
Sayyid Ayatullah Ali Khaminai Ki Shahadat! Maulana Syed Salman Nadwi









गिरते हैं शह सवार ही मैदान-ए-जंग में,
वो तिफ्ल क्या गिरे, जो घुटनों के बल चले।
यह शेर आज फिर सच हो गया। क्योंकि असली लीडर वही होता है जो तलवार की धार पर चलता है, न कि गद्दी की चिकनाई पर फिसलता है। शहीद आयुतुल्लाह ख़ामेनई ने साबित कर दिया कि सत्ता का मतलब सर झुकाना नहीं, बल्कि सिर कटाने का साहस है। उन्होंने वह रास्ता चुना जो करबला की तरफ जाता है जहाँ पानी नहीं, बल्कि इज्जत बहती है।
एक तरफ सारी दुनिया, दूसरी तरफ सत्य। एक तरफ जीवन, दूसरी तरफ हक़। उन्होंने जीवन नहीं, हक़ चुना। ख़ामेनई ने समझौते की आसान राह को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा मैं घुटनों के बल नहीं चलूँगा। अगर गिरना है तो घोड़े पर सवार गिरूँगा, शह-सवार की तरह। दुनिया उन्हें बदनाम करेगी, इतिहास उन्हें याद रखेगा। क्योंकि इतिहास कभी समझौतावादियों को नहीं, बल्कि उन शहीदों को अमर बनाता है जिन्होंने सिर कटवाया लेकिन सिर नहीं झुकाया।
आज चारों तरफ यज़ीद के दरबारी खड़े हैं कुछ एप्सटीन फाइल्स के कलाकार, कुछ उनके प्रचारक। वे कह रहे हैं, थोड़ा झुक लो, थोड़ा तारीफ कर दो, थोड़ा समझौता कर लो। यह उस सच्चाई की कहानी है जो कभी घुटनों के बल नहीं चलती। सलाम उस शह सवार को, जो गिरा तो मैदान-ए-जंग में, लेकिन कभी नहीं झुका।
या शहीद अस्सलाम



