

1️⃣ हदीस – मुहब्बत-ए-रसूल ﷺ
हवाला: Sahih al-Bukhari
अरबी:
لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَالِدِهِ وَوَلَدِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
हिंदी में:
“तुम में से कोई भी उस वक़्त तक पूरा मोमिन नहीं हो सकता जब तक मैं (मुहम्मद ﷺ) उसे उसके बाप, बेटे और तमाम लोगों से ज़्यादा महबूब न हो जाऊँ।”
📚 हवाला:
सहीह बुखारी – हदीस 15
सहीह मुस्लिम – हदीस 44
2️⃣ आल-ए-मुहम्मद से मुहब्बत की हदीस
हवाला: Sahih Muslim
हदीस का मफ़हूम:
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:
“मैं तुम्हें **अहल-ए-बैत के बारे में अल्लाह से डरने की नसीहत करता हूँ।”
📚 हवाला:
सहीह मुस्लिम – हदीस 2408
✅ नतीजा:
मुसलमान के लिए रसूल ﷺ से हर रिश्ते से ज्यादा मुहब्बत जरूरी है।
और आल-ए-मुहम्मद (अहल-ए-बैत) से मुहब्बत भी दीन का अहम हिस्सा है।

