
रोज़े से जुड़ी कुछ ग़लतफहमियां
⬅️ पहली ग़लतफहमी: उल्टी आने से रोज़ा टूट जाता है।
✅ सही मसला: अगर खुद-ब-खुद (बिना इरादे के) उल्टी आ जाए, चाहे कितनी भी हो, तो रोज़ा नहीं टूटेगा। लेकिन अगर जानबूझकर (जैसे उंगली डालकर) उल्टी की और वह मुंह भर हो, तो रोज़ा टूट जाएगा।
⬅️ दूसरी ग़लतफहमी: रोज़े की हालत में अगर एहतलाम (स्वप्नदोष) हो जाए तो रोज़ा टूट जाता है।
✅ सही मसला: रोज़े के दौरान एहतलाम होने से रोज़ा नहीं टूटता।
⬅️ तीसरी ग़लतफहमी: कुछ लोग मानते हैं कि थूक या बलगम निगलने से रोज़ा टूट जाएगा या मकरूह होगा, इसलिए बार-बार थूकते रहते हैं।
✅ सही मसला: जब तक थूक या बलगम मुंह के अंदर है, उसे निगलने से रोज़ा नहीं टूटता। लेकिन अगर उसे मुंह से बाहर निकालकर फिर से अंदर डाला जाए, तो रोज़ा टूट जाएगा।
⬅️ चौथी ग़लतफहमी: रोज़े में तेल, इत्र लगाने या नाखून और नीचे के बाल काटने को गलत समझते हैं।
✅ सही मसला: ये सब काम रोज़े की हालत में जायज़ हैं। इसी तरह सुरमा लगाने से भी रोज़ा नहीं टूटेगा, लेकिन काजल लगाने से बचना चाहिए।
⬅️ पाँचवीं ग़लतफहमी: अगर रमज़ान में सहरी में आँख न खुले और सहरी छूट जाए, तो रोज़ा नहीं होगा।
✅ सही मसला: सहरी करना रोज़े के लिए शर्त नहीं है। अगर रात में या ज़वाल से पहले नीयत कर ली जाए, तो रोज़ा सही होगा।
⬅️ छठी ग़लतफहमी: अगर रात में ग़ुस्ल फर्ज़ हो जाए, तो रोज़ा शुरू होने के बाद कुल्ली और नाक में पानी डालना सिर्फ इफ़्तार के वक्त ही करेंगे।
✅ सही मसला: ग़ुस्ल फर्ज़ होने की हालत में रोज़ा शुरू होने से पहले ही नहाना बेहतर है, लेकिन अगर न नहा पाए तो दिन में भी पूरा ग़ुस्ल किया जा सकता है। बस, रोज़े की हालत में गरारे नहीं करेंगे और नाक में पानी बहुत ज्यादा ऊपर नहीं खींचेंगे।
⬅️ सातवीं ग़लतफहमी: रोज़े में मिस्वाक नहीं कर सकते।
✅ सही मसला: मिस्वाक कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि उसके रेशे हलक में न जाएं।
⬅️ आठवीं ग़लतफहमी: जब तक अज़ान हो रही हो, तब तक सहरी में खा-पी सकते हैं।
✅ सही मसला: जब सहरी का वक्त खत्म हो जाता है, तो फ़जर की अज़ान और नमाज़ का वक्त शुरू हो जाता है। इसलिए सहरी खत्म होने के बाद अगर कोई खाना-पीना जारी रखे, तो उसका रोज़ा नहीं होगा।
⬅️ नौवीं ग़लतफहमी: चोट लगने से खून निकलने या ब्लड टेस्ट करवाने से रोज़े पर असर पड़ता है।
✅ सही मसला: शरीर से कुछ निकलने से रोज़ा नहीं टूटता, इसलिए ब्लड टेस्ट या चोट लगने से खून बहने पर रोज़ा नहीं टूटेगा।
⬅️ दसवीं ग़लतफहमी: रोज़े में इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा टूट जाता है।
✅ सही मसला: कुछ उलमा इसे रोज़ा तोड़ने वाला मानते हैं, लेकिन मजबूत दलीलों की रौशनी में इंजेक्शन से रोज़ा नहीं टूटता। सख्त जरूरत हो, तो ड्रिप भी लगवाई जा सकती है।
⬅️ ग्यारहवीं ग़लतफहमी: रोज़े में इत्र या खुशबू सूंघने से रोज़ा टूट जाता है।
✅ सही मसला: अगर कोई लिक्विड या ठोस खुशबू सूंघे, तो रोज़ा नहीं टूटेगा। लेकिन अगर धुएँ (जैसे अगरबत्ती) को जानबूझकर मुँह या नाक से अंदर खींचा जाए, तो रोज़ा टूट जाएगा।


