It has been narrated by Orwah, that when Amir Ibn Fohairah was martyred his body was not found. People were of the opinion that the angels had hidden him. It has been stated in another tradition that Nabi (SAW) said that the angels had hidden his body and landed him amongst the ‘illiyyain’. (Hayatus Sahabah)
⬅️ पहली ग़लतफहमी: उल्टी आने से रोज़ा टूट जाता है। ✅ सही मसला: अगर खुद-ब-खुद (बिना इरादे के) उल्टी आ जाए, चाहे कितनी भी हो, तो रोज़ा नहीं टूटेगा। लेकिन अगर जानबूझकर (जैसे उंगली डालकर) उल्टी की और वह मुंह भर हो, तो रोज़ा टूट जाएगा।
⬅️ दूसरी ग़लतफहमी: रोज़े की हालत में अगर एहतलाम (स्वप्नदोष) हो जाए तो रोज़ा टूट जाता है। ✅ सही मसला: रोज़े के दौरान एहतलाम होने से रोज़ा नहीं टूटता।
⬅️ तीसरी ग़लतफहमी: कुछ लोग मानते हैं कि थूक या बलगम निगलने से रोज़ा टूट जाएगा या मकरूह होगा, इसलिए बार-बार थूकते रहते हैं। ✅ सही मसला: जब तक थूक या बलगम मुंह के अंदर है, उसे निगलने से रोज़ा नहीं टूटता। लेकिन अगर उसे मुंह से बाहर निकालकर फिर से अंदर डाला जाए, तो रोज़ा टूट जाएगा।
⬅️ चौथी ग़लतफहमी: रोज़े में तेल, इत्र लगाने या नाखून और नीचे के बाल काटने को गलत समझते हैं। ✅ सही मसला: ये सब काम रोज़े की हालत में जायज़ हैं। इसी तरह सुरमा लगाने से भी रोज़ा नहीं टूटेगा, लेकिन काजल लगाने से बचना चाहिए।
⬅️ पाँचवीं ग़लतफहमी: अगर रमज़ान में सहरी में आँख न खुले और सहरी छूट जाए, तो रोज़ा नहीं होगा। ✅ सही मसला: सहरी करना रोज़े के लिए शर्त नहीं है। अगर रात में या ज़वाल से पहले नीयत कर ली जाए, तो रोज़ा सही होगा।
⬅️ छठी ग़लतफहमी: अगर रात में ग़ुस्ल फर्ज़ हो जाए, तो रोज़ा शुरू होने के बाद कुल्ली और नाक में पानी डालना सिर्फ इफ़्तार के वक्त ही करेंगे। ✅ सही मसला: ग़ुस्ल फर्ज़ होने की हालत में रोज़ा शुरू होने से पहले ही नहाना बेहतर है, लेकिन अगर न नहा पाए तो दिन में भी पूरा ग़ुस्ल किया जा सकता है। बस, रोज़े की हालत में गरारे नहीं करेंगे और नाक में पानी बहुत ज्यादा ऊपर नहीं खींचेंगे।
⬅️ सातवीं ग़लतफहमी: रोज़े में मिस्वाक नहीं कर सकते। ✅ सही मसला: मिस्वाक कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि उसके रेशे हलक में न जाएं।
⬅️ आठवीं ग़लतफहमी: जब तक अज़ान हो रही हो, तब तक सहरी में खा-पी सकते हैं। ✅ सही मसला: जब सहरी का वक्त खत्म हो जाता है, तो फ़जर की अज़ान और नमाज़ का वक्त शुरू हो जाता है। इसलिए सहरी खत्म होने के बाद अगर कोई खाना-पीना जारी रखे, तो उसका रोज़ा नहीं होगा।
⬅️ नौवीं ग़लतफहमी: चोट लगने से खून निकलने या ब्लड टेस्ट करवाने से रोज़े पर असर पड़ता है। ✅ सही मसला: शरीर से कुछ निकलने से रोज़ा नहीं टूटता, इसलिए ब्लड टेस्ट या चोट लगने से खून बहने पर रोज़ा नहीं टूटेगा।
⬅️ दसवीं ग़लतफहमी: रोज़े में इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा टूट जाता है। ✅ सही मसला: कुछ उलमा इसे रोज़ा तोड़ने वाला मानते हैं, लेकिन मजबूत दलीलों की रौशनी में इंजेक्शन से रोज़ा नहीं टूटता। सख्त जरूरत हो, तो ड्रिप भी लगवाई जा सकती है।
⬅️ ग्यारहवीं ग़लतफहमी: रोज़े में इत्र या खुशबू सूंघने से रोज़ा टूट जाता है। ✅ सही मसला: अगर कोई लिक्विड या ठोस खुशबू सूंघे, तो रोज़ा नहीं टूटेगा। लेकिन अगर धुएँ (जैसे अगरबत्ती) को जानबूझकर मुँह या नाक से अंदर खींचा जाए, तो रोज़ा टूट जाएगा।