Hadith : Allah beloved creature

Hazrat Anas bin Malik Raziallahu anhu bayan karte hai ke Nabi e Kareem Sallallahu ta’ala wa’ala aale hi Wasallam ke pass ek Bhuna hua Parinda tha, Rasoolullah Sallallahu ta’ala wa’ala aale hi Wasallam ne Farmaya:

Aye Allah Apne Maqhlook me se apne Mehboob Tareen Shaqs ko bhej de,Jo mere Sath yeh parinda khaye.Toh Maula Ali Alaihisalam inke pass tashrif laye àur Aap Sallallahu ta’ala wa’ala aale hi Wasallam ke sath khaya.

(Sunan Tirmizi -3721)

Narrated Anas bin Malik:

There was a bird with the Prophet Sallallahu ta’ala wa’ala aale hi Wasallam, so he said: ‘O Allah, send to me the most beloved of Your creatures to eat this bird with me.’ So ‘Ali came and ate with him.

(Sunan Tirmizi-3721)

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اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ سَيِّدِنَا مُحَمَّد

मुसलमान और गैर मुस्लिम भाईचारा

सवाल:-एक मुसलमान किसी गैर मुस्लिम के साथ भाईचारा कैसे रख सकता है, जबकि क़ुरआन में उसे काफ़िर यानी गैर मुस्लिम से दोस्ती ना करने का और उससे जिहाद करने का आदेश मिला है?
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जवाब:-दोस्तों, जो गैर मुस्लिम ईश्वर भक्त मुसलमानों से नहीं लड़ते, उनके लिए बुरी युक्तियाँ नहीं करते, परन्तु उनके साथ शांति से रहना चाहते हैं, उन गैर मुस्लिमों के लिए क़ुरआन का साफ़ आदेश देखें-

“जो लोग तुमसे तुम्हारे धर्म के बारे में नहीं लड़ते और न तुम्हें घरों से निकालते, उन लोगों (गैर मुस्लिमों) के साथ सद व्यवहार करने और उनके साथ न्याय से पेश आने से ख़ुदा तुम्हें मना नहीं करता, बेशक ख़ुदा इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है।”
(सुरः मुमतहीना 60:8)

दोस्तों, क़ुरआन की यह एक आयत ही आपत्ति करने वालों के जवाब में बहुत है। लेकिन आपत्ति करने वाले कह सकते है कि-

“क्या पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके सहाबा (अनुयायियों) ने इस आयत का पालन किया है?”

जी हाँ, नबी और उनके अनुयायियों की तो पूरी ज़िंदगी ही ग़ैर मुस्लिमों के साथ भलाई करते बीती है। युद्ध तो उन्होंने सिर्फ़ अत्याचारियों से किए हैं और अधिकतर तो उन्हें भी माफ़ ही किया है। आइये इसके कुछ चंद नमूने आम आपके सामने रखते हैं।

“एक दिन नबी ने देखा कि एक गैर मुस्लिम गुलाम आटा पीस रहा है और दर्द से कराह रहा है, आप उसके पास गए तो पता चला कि वह बहुत बीमार है और उसका मालिक उसको छुट्टी नहीं देता। नबी ने उसको आराम से लिटा दिया और सारा आटा स्वयं पीस दिया और कहा, “जब तुम्हें आटा पीसना हो तो मुझे बुला लिया करो।”
(सहीह अब्दुल मुफ़रद 1425)

“एक देहाती ने मस्जिद में पेशाब कर दिया, लोग उसे पीटने के लिए दौड़े, तो नबी ने उनको रोक कर कहा-” इसे छोड़ दो और इसके पेशाब पर पानी डाल दो इसलिए कि तुम सख्ती करने वाले नहीं, आसानी करने वाले बनाकर भेजे गए हो।”
(सहीह बुखारी, किताबुल वुजू)

“एक बार नबी के एक अनुयायी किसी बात पर अपने गैर मुस्लिम गुलाम को मार रहे थे, संयोग से नबी ने देखा तो दुखी होकर कहा: “जितना अधिकार तुम्हें इस गुलाम पर है, अल्लाह को तुम पर इससे ज़्यादा अधिकार है।” इतना सुन कर वे डर कर बोले, ऐ नबी, मैं इस गुलाम को आज़ाद कर देता हूँ, तो नबी ने कहा: “यदि तुम ऐसा ना करते तो नर्क की आग तुमको ज़रूर छूती।”
(अबू दाऊद, किताबुल अदब)

नबी ने कभी किसी गैर मुस्लिम पर ज़ुल्म नहीं होने दिया, हमेशा न्याय से काम लेते।

“एक बार एक गैर मुस्लिम का एक मुसलमान से झगड़ा हो गया, तो फैसले के लिए दोनों पक्ष नबी के पास आये, दोनों के बयान सुनकर नबी ने फ़ैसला गैर मुस्लिम के हक़ में दिया।”

“पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम गैर मुस्लिमों के तोहफे भी कुबूल करते थे और उनको तोहफे भी देते थे। ऐला के हाकिम ने आपको एक सफेद खच्चर तोहफे में दिया, आपने उसे कुबूल किया और उसकी तरफ़ एक चादर भिजवाई।”
(सहीह बुखारी, किताबुज़्ज़कात)

“ईसाईयों का एक प्रतिनिधि मंडल मदीना आया तो नबी ने उनकी ख़ूब मेहमानदारी की और उनको मस्जिद में ठहराया और साथ ही मस्जिद में उन्हें उनके अपने तरीके पर इबादत करने की अनुमति भी दी।”
(सहीह मुस्लिम, किताबुल अदब)
(अलबिदाया वन्निहाया, भाग-3, पेज नंबर 105)

नबी का आदेश था कि “वह मुस्लिम नहीं हो सकता जो ख़ुद पेट भर कर खाये और उसका पड़ोसी (मुस्लिम या गैर मुस्लिम) भूखा रहे।”
(सहीह अदबुल मुफ़रद 82)

इस्लामिक देशों में रहने वाले गैर मुस्लिमों को इस्लाम की परिभाषा में “ज़िम्मी” कहा जाता है और मुसलमानों को नबी का साफ़ आदेश है-

“जिसने किसी ज़िम्मी (ग़ैर मुस्लिम) पर अत्याचार किया, उसका हक़ मारा, उसकी ताक़त से ज़्यादा उस पर बोझ डाला या उसकी इच्छा के बिना उसकी कोई चीज़ ले ली तो मैं क़यामत के दिन उसकी और से दावा करूँगा।”
(अबू दाऊद, बैहक़ी भाग-5, पेज नंबर 205)

“एक मुसलमान ने एक ज़िम्मी (गैर मुस्लिम) को क़त्ल कर दिया, तो हज़रत उमर ने अपने एक गवर्नर को आदेश दिया कि उस मुसलमान को उस ज़िम्मी के करीबी रिश्तेदार के सामने ले जाओ फिर चाहे तो वह उसे माफ़ कर दे या जान से मार दे और उस रिश्तेदार ने उस मुसलमान की गर्दन काट दी।”

दोस्तों, ये था न्याय और पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्युपरान्त आपके सहाबा भी ज़िम्मी (गैर मुस्लिमों) की इज़्ज़त, आबरू, माल, दौलत और धार्मिक स्वतंत्रता का बड़ा ध्यान रखते थे-

“हज़रत उमर (रज़ि.) विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रतिनिधि मंडल से पूछा करते थे कि किसी मुसलमान की वज़ह से किसी ज़िम्मी (गैर मुस्लिम) को कष्ट तो नहीं दिया जा रहा।”
(तारीखे तबरी, भाग-4, पेज 218)

हज़रत खालिद बिन वलीद (रज़ि.) ने आनात के वासियों के साथ जो समझौता किया उसमें ये वाक्य शामिल था-
“नमाज़ के समयों के अतिरिक्त वे रात दिन जब चाहे नाकूस (शंख) बजा सकते है और जश्न के दिनों में सलीबें गश्त करा सकते हैं।”
(किताबुल खिराज़ पेज नंबर 146)

ये चंद उदाहरण है कि इस्लाम के अनुसार मुसलमानों को गैर मुस्लिम भाई बहनों के साथ सद व्यवहार करने और उनके साथ न्याय से पेश आने का आदेश है।

अब आपत्ति करने वाले कह सकते है कि,
“इस्लाम में गैर मुस्लिम को दोस्त बनाने से मना किया है और मुस्लिम सिर्फ़ मुस्लिमों से दोस्ती कर सकते है!” (क़ुरआन 3:28, 9:23, 3:118)

गैर मुस्लिम में से सिर्फ़ उन लोगों से दोस्ती करने को मना किया गया है जो मुसलमानों का नुक़सान चाहते है और इस्लाम का मज़ाक उड़ाते है, देखें-

“ऐ ईमानवालों, जिसने तुम्हारे धर्म को हँसी खेल बना लिया है, उन्हें मित्र ना बनाओ।”
(सुरः माइदा 5:57)

“अल्लाह तो तुम्हें केवल उन लोगों से मित्रता करने से रोकता है जिन्होंने धर्म के मामले में तुमसे युद्ध किया और तुम्हें तुम्हारे अपने घरों से निकाला और तुम्हें निकालने में अत्याचारियों की मदद की।”
(सुरः मुमतहीना 60:9)

👉 दोस्तों, यदि कोई व्यक्ति आपके धर्म को बुरा कहे, आपके भगवानों को गालियाँ दे और आपकी बर्बादी के लिए कोशिशें करें तो क्या ऐसे व्यक्ति से आप दोस्ती करोगे?

साथ ही एक मंशा के तहत यह बताने की कोशिश की जाती है कि मुस्लिम विश्व में कभी किसी के साथ शान्ति से नहीं रहा, जो कि पूर्ण असत्य और निराधार बात है, ज़्यादा पीछे जाने की आवश्यकता नहीं बल्कि आज भी एक निरपेक्ष व्यक्ति यह जानता है कि विश्व में कई मुस्लिम देश है जिनमें सदियों से गैर मुस्लिम बड़ी शांति और आराम से रह रहे हैं, बल्कि आंकड़े बताते हैं कि हर साल इन देशों में जाने और वहीं बस जाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। क़तर, कुवैत, ओमान, दुबई ऐसी कई जगह हैं। खाड़ी देशों को छोड़ भी दे तो मलेशिया में 61.3% मुस्लिम है जो बाक़ी 39% गैर मुस्लिमों के साथ शांति से रह रहे हैं यही स्थिति इंडोनेशिया की है, सिंगापुर आदि ऐसे कई मुल्क हैं जहाँ इस्लाम दूसरा या तीसरा प्रमुख धर्म है और इन सभी जगह सदियों से मुस्लिम-गैर मुस्लिमों के साथ शांति से रह रहे हैं।

Hadees_e_Pak #12_Khalifa


Hz. Jabir Bin Samura ر Se Riwayat Hai Ke,
Maine RasoolAllah ﷺ Ko Kehte Huye
Suna ke :: “Islam Ghalib Rahega
12 Khalifa’oñ Ki Khilafat Tak”
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Iske Baad, AAP ﷺ Ne Kuch Farmaya,
Jo Mujhe Samajh Naa Aaya Tou Maine
Mere Walid Se Pooncha Tou Unhoney
Kaha ke, RasoolAllah ﷺ Ne Farmaye ::
“(Woh 12 Khalifa), Sab Ke Sab Quraish
Se Honge”
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Reference ::

(Sahih Muslim, Volume 5, Hadees No.4708)

Hz. Jabir Bin Samura ر Se Orr Bhi Riwayateñ
Milti Haiñ, Jisme RasoolAllah ﷺ Farma
Raheñ hain Ke :: ” Ye Khilafat Tab Tak
Tamaam Naa Hongi, Jab Tak Isme
12 Khalifa Naa Honge “
_
Reference ::
(Sahih Muslim, Hadees No.4705)
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Ek Or Riwayat Me Hai Ke, RasoolAllah ﷺ
Ne Farmaya :: ” Hamesha Logoñ Ka Kaam
Chalta Rahega, Yahañ Tak Ke Unki Hukumat
Karenge 12 Aadmi (Yaani 👉 12 Khalifa)”
_
Reference ::

(Sahih Muslim, Hadees No.4705)

RasoolAllah ﷺ Ke In 12 Khalifa’on Se
Muraad 12 Aimma e Ahlebait ع Hee Hain,
Jiska Iqraar Muhaddiseen Ne bhi Kiya Hai,
Ye Likh’kar Ke :: “12 Imam Hee Huzoor ﷺ
Ke 12 Batini Khalifa Hain”.. In 12 Khalifa’on
Me Se 11 Khalifa (Imam) Ke Dour Me Islam
Ghalib Hee Raha Hai Orr Jinki Badoulat
Aaj Bhi Islaam Urooj Par Hai….. Orr Ab,
Jab Tak 12’ve Imam Muhammad Al Mahdi ع
Ka Zahoor Nahi Ho Jaata, Tab Tak Ye Nizaam
Syedna Muhiyuddin Abdul Qadir Al Hasni Al
Jeelani ع Ke Supurd Rahega, Jo ke Gausiyat’e
Kubra ke Muqaam Pe Faiz Hain… 💚
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RasoolAllah ﷺ Ke 12 Khalifa 💚
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
1.) Imam Ali Ibne Abi Talib ع
2.) Imam Hasan Al Mujtaba ع
3.) Imam Hussain Sayyed Al Shuhada ع
4.) Imam Ali Al Zainul Abideen ع
5.) Imam Muhammad Al Baqir ع
6.) Imam Jafar Al Sadiq ع
7.) Imam Musa Al Kazim ع
8.) Imam Ali Al Raza ع
9.) Imam Muhammad Al Taqi ع
10.) Imam Ali Al Naqi ع
11.) Imam Hasan Al Askari ع

12.) Imam Muhammad Al Mahdi ع

Without the Kaaba this world can stop.

American writers prof. Lawrence E. Yoseph wrote about the Ka’aba

Without the Kaaba this world can stop, Sub-haanallaah:

Americana writes: “If Muslims stop performing tawaf or prayers on this earth, surely our earth’s rotation will stop, because the rotation of the super conductor centered on the Black Stone, will no longer scatter electromagnetic waves.

According to the results of research from 15 universities show Hajar Aswad is a meteorite that has a very high metal content, which is 23,000 times that of existing steel. Some astronauts who took to see a very bright light emanating from the earth and after research turned out to be sourced from the Temple or the Kaaba. The super conductor is Hajar Aswad, who functions like a microphone that is broadcast and reaches thousands of miles of broadcast range.

Prof. Lawrence E. Yoseph – Fl Whiple wrote: “We really owe a huge debt to Muslims, because tawaf and prayers are on time to keep the super conductor.

“Sub-haanallaah, Alhamdulillaah, Laa Ilaaha illallaah, Allaahu Akbar. How thrilled we are to see the enormity of the movements of the Hajj and Umrah.

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Sub-haanallaah.