Ya Ali

*अली कि मदह मे बस साहिब ए किरदार बोलेगा*
*हैं जिसकी नस्ल पाकिज़ा वही हर बार बोलेगा*
*ज़ुबां कट जाये सर तन से जुदा हो जाये कुछ भी हो*
*अली वाला तो हर दम हैदर ए कर्रार बोलेगा*
*निस्बत मिली हैं पीर की सदका अली का हैं*
*सब से अलग तारीख में* *रुतबा अली का हैं*
*शेरे खुदा के वास्ते सूरज* *भी पलट गया*
*अल्लाह भी नाज़ उठाये* *वो सज़दा अली का*
*हैं*
*खैबर का काँप जाना हैं अपनी जगह मगर*
*जो बातिल को हिला दें वो नारा अली*
*का*
*नारा_ए_हैदरी*
*या_अली

 

 
 *तेरे ख़ून में शामिल बुग्ज़े अली*
*मेरी रूह में शामिल अली अली*

*तेरे दिल पर कुफ़्र का पहरा है*
*मेरी धड़कन बोले अली अली*

*तू दर दर ठोकर खाता रहा*
*मेरा एक ही दर है अली अली*

*तेरा शजरा तुझको पता नही*
*मेरा हसब वा नस्ब है अली अली*

*तू नामें अली से जल कर मरे*
*मेरे विर्द में शामिल अली अली*

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Dewaan e qutub

Khuda Jane azal Kya hai
Khuda Jane abad Kya hai
Mye itna janta hoo’n Bas
ki mye na ahel thaira

Raha jab hosh me to ek
abadi badhawasi thi
Hua jab hosh gum to
khirade hosh azal thaira”

Yaqi’n hai mujh ko mere
Jism ka khaki hone par
Magar hai ye bhi Yaqi ki
Rooh ye noor e fazal thaira”

Khuda Jane azal Kya hai
Khuda Jane abad Kya hai
Mye itna janta hoo’n Bas
Ki mye na ahel thaira”

“Meer aquib”