
बारह सौ साल से ज्यादा हो गए ट्यूनीशिया के शहर कैरवान में मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह फहरी नाम के एक व्यापारी रहते थे वह शहर के प्रतिष्ठित लोगों में से थे नेक लोगों में शुमार होता था शिक्षा दौलत और नेकी सभी गुण उन में थे फातेहीन के खानदान से थे उन के पूर्वजों में से उकबा बिन नाफे ने इस कैरवान शहर को बसाया था
उन की दो छोटी और प्यारी बच्चियां थीं नाम था फातिमा और मरियम
पड़ोसी देश मोरक्को मे इदरीसी सल्तनत कायम हुई थी जिस की शान व शौकत के चर्चे ज़ोरों पर थे वहां के सुलतान इदरीस सानी एक नया शहर बसा रहे थे जिस का नाम फास (इंग्लिश में Fez) था और इसे वह अपनी राजधानी बनाना चाहते थे
मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह फहरी ने नए शहर के चर्चे सुने देखने का शौक हुआ वहाँ गए शहर पसंद आ गया इस नए फास शहर में आबाद होने का इरादा कर लिया कैरवान शहर से कारोबार समेटा और फास में व्यापार फैला लिया चूंकि कैरवान शहर छोड़ कर आए थे इस लिए नए शहर में इन के घराने को करवीइन कहा जाने लगा
दोनों बच्चियां बड़ी हो रही थी दोनों की अपने ही जैसे व्यापारिक खानदानों में शादी कर दी
लेकिन कुदरत को कुछ और मंजूर था बेटियों की शादी के कुछ वर्षों बाद उन का इंतकाल हो गया उन की जायदाद बेटियों के हिस्से में आई बेटियां पहले ही मालदार घरानों में थीं किसी चीज़ की कोई कमी नहीं थी वह वालिद की विरासत को किसी अच्छे और नेक काम में लगाना चाहती थीं
अल्लाह का करना ऐसा हुआ कि मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह फहरी के इंतकाल के कुछ महीने बाद उन के बड़े दामाद का भी इंतकाल हो गया इस तरह बड़ी बेटी फातिमा पर दोहरा गम आ पड़ा वालिद के साथ साथ शौहर का गम
लेकिन दोनों बच्चियों की तरबियत एक नेक और व्यापारी बाप ने की थी दोनों पर उन का प्रभाव था बेटी फातिमा ने अपने शौहर का कारोबार बखूबी संभाल लिया
फातिमा ने दूसरी शादी नहीं की खुद की औलाद नहीं थी इस लिए गरीब और यतीम बच्चों को पालने लगीं यहाँ तक कि वह उम्मुल बनीन कही जाने लगीं यानी ढेर सारे बच्चों की माँ
दोनों बहनों ने अपने वालिद से मिले पैसे से एक एक मस्जिद और मदरसा बनाया फातिमा के बनाए हुए मदरसा का नाम क़रवीन और मरियम के बनाए हुए मदरसा का नाम उंदलुस था
1200 साल गुजर गए बनाने वालियों का खुलूस था या कोई और बात थी आज भी दोनों मदरसे मौजूद हैं बस क़रवीन युनिवर्सिटी बन चुकी है और उंदलुस एक कालेज है
क़रवीन युनिवर्सिटी को दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी युनिवर्सिटी कहा जाता है फातिमा जो उम्मुल बनीन फातिमा फहरी के नाम से मशहूर हुई उन का नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया आज हम में से तकरीबन हर आदमी उन का नाम जानता है उन की इज्जत व एहतराम करता है
यह मदरसा जो आगे चलकर युनिवर्सिटी बना इस की स्थापना सन 859 ईस्वी में हुई और सन 878 में फातिमा फहरी का इंतकाल हो गया
फातिमा फहरी और उन की बहन मरियम फहरी जैसी बहुत सी खवातीन हमारे इस्लामिक हिस्ट्री का हिस्सा हैं हमें कभी-कभी उन्हें याद करते रहना चाहिए

