अर-रहीकुल मख़्तूम  पार्ट 85

कुछ और सराया

1. सरीया अबुल औजा (ज़िलहिज्जा 07 हि०)

अल्लाह के रसूल सल्ल० ने पचास आदमियों को हज़रत अबुल औजा के नेतृत्व में बनू सुलैम को इस्लाम की दावत देने के लिए रवाना किया, लेकिन जब बनू सुलैम को इस्लाम की दावत दी गई, तो उन्होंने जवाब में कहा कि तुम जिस बात की दावत देते हो, हमें इसकी कोई ज़रूरत नहीं। फिर उन्होंने सख्त लड़ाई की जिसमें अबुल औजा घायल हो गए, फिर भी मुसलमानों ने दुश्मन के दो आदमी क़ैद किए ।

2. सरीया ग़ालिब बिन अब्दुल्लाह (सफ़र सन् 08 हि०)

इन्हें दो सौ आदमियों के साथ फ़िदक के आस-पास में हज़रत बशीर बिन साद के साथियों की शहादतगाह में भेजा गया था। इन लोगों ने जानवरों पर क़ब्ज़ा किया और इनके कई लोग क़त्ल किए। दुश्मन के

3. सरीया ज्ञातु अतलह (रबीउल अव्वल सन् 08 हि०)

हुआ इस सरीया की तफ्सील यह है कि बनू कुज़ाआ ने मुसलमानों पर हमला करने के लिए बड़ा जत्था जुटा रखा था। अल्लाह के रसूल सल्ल० को मालूम तो आपने काब बिन उमैर रज़ि० के नेतृत्व में सिर्फ़ पन्द्रह सहाबा किराम को उनकी तरफ रवाना फ़रमाया। सहाबा किराम ने सामना होने पर उन्हें इस्लाम की दावत दी, पर उन्होंने इस्लाम कुबूल करने के बजाए सहाबा को तीरों से छलनी करके सबको शहीद कर डाला, सिर्फ़ एक आदमी ज़िन्दा बचा जो क़त्ल किए गए लोगों के दर्मियान से उठा लाया गया। 1

4. सरीया ज़ाते अर्क़ (रबीउल अव्वल सन् 08 हि०)

इसकी घटना यह है कि बनू हवाज़िन ने बार-बार दुश्मनों को कुमक पहुंचाई थी, इसलिए 25 आदमियों की कमान देकर हज़रत शुजाअ बिन वब असदी रज़ि० को उनकी ओर रवाना किया गया। ये लोग दुश्मन के जानवर हांक लाए, लेकिन लड़ाई और छेड़छाड़ की नौबत नहीं आई 12

1. रहमतुल लिल आलमीन 2/231

2. वही, व तलक़ीहुल हूम, पृ० 3 (टिप्पणी)

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