Maʿrifat al-Awāʾil, by al-Suyūṭī, p. 249.

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☀️Narrated Abdullah ibn Amr ibn al-‘As:
The Messenger of Allah (ﷺ) cursed the one who bribes and the one who takes bribe.

Hadith is Sahih

Sunni source:Sunan Abi Dawud 3580
https://sunnah.com/abudawud:3580

Laila Tul Qadr | a Very Special Episode (Layla tul Qadr | Ramadan 2026)

*SHAB E QADR 27wi SHAB*

*1.* Hazrat Abu Huraira Razi Allahu Tala Anhu Bayan Karte Hain Ke Ek Martaba Hamne Rasoolullah ﷺ Ki Bargah Me Shabe Qadr Ka Tazkira Kiya To Aap ﷺ Ne Farmaya Tum Me Se Kon Ye Baat Yaad Rakhega Shabe Qadr Us Shab Me Hain Jisme Chand Tasht Ke Ek Tukde Ki Tarah Tulu Hota Hai.

📚 *Reference* 📚
Sahi Muslim, Hadees No 1170.

*2.* Imaam Abu Al Hasan Farisi Farmate Hain 27wi Shab Beshak Chand Us Raat Me Usi Sifat Ke Saath Tulu Hota Hai.

📚 *Reference* 📚
Fath Al Bari, Ibn Hajar Al Asqalani, Jild 3, Safa 264.

*3.* Hazrat Ubay Ibn Kaa’b Razi Allahu Tala Anhu Farmate Hain :- Lailat ul Qadr Ramzan Ki 27wi Shab Hi Hain.

📚 *Reference* 📚
*1.* Sahih Muslim, Hadees No 762.
*2.* Sahih Ibn Hibban, Hadees No 3689.
*3.* Sunan Al Kubra, Hadees No 3406.