कर्बला के 67वें शहीद हज़रते हरस इब्ने अमरु कैस अल कन्दी

कर्बला के 67वें शहीद हज़रते हरस इब्ने अमरु कैस अल कन्दी

आप अरब के शुजाओं में मशहूर थे। आप बड़े बहादुर और ज़बरदस्त ज़ाहिद थे। इस्लामी जंगो में अक्सर आप का ज़िक्र आया है। आप लश्कर इब्ने सअद के साथ करबला आये थे और जब तक सुलह की बात-चीत होती रही आपको आकेबत की फ़िक्र नही हुई लेकिन यह तय हो जाने के बाद किं इमाम हुसैन अ० का ख़ून ज़रूर बहाया जायेगा उनके दिल में इज़्तेराब और बेचैनी पैदा हो गई चुनान्चे आप लश्करे उमरे सअद से निकल कर ख़िदमते इमाम अलै० में हाज़िर हो गये और यौमे आशूर ज़बरदस्त जंग के बाद जामे शहादत नोश फरमा लिया।

कर्बला के 68वें शहीद हज़रते यज़ीद इब्ने ज़ियाद हदली

कर्बला के 68वें शहीद हज़रते यज़ीद इब्ने ज़ियाद हदली

आप का पूरा नाम यज़ीद इब्ने ज़ियाद इब्ने मुहाजिर अल-क़न्दी अल-हदली था। और कुन्नियत अबू शअसा थी। आप अपनी कौम के शरीफ और सरदार थे। आपको फुनूने जंग में बड़ी महारत थी।

आप कूफ़े से निकल कर रिसालः से पहले इमाम हुसैन अलै० से जा मिले थे और कूड़े के तमाम हालात से आप को ब-ख़बर किया था। हुर्र के लश्कर के आ जाने के बाद इब्ने ज़ियाद ने एक ख़त मालिक नसरकन्दी के ज़रिये हुर्र को भेजा था। इब्ने नसर ख़त लेकर और जवाब लेकर जाने ही वाला था कि आप ने उससे मुलाकात करके उसके तर्जे अमल पर इज़ाहारे अफसोस किया। उसने इताअते यज़ीदे म० ल० का हवाला. देकर उन्हे ख़ामोश करना चाहा लेकिन आपने उसके जवाब में कहा कि यज़ीदे म० ल० की इताअत खुदा की नराज़गी से नही बचा सकती। तुझे खुदा और रसूल स० को मुँह दिखाना है।

यौमे आशूरा आप मैदाने कारज़ार में आये और निहायत बे-जिगरी से लडने लगे। यहा तक कि आपके घोडे के पाँव काट दिये गये और आप जमीन पर आ रहे उस वक़्त आपके तरकश में सौ तीर थे। आप ने उन्हें लश्करे कुफ्फार की तरफ फेंका जिसके नतीजे में पच्चान्नबे 95 दुश्मन हलाक हुए यानि सिर्फ पाँच तीर खाली गये। आपके हर तीर के साथ इमाम हुसैन अलै० कामयाबी की दुआ करते थे।

तीरों के ख़त्म हो जाने के बाद आप उठ खड़े हुए और तलवार से हमला करने लगे। यहा तक कि दरजा-ए-शहादत हासिल कर लिया।

कर्बला के 69वें शहीद हज़रते अबु उमरू अल-नहशली

कर्बला के 69वें शहीद हज़रते अबु उमरू अल-नहशली

आप आबिदे शब ज़िन्दा-दार, निहायत मुत्तकी और परहेज़गार थे। आपको महोब्बते आले मोहम्मद स० में बेइन्तेहा शग़फ था। आप फनूने जंग से बहुत ज़्यादा आगाह थे।

आप ने यौमे आशूरा शेरे गुरना की तरह बेशुमार हमले किये और बेइन्तेहा लोगों को फना के घाट उतारा। बिल आखिर दुश्मनों ने आप को घेर लिया और हर किस्म के हमले आप पर करने लगे। यहाँ तक कि कबीला-ए-बनी सअलबा के एक बदबख़्त अम्मार इब्ने नहशल ने आपको शहीद कर दिया।