रमजान में गुनाह करने वाले की कब्र का भयानक मन्जर

रमजान में गुनाह करने वाले की कब्र का भयानक मन्जर
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ
اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ
एक बार अमीरुल मोअमिनीन हज़रते मौलाए काइनात अलिय्युल मुर्तज़ा शेरे खुदा رضي الله عنه जियारते कुबूर के लिये कूफा के कब्रिस्तान तशरीफ़ ले गए। वहां एक ताजा कब्र पर नज़र पड़ी। आप को उस के हालात मालूम करने की ख्वाहिश हुई। चुनान्चे, बारगाहे खुदावन्दी में अर्ज गुज़ार हुवे : “या अाल्लाह इस मय्यित के हालात मुझ पर ज़ाहिर फ़रमा।’ अलाह की बारगाह में आप की इल्तिजा फौरन सुनी गई और देखते ही देखते आप के और उस मुर्दे के दरमियान जितने पर्दे हाइल थे तमाम उठा दिये गए।
अब एक कब्र का भयानक मन्जर आप के सामने था ! क्या देखते हैं कि मुर्दा आग की लपेट में है और रो रो कर आप से इस तरह फ़रयाद कर रहा है : ”या अली ! मैं आग में डूबा हुवा हूं और आग में जल रहा हूं। कब्र के दहशत नाक मन्जर और मुर्दे की दर्दनाक पुकार ने हैदरे कर्रार رضي الله عنه को बेकरार कर दिया। आप ने अपने रहमत वाले परवर दगार के दरबार में हाथ उठा दिये और निहायत ही आजिज़ी के साथ उस मय्यित की बख्शिश के लिये दरख्वास्त पेश की।
गैब से आवाज़ आई ऐ अली ! आप इस की सिफ़ारिश न ही फ़रमाएं क्यूंकि रोजे रखने के बा वुजूद येह शख्स रमज़ानुल मुबारक की बे हुरमती करता, रमज़ानुल मुबारक में भी गुनाहों से बाज़ न आता था। दिन को रोजे तो रख लेता मगर रातों को गुनाहों में मुब्तला रहता था।
मौलाए काइनात رضي الله عنه येह सुन कर और भी रन्जीदा हो गए और सजदे में गिर कर रो रो कर अर्ज करने लगे : या अल्लाह मेरी लाज तेरे हाथ में है, इस बन्दे ने बड़ी उम्मीद के साथ मुझे पुकारा है, मेरे मालिक तू मुझे इस के आगे रुस्वा न फ़रमा, इस की बे बसी पर रहम फ़रमा दे और इस बेचारे को बख्श दे।
हज़रते अली رضي الله عنه रो रो कर मुनाजात कर रहे थे। अल्लाह की रहमत का दरया जोश में आ गया और निदा आई : “ऐ अली ! हम ने तुम्हारी शिकस्ता दिली के सबब इसे बख्श दिया।” चुनान्चे, उस मुर्दे पर से अज़ाब उठा लिया गया।
जो लोग रोजा रखने के बा वुजूद गुनाह की सूरतों पर मुश्तमिल ताश, शतरंज, लुड्डो, मोबाइल, आई पेड वगैरहा पर वीडियो गेम्ज, फ़िल्में, डिरामे, गाने बाजे, दाढ़ी मुन्डाना या एक मुट्ठी से घटाना, बिला उज्रे शरई जमाअत तर्क कर देना बल्कि معاذ الله नमाज़ कज़ा कर देना, झूट, गीबत, चुगली, बद गुमानी, वादा ख़िलाफ़ी, गाली गलोच, बिला इजाज़ते शरई मुसलमान की ईज़ा रसानी, मां-बाप की ना फ़रमानी, सूद व रिश्वत का लेन देन, कारोबार में धोका देना वगैरा वगैरा बुराइयों से रमज़ानुल मुबारक में भी बाज नहीं आते उन के लिये बयान की हुई हिकायत में इब्रत ही इब्रत है।

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