
कर्बला के 58वें शहीद हज़रते अनीस इब्ने मअकल असहबी
आप आले रसूल के जाँनिसारों और ख़ास दोस्तदारों में थे। यौमे आशूरा आप ने इज़्ने जिहाद हासिल किया और मैदान में आकर निहायत दिलेरी और बहादुरी से लड़े और आप ने दस दुश्मनों को कत्ल करने के बाद शहादत पाई।

कर्बला के 58वें शहीद हज़रते अनीस इब्ने मअकल असहबी
आप आले रसूल के जाँनिसारों और ख़ास दोस्तदारों में थे। यौमे आशूरा आप ने इज़्ने जिहाद हासिल किया और मैदान में आकर निहायत दिलेरी और बहादुरी से लड़े और आप ने दस दुश्मनों को कत्ल करने के बाद शहादत पाई।

कर्बला के 59वें शहीद हज़रते जाबिर इब्ने अरवः अल-गफ़्फ़ारी
आप सहाबी-ए-रसूल थे। आपने सरवरे कायनात की मौजूदगी में जंगे बद्र-ओ-हुनैन वगैरह में शिरकत की थी आप निहायत कबीर-उल-सिन और ज़ईफ थे। करबला में यौमे आशूरा जब नबर्दआज़माई के लिये निकले तो आपने अम्मामे से कमर और एक कपड़े से अपनी पलकों को उठा कर बाँध लिया था। इज़्ने जिहाद के बाद ज़बरदस्त जंग की और साठ आदमियों को कत्ल कर खुद शहीद हो गये।

कर्बला के 60वें शहीद हज़रते सालिम मौला आमिर अल-अबदी
आप अपने मालिक आमिर इब्ने मुस्लिम अबदी के हमराह मक्का-ए-मोअज़्ज़मा में हाज़िरे ख़िदमते इमाम हुसैन अलै० हुऐ आपके मालिक जनाब आमिर अमीरूल मोमिनीन के शियो में थे और बसरा के रहने वाले थे।
मक्का से इमाम हुसैन अलै० के हमराह रहे और करबला में अपने मालिक की मईअत में शहीद हुये।

कर्बला के 61वें शहीद हज़रते जिनादह इब्ने कअब ख़ज़रजी
आप का पूरा नाम जिनादह इब्ने कअब इब्ने हरस अल-अन्सारी खज़रजी था। आप कबीला खज़रज की याद-गार थे। आले महोब्बत का शरफ रखते थे मक्का-ए-मोअज़्ज़मा जाकर इमाम हुसैन अलै० के हमराह हो गये थे। आप के अहल-ओ-अयाल आप के हमराह थे यौमे आशूरा आप ने 18 दुश्मनों को कत्ल किया और खुद इस्लाम पर कुर्बान होकर बरगाहे मोहम्मद व आले मोहम्मद में सुखरु हो गये।

कर्बला के 62वें शहीद हज़रते उमर बिन जिनादहे अन्सारी
आप अपने वालिदे माजिद जिनादः के हमराह मक्का-ए-मोअज़्ज़मा होते हुऐ करबला पहुँचे आप कमसिन थे आपकी मादरे गिरामी आपके साथ ही थीं जनाबे जिनादः की शहादत के बाद माँ ने बेटे को आलाते हर्ब से आरास्ता करके इज़्ने जिहाद की ख़ातिर इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में भेजा। इमाम हुसैन अलै० ने फरमाया की बेटा अभी-अभी तुम्हारे बाप ने शहादत पाई है। मैं तुम्हें मैदान की इजाज़त देकर कैसे तुम्हारी माँ को नाराज़ और रंजीदा कर सकता हूँ उसने अर्ज़ की मौला ! मुझे मेरी माँ ने तय्यार करके भेजा है। इस के बाद इमाम हुसैन अलै० ने जंग की इजाज़त दी और उमर इब्ने जिनादः मैदान में जाकर शहीद हो गये।
आपकी शहादत के बाद दुश्मनों ने आपका सर काट कर ख़यामे हुसैनी की तरफ फेका उमर इब्ने जुनादः की माँ ने सर को उठा कर आँखों पर बोसे दिये और फिर उस को वापिस फेक कर कातिल कै सीने पर दे मारा और वह कत्ल हो गया।