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कर्बला के 71वें शहीद हज़रते सलमान इब्ने मज़ारिब अल-अनमारी

कर्बला के 71वें शहीद हज़रते सलमान इब्ने मज़ारिब अल-अनमारी

आप कां पूरा नाम सलमान इब्ने मज़ारबि इन्ने कैसअल-अनमारी अल-जबली था। आप जुहैरे कैन के हकीकी चचा ज़ाद भाई थे। आप निहायत दिलेर और बहुत अच्छे जाँबाज़ थे ।

60 हिजरी में जुहैरे-कैन के हमराह हज के लिये गये थे और जुहैरे-कैन के साथ ही शरफे मुलाकाते इमाम हुसैन अलै० से मुशर्रफ हुये थे। मक्के से रवाना होकर जिस जगह से शरफे ख़िदमत हासिल किया था उसी जगह फैसला कर लिया था कि इमाम हुसैन अलै० का अब साथ छोड़ना नहीं है चुनान्चे हमरकाब रहे और यौमे आशूरा बादे नमाज़े ज़ोहर शरफे शहादत से मुशर्रफ होकर इमाम हुसैन अलै० की दुखिया माँ हज़रत फातेमा ज़हरा स० की नजरों में मुमताज़ हो गये।

कर्बला के 72वें शहीद हज़रते मालिक इने अब्दुल्लाह अल-जाबरी

कर्बला के 72वें शहीद हज़रते मालिक इने अब्दुल्लाह अल-जाबरी

आप का नामे-नामी मालिक इब्ने अब्दुल्लाह इब्ने. सरीअ इब्ने जाबिर हमदानी अल-जाबरी था। क़बीला-ए -हमदान से बनी जाबिर भी एक कबीला है। जनाबे मालिक इब्ने अब्दुल्लाह इसी कबीला-ए-जाबिर से ताल्लुक रखते थे। आप निहायत बहादुर और इन्तेहाई मुनसफ़ मिजाज़ थे। आले मोहम्मद की मोहब्बत आप के दिल में भरी हुई थी और अहलेबैते रसूल की ख़िदमत को आप अपना फ़रीज़ा जानते थे।

यौमे आशूरा से पहले इमाम हुसैन अलै० की ख़िद-मत में हाज़िर हुये थे। सुबहे आशूर से आप हंगाम-ऐ कारज़ार में बार-बार दौड़ धूप करने के बाद ब-चश्मे गिरया हाज़िरे ख़िदमत होकर अर्ज़-परवाज़ हुये। मौला ! अब इजाज़ते जिहाद दे दीजिये इमाम हुसैनअ० ने फरमाया मेरे भाई गिरयॉ मत करो अनक्रीब तुम्हारी आँखे ठन्डी हो जायेंगी। मालिक इब्ने अब्दुल्लाह ने अर्ज की मौला ! हम आप की बे-बसी, बे-कसी और आप के बच्चों की प्यास की वजह से गिरयों करते है। मौला ! इस के सिवा और कोई रास्ता हमारे पास नहीं कि हम आप पर अपनी जाँ निसार कर दें। गरज यह कि इमाम हुसैन ने इजाज़त दी और आप रज् मगाह पहुँच कर नबद्र-आज़मा हुये यहाँ तक कि आप घोड़े से गिरे और इमाम हुसैन अलै० ब-आवाज़े बलन्द सलाम किया आपने जवाबे सलाम के बाद फरमाया “व नहनो खल्फोका” मेरे वफ़ादार बहादुर नाना की ख़िदमत में चलो मैं तुम्हारे पीछे बहुत जल्द आ रहा हूँ।