हज़रत मोहम्मद ﷺ अपने नसब पर फख्र फरमाते थे

हज़रत रसूल अकरम ﷺ का ख़ानदान और उनके ऐजाज़ात का ज़िक्र

हजरत रसूले ख़ुदा ने हज़रत फ़ातेमा की शादी के बाद अपनी दुख्तर नेक अख्तर से फरमाया:

ऐ फ़ातेमा ! हम अहले बैत को खुदावन्द तबारक ने कुछ एसी ख़सलतें अता फरमाई हैं जो ना तो हमसे पहले वाले किसी शख़्स को अता फरमाई हैं और ना ही हमारे बाद किसी को अता फरमाई जाएंगी और वोह ख़सलतें यह हैं:-

1. हमारा नबी खैरूल-अंबिया’ है और वोह तुम्हारा बाबा है।

2. हमारा वसी खैरूल-औसीया’ है और वोह आपका शौहर है।

3. हमारे शहीद सैय्यदुल-शोहदा हज़रत हम्जा हैं जो तुम्हारे चचा है।

4. हजरत जा’फ़र तैय्यार की यह शान है के अल्लाह तबारक व तआला ने उन्हें जन्नत में दो पर अता फरमा रखे हैं और वोह जन्नत में हर तरफ परवाज़ फरमाते हैं। वोह भी हममें से हैं और तुम्हारे चचा हैं।

5. हम ही में से उम्मत के सिब्तैन हैं और वोह तुम्हारे दोनों फ़र्ज़न्द हैं (इमाम हसन और इमाम हुसैन अलैहिमुस्सलाम)

बहवालाः खसाएले शैख सहुक्क्र अलैहिर्रहमा और बहारूल-
अनवार मुतरजम, जिल्दः 3, सफ़हा: 164 |

हज़रत मोहम्मदﷺ अपने नसब पर फख्र फरमाते थे

जंगे हुनैन में हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने रिजज़ करते हुए फरमाया था के “मैं नबी हूँ, नबी के अन्दर झूठ नहीं होता, मैं बनी हाशिम से हूँ, मेरा ख़ानदान का’बा का मुतवल्ली है, मैं अब्दुल्लाह और अब्दुल मुत्तलिबका बेटा हूँ”।

एक और हदीस में जनाब रसूल अकरम का इरशाद मुबारक है के, “ख़ुदावन्द आलम मेरे दादा अब्दुल-मुत्तलिब को नबियों की हैबत और बादशाहों की वज़अ-क़तअ में इस तरह उठाएगा के वोह अपनी शख़्सियत के लिहाज़ से एक उम्मत शुमार हों।

ख़ुदावन्द आलम ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की औलाद से हज़रत इस्माईल और हजरत इस्माईल की औलाद से बनी किनाना को, और बनी किनाना से कुरैश, और कुरैश से बनी हाशिम और बनी हाशिम में से मुझे मुन्तख़ब फरमाया ।

जनाब रसूल अकरम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का इरशाद है के मैं मोहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह इब्ने अब्दुल मुत्तलिब हूँ। तहक़ीक़ के ख़ुदावन्द आलम ने मख्लूक को ख़ल्क़ फरमाया और मुझे उनसे अफ़ज़ल व आ’ला बनाया। फिर जब ख़ालिक़ ने उनके दो फ़िरक्रे बनाए तो मुझे बेहतर में रखा। फिर अल्लाह ने उनको क़बाएल में तक़्सीम किया तो मुझे बेहतर क़बीले में पैदा फरमाया, फिर जब अपने मख्लूक़ के घराने तरतीब दिए तो मुझे बेहतर घराने में रखा, पस मैं तमाम मख्लूक्रे ख़ुदा से बेहतर घराने वाला और सबसे बेहतर वजूद हूँ।

बहवालाः (1) सीरते अमीरूल-मो’मेनीन, जिल्दः 65 (2) सहीफ़ा ए सादात, तबए सौएम, सफ़हा: 351 (3) कंजुल-उम्माल, जिल्द 6, सफ़हा: 401 (5) खसाएसुल-कुबरा-अल-सुयूती, अलबुरहान, जिल्दः 71 (6) हुरमते बिनात रसूल सफ़हाः 86 |

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